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स्टे तोड़ कर बार-बार क्यों आते हैं बाल स्कूल में टीचर और अन्य स्टाफ

Hamirpur News - स्टाफ रूम भी अलग-अलग हैं यहां मेल-फीमेल के लिए विक्रम ढटवालिया | हमीरपुर खराब परिणाम की वजह से ही नहीं, यह स्कूल...

Dainik Bhaskar

May 12, 2018, 02:00 AM IST
स्टे तोड़ कर बार-बार क्यों आते हैं बाल स्कूल में टीचर और अन्य स्टाफ
स्टाफ रूम भी अलग-अलग हैं यहां मेल-फीमेल के लिए

विक्रम ढटवालिया | हमीरपुर

खराब परिणाम की वजह से ही नहीं, यह स्कूल शुरू से ही इस बात के लिए भी सुर्खियां बटोरता रहा है कि यहां टीचर्स लंबा स्टे तोड़कर बार-बार यहीं लौटते हैं। यह स्कूल उनका पसंदीदा क्यों है? इस पर भी सवाल हैं। क्योंकि घूम-फिर कर प्रभावशाली टीचर्स और दूसरा स्टाफ हमेशा इसी स्कूल की ओर रुख करता है। आखिर ऐसी वजह क्या है, यहां कौन सी मलाई है जो उनका पीछा नहीं छोड़ती हैं। इस स्कूल में साल भर प्रतियोगी परीक्षाओं के अलावा हिमाचल कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं की चहल-पहल भी खूब रहती है और इसमें अतिरिक्त रूप में उन्हें डयूटी से कमाई का एक जरिया भी हासिल हो जाता है। स्कूल की बिल्डिंग जितनी खूबसूरत और बड़े स्पेस की है, उसके भीतर का ढांचा जिन लोगों ने खोखला किया है। सरकार के लिए अब यह सही वक्त आ गया है कि उसका आकलन लाजिमी तौर पर किया जाए। दीगर बात यह है कि इस स्कूल में सारी व्यवस्थाएं होने के बावजूद भी जिन खामियों का शिकार यह हुआ है, उसकी सही वजह तो ढूंढनी ही पड़ेगी।

7 से 10 साल तक की अवधि वाले भी यहां ऐसा स्टाफ है जो जमा हुआ है। महत्वपूर्ण विषयों के टीचर भी यहां बार-बार लौट कर आ रहे हैं। लेकिन पढ़ाई में जो खोट उनकी बदौलत यहां तैयार हो चुका है, उसका निवारण न तो शिक्षा विभाग ने किया है, न ही स्कूल प्रशासन ने और न ही खुद उन टीचरों ने, जिनकी यह जिम्मेदारी बनती है। कई टीचर तो प्रमोशन लेकर भी यहीं लौट आए हैं। लेकिन परिणाम सिफर साबित हो रहा है। इस बार की सालाना परीक्षा से पहले इस स्कूल की खास विडबना यह रही कि यहां करीब 10-12 साल से एक ही सुपरिटेंडेंट परीक्षाओं के दौरान रहा है। तब यहां क्या होता रहा होगा, इसका भांडा अब फूट रहा है। क्योंकि इस बार परिणाम यहां कैमरे की निगरानी में हुआ और सुपरिटेंडेंट भी इस बार बदल के आए। यहां बड़े-बड़े कमरे हैं, लेकिन विचित्र बात यह है कि स्टाफ रूम के दो अलग-अलग हिस्से बना दिए गए हैं, मेल और फीमेल। उधर डिप्टी डायरेक्टर सोमदत्त सांख्यान का कहना है कि स्टाफ रूम अलग-अलग बनाने की नौबत तब आती है, जब स्पेस की कमी हो। बाल स्कूल में तो ऐसी कमी है नहीं, रही बात अन्य समस्याओं की। स्कूल प्रशासन से बात की जाएगी।

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