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करोड़ों खर्चने पर भी लाइब्रेरी नहीं हो पाई ऑनलाइन

अणु स्थित पीजी कॉलेज हमीरपुर की आलीशान लाइब्रेरी पर करोड़ों खर्च करने के बाद भी यह ऑनलाइन नहीं हो पाई है। जबकि...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 29, 2018, 02:00 AM IST

करोड़ों खर्चने पर भी लाइब्रेरी नहीं हो पाई ऑनलाइन
अणु स्थित पीजी कॉलेज हमीरपुर की आलीशान लाइब्रेरी पर करोड़ों खर्च करने के बाद भी यह ऑनलाइन नहीं हो पाई है। जबकि प्रदेशभर कॉलेजों के मुकाबले यहां सबसे बढ़िया भवन और अन्य सुविधाओं दी गई। इसके बावजूद भी इसे ऑनलाइन की मेन सुविधा देने से वंचित रखा है। हजारों किताबों का भंडार यहां स्थित है, रूटीन में उपयोग होने वाली किताबों का पता तो रहता है कि कौन सी कहां मिलेगी, लेकिन कभी-कभी मांगी जाने वाली किताबों को शीघ्र तलाश करने में स्टूडेंट्स सहित स्टाफ को दिक्कत रहती है। अगर इसे ऑनलाइन कर दिया जाए तो एक क्लिक से तुरंत पता चलेगा कि कौन सी किताब कहां मिलेगी। इसके लिए अलग से एक सॉफ्टवेयर आता है। उसी का इंतजाम कॉलेज प्रबंधन अभी तक नहीं करवा सका है। वहीं इसे ऑनलाइन करने के लिए कनेक्टिविटी की सही व्यवस्था नहीं हो पाई है। हालांकि वाईफाई सहित जीओ के नेटवर्क से यहां थोड़ी बहुत सुविधा जरूर टीचरों के कैबिन में जुटाने का दावा हाे रहा है। यहां टीचरों के अलावा पहली मंजिल पर करीब 10 कैबिन स्टूडेंट्स के लिए भी तैयार किए गए है। जिनमें कंप्यूटर की सुविधा दी जानी थी। लेकिन यह भी मुहैया नहीं हो पाई है। जिसका वे 3 साल से बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। जिससे यह केवल शो पीस साबित हो रहे हैं। अगर यह सुविधा मिल जाए, तो उन्हें कई ऐसी नई-पुरानी किताबों को ऑनलाइन पढ़ने की सुविधा मिलेगी, जाे लाइब्रेरी में मौजूद नहीं।

लाइब्रेरी में टीचरों के लिए भी अलग से बड़ा कैबिन बनाया गया है। लेकिन यहां उनको आवाजाही कम ही रहती हैं। इस अलग कैबिन में एक ही समय में करीब दो दर्जन लोगों के बैठने की व्यवस्था है। लेकिन अकसर यह स्पेस दो-चार टीचरों के अलावा खाली ही दिखाई देता है। जबकि ज्यादात्तर कॉलेज टीचरों की क्लासें गैप देकर होती हैं।

3 साल में स्टूडेंट्स के कैबिन में नहीं मिली कंप्यूटरों की सुविधा, टीचरों का विजिट भी रहता है कम

लाइब्रेरी में बनाए स्टूडेंट्स कैबिन और टेबलों पर लगाए जाने हैं कंप्यूटर।

प्रोसेस में डाला

लाइब्रेरी को ऑनलाइन करने के लिए एक अलग सॉफ्टवेयर जरूरत है। जिसमें सारी किताबों का रिकाॅर्ड ऑनलाइन होगा। इसे प्रोसेस में डाला गया है। इस साल इसके हर संभव प्रयास करेंगे। स्टूडेंट्स के कैबिन में भी अगली खेप में से कंप्यूटर लगाए जाएंगे, टीचर भी लाइब्रेरी जाते हैं। एचएस जंबाल, प्रिंसिपल, पीजी कॉलेज हमीरपुर

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Web Title: करोड़ों खर्चने पर भी लाइब्रेरी नहीं हो पाई ऑनलाइन
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