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शिक्षा विभाग सुधारेगा इंस्पेक्शन कैडर की कार्यप्रणाली

शिक्षा विभाग में करीब तीन साल पहले बनाए गए इंस्पेक्शन कॉडर की पारदर्शी कार्यप्रणाली में खोट आना शुरू हो गया है। कई...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 23, 2018, 02:00 AM IST

शिक्षा विभाग में करीब तीन साल पहले बनाए गए इंस्पेक्शन कॉडर की पारदर्शी कार्यप्रणाली में खोट आना शुरू हो गया है। कई जगह इनके अधिकारियों पर भेदभाव वाली सोच भी हावी हो गई है, जो भविष्य में ईमानदारी से अपनी ड्‌यूटी निभाने वालों के लिए घातक साबित हो सकती है। क्याेंकि इनकी रिपोर्ट डायरेक्टर की बजाए सीधे शिक्षा सचिव को जाती और वहां से सीधे संबंधित स्कूलों को नोटिस जारी हो रहे हैं। कुछ एक भेदभाव वाले मामलों की रिपोर्ट शिक्षा सचिव के पास भी पहुंच गई है। अब वे इस कैडर के अधिकारियों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने को तैयार हो गए हैं। उनके द्वारा डिप्टी डायरेक्टर निरीक्षण की बैठक भी बुलाई गई है। इसमें इन मुद्दों पर खासी चर्चा होगी। जहां जहां शक की सूई घूम रही, अगर वहां सुधार न हुआ तो फेरबदल की गाज गिरना तय है, वैसे भी दो-तीन साल में ऐसा होना संभव है। वहीं, इस कैडर में डेपोटेशन पर बैठे जूनियर भी चपेट में आएंगे।

हो रही है बेरुखी

कई जगह भेदभाव वाली सोच हो गई है अधिकारियों पर हावी, शिक्षा सचिव तक पहुंचा मामला

इस कॉडर का असल काम स्कूलों में टीचरों और प्रबंधन की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन करना

दस्तावेज खंगाल रहे, टीचरों के मामले में गढ़बढ़ हो रही

काबिलेगौर है कि इस कॉडर का असल काम स्कूलों में टीचरों और प्रबंधन की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन करना है। विकास कार्यों और नॉन टीचिंग स्टाॅफ के दस्वावेज खंगाल कर यह टीम सही मूल्यांकन की रिपोर्ट जरूर दे रही, लेकिन टीचरों के मामले में गढ़बढ़ शुरू हो गई है।

भेदभाव की सोच से

रिपोर्ट बनाना नहीं ठीक नहीं

जो जिस सबजेक्ट का एक्सपर्ट ही नहीं, वह दूसरे टीचर की कार्यप्रणाली पर कैसे उठा रहा सवाल

इस वर्ग में रोष इस बात पर पनपना शुरू हो गया है कि जो जिस सबजेक्ट का एक्सपर्ट ही नहीं, वह दूसरे सबजेक्ट के टीचर के लेक्चर और कार्यप्रणाली पर सवाल कैसे उठाकर मूल्यांकन रिपोर्ट में उसे कम आंक रहे। एक्सपर्ट भी साथ नहीं ला रहे, कईयों से अपनी टीस निकालने को रिपोर्ट कमजोर बना दी जा रही, जबकि उनके पिछले सालों से रिजल्ट 80 से 95 फीसदी आ रहे, कई चेहते जो पढ़ाने में और रिजल्ट देने में कमजोर उनकी रिपोर्ट ठीक बना दी जा रही।

शिक्षा सचिव डॉ. अरुण शर्मा ने बताया भेदभाव वाली सोच से रिपोर्ट बनाना और सही को प्रोत्साहित करने की बजाह कमजोर दिखाने के लिए रिपोर्ट बनाना ठीक नहीं। इस कैडर में सीनियर की जगह जूनियर डेपोटेशन नहीं होंगे, निरीक्षण कैडर वालों की मीटिंग बुलाई जा रही, उसमें सब मुद्दों पर चर्चा होगी, सुधार के लिए बड़े कदम उठाए जाएंगे।

कुछ अधिकारियों की सोच में ईगो सवार|वहीं, मूल्यांकन का असल दर्पण कहे जाने स्टूडेंट्स के स्तर की परख को हिस्सा नहीं बनाया जा रहा। कमजोर रिपोर्ट पर अपने स्तर पर सुधार करवाने के प्रयास नहीं किए जा रहे, आरोप यह भी लग रहे कि इस वर्ग के कुछ एक अधिकारियों की सोच में ईगो सवार हो गई है।

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