--Advertisement--

सीर खड‌्ड के नहरीकरण में लगेगा समय

सीर खड्ड का नहरीकरण किए जाने की मांग पूरा होने में अभी और वक्त लग सकता है। जनता को आस जगी थी केंद्र की भाजपा सरकार के...

Dainik Bhaskar

May 05, 2018, 02:00 AM IST
सीर खड्ड का नहरीकरण किए जाने की मांग पूरा होने में अभी और वक्त लग सकता है। जनता को आस जगी थी केंद्र की भाजपा सरकार के साथ इस मुद्दे को उठाकर प्रदेश सरकार शीघ्र ही इस महत्वकांक्षी परियोजना के लिए मंजूरी दिलवा कर इसका कार्य शुरू कर देगी। लेकिन यह बड़ी परियोजना एक बार फिर डीपीआर के चक्कर में उलझ गई है।

अब आईपीएच डिपार्टमेंट ने इस योजना को लेकर एक अरब 56 करोड़, 66 लाख की नई डीपीआर बना कर डायरेक्टर सेंटर वाटर कमीशन दिल्ली को भेजी है। पिछले 6 सालों से इस योजना की कई मर्तबा डीपीआर बन चुकी है। जिन पर समय-समय पर ऑब्जेक्शन लगते रहे और इसकी मंजूरी नहीं मिल सकी।

समय बीतने के साथ ही इस योजना की लागत भी करीब दोगुना हो गई है। शुरू में इसकी करीब 23 करोड़ की डीपीआर तैयार करके आगे भेजी गई थी। लेकिन इसके मुताबिक नहरीकरण का कार्य केवल मंडी क्षेत्र में ही होना था। बाद में इसमें हमीरपुर क्षेत्र को भी शामिल किया गया। जिसमें डली से लेकर जाहू तक खड्ड के दोनों मुहानों पर नहरीकरण का कार्य होना है। इसके लिए फिर से करीब 63 करोड़ की डीपीआर बना कर भेजी गई है, लेकिन सीडब्ल्यूसी से इस पर कुछ ऑब्जेक्शन लगा कर वापस भेजा गया। इसके बाद करीब 88 करोड़ की डीपीआर बना कर विभाग द्वारा भेजी गई, लेकिन सीडब्ल्यूसी ने फिर से डीपीआर पर ऑब्जेक्शन लगा दिया। डीपीआर के चक्कर में उलझी यह योजना पिछली कांग्रेस सरकार के समय विस के अंदर खूब चर्चा में रही। इस योजना का शिलान्यास 2012 में पूर्व सीएम प्रो. प्रेमकुमार धूमल ने ही किया था। लिहाजा भाजपा कांग्रेस सरकार पर इसके कार्य को लेकर जानबूझ कर लटकाने का आरोप लगाती रही है। अब प्रदेश के सीएम भी जिला मंडी से हैं और आईपीएच मंत्री भी मंडी जिला के धर्मपुर क्षेत्र से है।

फिर से बनाकर भेजी सौर खड्ड नहरीकरण की एक अरब 56 करोड़ की डीपीआर

क्यों है नहरीकरण जरूरी | हालांकि सीर खड्ड के नहरीकरण की मांग बेहद पुरानी है, लेकिन पिछले 10 सालों से इसने जोर पकड़ा है। खनन की वजह से सीर खड्ड ने विकराल रूप धारण किया है। इसकी बाढ़ लगातार उपजाऊ रकबों को तबाह कर बंजर करती जा रही हैं। बाढ़ की वजह से हमीरपुर क्षेत्र में ज्यादा तबाही मची है। कई पेयजल योजनाओं का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। इसके अलावा इसके दोनों मुहानों पर कई गांव निशाने पर हैं। परंपरा कृषि गुजरे जमाने की बात हो चली हैं। खनन की वजह से सिंचाई कूल्हों का वजूद खत्म हो गया है।


X
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..