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गड़बड़झाले करने वाले ऑडिटरों के खिलाफ विभाग ‘मौन’

गड़बड़झाले को अंजाम देने की बिसात बिछाने वाले ऑडिटरों के खिलाफ विभाग और सरकार की चुप्पी लोगों के लिए बेहद परेशानी...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 09, 2018, 02:00 AM IST

गड़बड़झाले को अंजाम देने की बिसात बिछाने वाले ऑडिटरों के खिलाफ विभाग और सरकार की चुप्पी लोगों के लिए बेहद परेशानी का सबब बन गई है। जिन ऑडिटरों ने ब्ल्यूट सहकारी सभा का ऑडिट किया और सचिव के साथ मिलीभगत करके सभा क्षेत्र के जमाकर्ताओं के साथ इस तरह का घोर अन्याय किया, उनके सामने अब यह मुसीबत है खड़ी हो गई है कि सारा मामला कानूनी दांव-पेच में उलझकर पहाड़ की तरह खड़ा हो गया है।

पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी समस्या यह है कि सभा का आरोपी सचिव अब जेल से छूट गया है। ऐसे में जिन लोगों को यह उम्मीद जगी थी कि देर-सवेर भी पैसे की रिकवरी हो जाएगी। वह अब मायूसी में बदल गई है। हालांकि ऐसा तो होना ही था। लेकिन इससे भी बड़ी विडंबना यह है कि सभा के जिन ऑडिटरों ने यहां का ऑडिट किया और कई सालों तक इस मामले को दबाए रखा। उनके खिलाफ विभाग इतना शांत क्यों हो गया है। क्या उसे लोगों की पीड़ा महसूस नहीं हो रही है। जिनका तीन करोड़ के आसपास पैसा मानो, डूब ही गया हो। हैरानी इस बात की है की ना तो ऐसे ऑडिटरों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई शुरू की गई है और ना ही उन्हें टारगेट बनाने की विभाग की कोई योजना सूझ रही है ऐसे में लोगों को न्याय मिले भी तो कैसे? वैसे भी विभाग के लोग अपनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू भी कैसे करेंगे। क्योंकि इस हमाम में एक के बाद एक सभी की हालत एक जैसी है।

स्पेशल ऑडिट के बाद भी जिन को चिन्हित करके विभाग ने अपने उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी और यह कहा कि यह-यह लोग इसमें दोषी हैं। इनकी वजह से इस गड़बड़झाले को अंजाम दिया गया। उनके खिलाफ आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। उन्हें नोटिस तक नहीं भेजा गया। ऐसे में दिखता यही है कि सहकारी सभाओं के इस विभाग में सब अच्छा की स्थिति नहीं है।

यहां नीचे से ऊपर तक सब की हालत एक जैसी तो नहीं है। जिन अधिकारियों की छत्रछाया में यह गड़बड़झाले होते रहे उनके खिलाफ भी तो कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन करेगा कौन? अब उन अधिकारियों की ही बात ले लीजिए जिन्होंने इस सभा का कई बार ऑडिट किया। मगर जिस अवधि के दौरान यह घोटाले दबाए रखे, उनके खिलाफ भी यदि विभाग ईमानदारी से काम कर ले, तो बाकी के ऑडिटरों को डर होगा और व्यवस्था में कोई सुधार की गुंजाइश बन सकेगी?

परेशानी

जमाकर्ता परेशान, कार्रवाई अब फंसी कानूनी दांव-पेच में, ब्ल्यूट सभा में तीन करोड़ के घपले का सच

विजिलेंस के पास पेंडिंग है मामला

मामला विजिलेंस के पास भी पेंडिंग है। स्थानीय थाने में भी अलग से एफआईआर के माध्यम से इसकी जांच हो रही है। शिमला स्थित विभाग के उच्च अधिकारियों के पास पूरे मामले की रिपोर्ट 2 माह से पेंडिंग है। उम्मीद यही है कि कहीं ना कहीं लोगों को राहत मिलेगी? क्या 3 करोड़ की रिकवरी यहीं से होगी और दोषियों के खिलाफ कोर्ट के माध्यम से राहत मिल पाएगी। इन्हीं उम्मीदों पर इस सभा के पीड़ित शेयर होल्डर्स की नजरें टिकी हुई है।

186 लोगों का पैसा डूबेगा

गौर रहे हैं कि इस सभा में करीब 186 शेयर होल्डर का पैसा बुरी तरह डूबने के आसार बन चुके हैं। रिकवरी की गुंजाइश पर भी बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो चुका है । कौन करेगा, कहां से होगी, क्योंकि संपत्ति इतनी नहीं है, जहां से इसकी रिकवरी हो सके।

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