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खराब रिजल्ट पर विवाद, कैसे सुधरेगा बाल सीसे स्कूल का बिगड़ा ढांचा, कई खामियों के जिम्मेदार यहां खुद टीचर हैं

खराब रिजल्ट को लेकर यहां शहर में स्थित बाल सीसे स्कूल जिस तरीके से सुर्खियों में आया है, उसकी भीतरी व्यवस्था में...

Dainik Bhaskar

May 10, 2018, 02:00 AM IST
खराब रिजल्ट को लेकर यहां शहर में स्थित बाल सीसे स्कूल जिस तरीके से सुर्खियों में आया है, उसकी भीतरी व्यवस्था में सुधार कैसे होगा, यहां यही सवाल चर्चा में है। विवाद तो यहां पहले से ही रहे हैं, लेकिन मौजूदा विवादों की कड़ी जुड़ जाने से इसकी पुरानी घिसी-पिटी व्यवस्था में मूल रूप से सुधार यदि नहीं किया गया, तो आने वाले समय में इस आलीशान भवन बाले स्कूल में बच्चों की तादाद कम हो सकती है। यही वजह है जिसकी चिंता को लेकर बीते रोज स्थानीय विधायक नरेंद्र ठाकुर और अन्य लोगों ने स्कूल में पहुंच कर टीचर्स की क्लास ली। मगर असल समस्या यह है कि क्या ऐसी क्लास वाली बैठकों से सही मायने में कोई हल निकल पाएगा? यहां मूल रूप से जो व्यवस्थागत खामियां हैं, उन पर ‘फोकस’ करके ही यदि काम हो तो सुधार हो सकता है।

काबिलेगौर है कि इस बार प्लस टू और मैट्रिक का रिजल्ट बेहद खराब रहा और गुस्से का नजला 3 दर्जन के करीब टीचर्स और स्कूल प्रशासन पर गिरना था ही। अभी तो केवल वार्निंग मिली है, बाद में क्या इस बैठक से स्कूल प्रशासन और टीचर कोई सबक लेंगे, , ऐसा नहीं दिखता। क्योंकि साइंस के अलावा यदि आर्ट्स और कॉमर्स में भी रिजल्ट खराब जाए, तो टीचरों की कार्यकुशलता और क्षमता पर भी सवाल उठेगा । यही नहीं, इस स्कूल के कैंपस में ही स्थित निरीक्षण डिप्टी डायरेक्टर कार्यालय की भूमिका भी सवालों के घेरे में आएगी ही।

गुटबाजी में उलझे टीचर्स को अपना रवैया बदलना होगा। इसके अलावा इससे स्कूल भवन की इमारत की आखिरी मंजिल पर स्थित क्लास रूम को तब्दील कर के निचली मंजिल पर लाना होगा, जहां इन पर नजर रखी जा सके और टीचर्स को भी यह डर रहे हैं कि उन पर पढ़ाने की किसी की नजर है। कैंपस के भीतर बाहर जाने वाले रास्तों को गेट लगा कर बंद किया जाना जरूरी है,ताकि बच्चे बास्केटबॉल खेल मैदान की तरफ से होकर इधर-उधर न खिसक पाएं। साल भर यहां जितने बड़े स्तर के कार्यक्रम होते रहते हैं, उन पर भी अंकुश लगाना होगा।

लापरवाही

राजनीतिक दखलंदाजी की वजह से यहां रहती है समस्या, बाहरी दखलंदाजी और बड़े स्तर के होने वाले कार्यक्रम भी समस्या

कैंटीन की व्यवस्था में सुधार लाए जाने की भी जरूरत | कैंटीन की व्यवस्था में सुधार लाए जाने की भी जरूरत है, पिछले करीब 10-11 साल से यहां एक ही व्यक्ति के पास ठेका है, उस पर भी सवाल उठते हैं। पटवारी की ट्रेनिंग भी स्कूल के बगल में होती है, लेकिन उनके लिए कैंटीन का इस्तेमाल भी इसी स्कूल में होता है और बॉशरूम भी वह स्कूल के ही इस्तेमाल करते हैं, इससे इस बाहरी दखलंदाजी पर कंट्रोल किया जाना लाजिमी है। दरअसल में इस स्कूल के ज्यादातर टीचर्स को इस भ्रम की चादर को भी नहीं ओढ़ना चाहिए कि वे प्रभावशाली परिवारों और प्रशासकों के परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। यह समस्या यहां शुरू से ही रही । खैर 1990 के दशक में भी ऐसा ही खराब रिजल्ट एक मर्तबा यहां आया था और तब प्रिंसिपल का पद खाली था और जोगिंद्र नगर से किसी प्रिंसिपल को यहां पोस्ट किया गया था और तब इसी स्कूल ने बोर्ड की परीक्षाओं में कई मेरिट दी थीं, क्या ऐसा संभव इस बार हो पाएगा?

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