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इंजीनियरिंग की रैंकिंग में हमीरपुर एनआईटी का स्तर गिरा

देश भर में इंजीनियरिंग संस्थानों की रैंकिंग सूची में हमीरपुर स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिक संस्थान नीचे गिर रहा...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 03, 2018, 02:00 AM IST

देश भर में इंजीनियरिंग संस्थानों की रैंकिंग सूची में हमीरपुर स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिक संस्थान नीचे गिर रहा है। इस बार वह पांच पायदान और नीचे चले जाने की वजह से इसे अब रैंकिंग सूची में 64वां स्थान मिला है। मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा जारी की गई ताजा एनआईआरएफ की रैकिंग में इस बात का खुलासा हुआ है।

फैकल्टी के मामले में यहां कई खाली पद हैं, जिन्हें भरा नहीं गया है और कार्यवाहक डायरेक्टरों के हवाले भी इसका कामकाज रहा है। दरअसल में एनआईआरएफ की रैंकिंग जारी करने का सिलसिला वर्ष 2016 में शुरू हुआ था। पहले साल तो यह संस्थान 51वें नंबर पर रहा, लेकिन वर्ष 2017 में यह8 पायदान नीचे सरक कर 59वें स्थान पर चला गया। इस बार रैंकिंग में सुधार होता, इसकी उम्मीद तो की ही नहीं जा सकती थी। इसी वजह से यह रैंकिंग की पायदान 64वें स्थान पर चली गई।

अब पहुंच गया 64वें पायदान पर, आईआईटी का दबदबा 28वें रैंक पर बरकरार

5 साल पहले रैंकिंग की सूची में थी लगातार बढ़त

हिमाचल के एकमात्र इस एनआईटी का नाम चार-पांच साल पहले तक रैंकिंग की सूची में लगातार बेहतरी कर रहा था, लेकिन यह रैंकिंग की सूचियां कोई और थीं और अब जिस तरीके से इस रैंकिंग में फिसलन जारी है, उससे यह बात तो साबित हो गई है कि अब इस संस्थान के भीतर सुंदर-सुदंर भवनों, रेलिंग, ग्रेनाइट, डंगों और अन्य तरह के निर्माण की उतनी जरूरत नहीं है। संस्थान प्रशासन को इससे मुंह मोड़ कर अब पूरी तरह फैकल्टी और लैब व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए।

फैकल्टी के कई पदों को भरने का काम किन्हीं कारणों से अधर में लटका

नए चैलेंज के रूप में एक और हिदायत अब एमएचआरडी की हिप्पा के जरिए पहुंच गई है। जिसके मुताबिक अब सेलरी पार्ट के रूप में 70 फीसदी हिस्सा ही एमएचआरडी से संस्थान को मिलेगा और 30 फीसदी का हिस्सा संस्थान को खुद जरनेट करना पड़ेगा। अब इस मामले में यह व्यवस्था किस तरीके से होगी, इस पर फैकल्टी को अब हार्ड वर्किंग की सख्त जरूरत रहेगी, क्योंकि कुछ दिन पहले हिप्पा यानि हायर एजूकेशन ऑफ फंडिंग एजेंसी ने बैठक के माध्यम से यह साफ जता दिया है कि अब 70 फीसदी की रेशो में इंजीनियरिंग संस्थान को नए माहौल में प्रवेश करना होगा। इस इंजीनियरिंग संस्थान में लंबे समय से फैकल्टी के कई पदों को भरने का काम किन्हीं कारणों से अधर में लटका हुआ है। कई और विभागों में भी पदों को भरे जाने का सिलसिला रुका हुआ है। इनमें नाॅन टीचिंग विभाग प्रमुख है।

काबिल फैकल्टी की यहां जरूरत: चूंकि डिवोटिड और क्वालीफाई फैकल्टी की अब यहां इस लिए जरूरत हो गई है, क्योंकि सारी व्यवस्थाएं ठीक हैं। नए डायरेक्टर विनोद यादव मैकेनिकल विभाग से ताल्लुक रखते हैं और हार्ड वर्किंग उनका पिछले इलाहबाद के संस्थान में असर देखा गया है। तभी तो अब यह कहा जा रहा है कि काबिल फैकल्टी की यहां जरूरत है। यही नहीं पिछले 25 साल पहले यहां की प्रयोगशालाओं में जो इक्यूपमेंट और बाकी की व्यवस्थाएं सजाई गई थीं, उनमें अब पूरी तरह बदलाव करने की जरूरत है। क्योंकि बेहतर और समय की जरूरत के मुताबिक अब आधुनिक लैब व्यवस्था के अलावा क्वालिफाइड फैकल्टी की इस संस्थान के छात्रों को सख्त जरूरत है। क्योंकि रैंकिंग में सुधार के लिए अब लैब और बेहतर फैकल्टी की जरूरत यहां पूरी तरह मुंह फैला कर खड़ी हो गई है।

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