हमीरपुर

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पर्ची के लिए रोजाना धक्के खा रहे हैं मरीज

मेडिकल कॉलेज के मुख्य गेट पर ओपीडी की पर्ची के लिए रोजाना होने वाली धक्केशाही वाली व्यवस्था मरीजों, खासकर महिलाओं...

Dainik Bhaskar

May 03, 2018, 02:00 AM IST
पर्ची के लिए रोजाना धक्के खा रहे हैं मरीज
मेडिकल कॉलेज के मुख्य गेट पर ओपीडी की पर्ची के लिए रोजाना होने वाली धक्केशाही वाली व्यवस्था मरीजों, खासकर महिलाओं के लिए यहां परेशानी का सबब बन गई है। न तो इस व्यवस्था में कोई सुधार हो रहा और न ही कोई अधिकारी इनकी पीड़ा को समझ रहा है। अधिकारी आपस में व्यवस्थाओं को लेकर बुरी तरह उलझे हुए हैं। मेडिकल कॉलेज कब बनेगा, यह तो समय ही बताएगा। लेकिन यहां जो हालात चल रहे हैं, वह मेडिकल कॉलेज वर्सेस रीजनल हॉस्पिटल और सीएमओ दफ्तर के दरमियान इस कदर उलझ कर रह गए हैं। मानो, सभी अधिकारी एक दूसरे के पीछे पड़े हुए हैं।

मुख्य गेट पर सुबह 9:30 बजे से लेकर 11:00 बजे तक जो हालात होते हैं वह मरीजों खासकर महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा पीड़ादायक हैं क्योंकि महिलाओं और पुरुषों के लिए दो अलग-अलग काउंटर तो लगाए गए हैं लेकिन इतनी बड़ी भीड़ के लिए यह दो काउंटर नाकाफी साबित हो रहे हैं। यही नहीं सीनियर सिटीजन का काउंटर यहां गायब है। कैश काउंटर भी ऐसी जगह पर है जहां खड़ा होना ही लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। मगर इस सारी व्यवस्था को जांचे कोई तो ना।

अब यदि पर्ची बनवाने के लिए ही 2 से 4 घंटे मरीजों को लग रहे हों, तो उनका इलाज कब होगा। जब तक ओपीडी में वे पहुंचेंगे, भोजनावकाश हो चुका होता है। ऐसी व्यवस्था को सुधारने की जरूरत थी। यदि यह अधिकारी नहीं समझेंगे, तो सरकार कुछ करें।

गेट पर पर्ची बनवाने के लिए लगी लाइन।

स्पेस को लेकर अिधकारियों छिड़ी जंग

स्पेस को लेकर यहां अधिकारियों में अलग सी जंग छिड़ी हुई है। सीएमओ ऑफिस में भीतरी व्यवस्था को लेकर जो कुछ इन दिनों हो रहा है, उस पर भी तमाशे की स्थिति बनी हुई है। लेकिन यह खींचतान अधिकारियों की कब थमेगी, कोई पता नहीं। सीएमओ ऑफिस का एक भाग डॉक्टरों की रिहाइश में तब्दील हो गया है। वह भी स्थाई रूप में। यही असल में विवाद का विषय है। क्योंकि इस भवन में केवल गेस्ट हाउस बनाने की बात हुई थी, यहां तो परमानेंट रिहाइश का रूप बन चुका है। जो सीएमओ ऑफिस को नागवार गुजर रहा है । तभी तो बीते रोज की घटना इनकी पोल खोल गई है।

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