हमीरपुर

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ऊना में तलाशें एयरपोर्ट की संभावनाएं

ऊना जिला में एक बार फिर से एयरपोर्ट बनाए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। इस कड़ी में ऊना जनहित मोर्चा ने आवाज बुलंद की...

Dainik Bhaskar

May 05, 2018, 02:00 AM IST
ऊना जिला में एक बार फिर से एयरपोर्ट बनाए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। इस कड़ी में ऊना जनहित मोर्चा ने आवाज बुलंद की है। इस संबंध में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और हमीरपुर के सांसद अनुराग ठाकुर को पत्र भी लिखा है। मोर्चा के पदाधिकारियों का तर्क है कि एयरपोर्ट के लिए ऊना जिला काफी सूटेबल है, क्योंकि यह मैदानी इलाका है। जहां एयरपोर्ट के लिए आसानी से भूमि मिल सकती है। इस जिला में एयरपोर्ट बनने से पड़ोसी पंजाब की सीमावर्ती जिलों की जनता को फायदा होगा। साथ ही प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। क्योंकि प्रसिद्ध शक्तिपीठ चिंतपूर्णी, डेराबाबा बड़भाग सिंह मैड़ी और डेराबाबा रुद्रानंद नारी में हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं। काबिलेगौर है कि वर्तमान में ऊना और हमीरपुर जिला के लोगों को हवाई सेवाओं के लिए चंडीगढ़ और अमृतसर जाना पड़ता है। यहां से चंडीगढ़ एयरपोर्ट जाने के लिए ढाई घंटे और हमीरपुर से लगभग साढ़े चार घंटे लगते हैं। इसी तरह यहां से अमृतसर एयरपोर्ट जाने के लिए तीन घंटे और हमीरपुर से पांच घंटे का समय लगता है। जिससे दूरदराज गांवों के लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।

ऊना जनहित मोर्चा के प्रधान राजीव भनोट ने कहा कि हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में एयरपोर्ट बनना चाहिए। इसके लिए ऊना जिला सबसे उपयुक्त स्थान है। हमीरपुर जिला के जाहू का इलाका भी थोड़ा मैदानी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को इसके लिए संभावनाएं तलाशनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऊना जिला में पहले भी एयरपोर्ट बनाने की घोषणाएं हुई थी। जो साकार नहीं हो सकी। लेकिन अब इसके लिए मजबूत इरादे से संभावनाएं तलाशी जानी चाहिए। उनका कहना है कि प्रदेश में शिमला, गगल और भुंतर में एयरपोर्ट हैं। जहां साल भर में मौसम की बजह से हवाई सेवाएं चालू रखने में दिक्कत आती है। ऊना में एयरपोर्ट बने तो 365 दिन जनता को हवाई सेवा मुहैया होगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश में बड़ा एयरपोर्ट बनाने के लिए केंद्र से मामला उठाया है।

जनहित मोर्चा ने की आवाज बुलंद, मुख्यमंत्री व सांसद को लिखी चिट्‌ठी

कई बार हुई एयरपोर्ट बनाने की घोषणाएं

इस जिला में कई बार एयरपोर्ट बनाने को लेकर घोषणाएं हुई। लेकिन इन घोषणाओं को उम्मीदों के पंख नहीं लग पाए। लगभग 12 साल पहले जिला में विशेष आर्थिक जोन के तहत भी एयरक्राफ्ट हैंगर बनाने को लेकर प्रक्रिया शुरू हुई थी। लेकिन सियासी विरोध के चलते यह प्रोजेक्ट भी ठंडे बस्ते में चला गया था। इसके बाद भी एक दो बार एयरपोर्ट को लेकर घोषणाएं हुई, मगर सिरे नहीं चढ़ सकी।

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