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35 लाख की डायलिसिस मशीन मरीजों के लिए दी गई थी दान, बंद कमरे में फांक रही है धूल

जिला मुख्यालय स्थित रीजनल अस्पताल में किसी ने 35 लाख खर्च कर डायलिसिस मशीनों को इसलिए दान किया था कि यहां मरीजों काे...

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 02:00 AM IST
35 लाख की डायलिसिस मशीन मरीजों के लिए दी गई थी दान, बंद कमरे में फांक रही है धूल
जिला मुख्यालय स्थित रीजनल अस्पताल में किसी ने 35 लाख खर्च कर डायलिसिस मशीनों को इसलिए दान किया था कि यहां मरीजों काे आर्थिक बोझ से बचाया जा सके और उन्हें नजदीक ही सरकारी स्तर की सुविधा नसीब हो सके। लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि इन्हें तालों में बंद रख कर आउट ऑफ ऑर्डर कर दिया गया। स्वास्थ्य विभाग इन्हें आपरेट करने के लिए दो कर्मचारियों को ट्रेंड कर इन पर पड़ रही धूल से बचाने और मरीजों को सुविधा देने के लिए शुरू ही नहीं कर पाया।

एक महिला मरीज 33 साल की कांतादेवी किडनियों की बीमारी से पीड़ित है, उसे डायलसिस लेने की डॉक्टर्स ने एडवाइज कर रखा है, हालांकि वह गरीब परिवार से संबंधित है, ऐसे में हर माह 4 से 5 हजार का खर्च कैसे करे। उस जैसे जो इस बीमारी से पीड़ित हैं, उनके परिवारों का गुजारा कैसे हो? लगता किसी को चिंता नहीं। क्योंकि उन्हें यह सुविधा यहां न मिलने के कारण कभी निजी तो कभी मेडिकल कॉलेज टांडा की ओर रुख करने पर विवश होना पड़ रहा है। परिवार के मुखिया जीत राम का कहना है कि हमीरपुर में मशीनें तो हैं, लेकिन तालों में बंद हैं, इस सुविधा को मरीजों के लिए कब खोला जाएगा? किसी से जवाब संतोषजनक नहीं मिल पाया है। बस यही कहा जाता है कि मेडिकल कॉलेज शुरू होने पर समस्या का ही हल हो जाएगा और डॉक्टर्स से लेकर दूसरे टेस्ट सुविधा भी भीतर ही मिल जाया करेगी। उनका कहना है कि सरकार को भी इन खराब होती मशीनरियों को देखते हुए कड़े दिशा-निर्देश दिए जाने चाहिए ताकि सुविधा लोगों को मिल सके।

रीजनल अस्पताल की एमएस डॉ. अर्चना सोनी का कहना था कि ऊपरी स्तर से ही कर्मचारी की ट्रेंनिग आयोजित होती है। मेडिकल कॉलेज के कारण अस्पताल में अल्ट्रेशन के कार्य के चलते भी स्पेस की समस्या रही । मरीजों को शीघ्र ही यह सुविधा मिल सकेगी। वहीं लोगों विजय सिंह, पंकज ठाकुर, नारायण दास, कुलदीप चौधरी, अजय शर्मा व अशोक कुमार सहित कई लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को इस मामले पर शीघ्र कदम उठाने की जरूरत है, क्योंकि इस समय जिले के किसी भी सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में यह सुविधा ही नहीं है और यहां के मरीजों का दूसरी और ही आर्थिक नुकसान उठा कर सुविधा मिल पा रही है।

रीजनल अस्पताल में दान की हुई डायलसिस मशीन फांक रही धूल।

राजेंद्र राणा ने करवाया थी दान, इस चलाने के लिए अभी तक कर्मचारी नहीं किया ट्रेंड | दरअसल बीते साल इन मशीनों को सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा ने आग्रह कर रीजनल अस्पताल में किसी से दान करवाया था। जब शुभारंभ किया गया था तो बडे़ जोर-शोर के साथ अस्पताल में ही मरीजों को डायलिसिस की सुविधा देने की बात तो कही गई। आरकेएस की बैठक में इसके लिए रेट भी निर्धारित किए गए, लेकिन किसी कर्मचारी को ट्रेंड करने की आज तक पहल नहीं हो पाई और अब तो यह बंद कमरों में धूल फांक रही हैं। जबकि किडनी के मरीज दूसरे स्थानों की ओर रुख कर सुविधा लेने पर मजबूर हैं।

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35 लाख की डायलिसिस मशीन मरीजों के लिए दी गई थी दान, बंद कमरे में फांक रही है धूल
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