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डॉक्टर हो गए 68, पैरामेडिकल स्टाफ नहीं, वार्डों से लेकर दवा केंद्र तक मरीजों की भीड़

डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल काॅलेज कम रीजनल अस्पताल में अब पैरामेडिकल स्टाफ की कमी से मरीज परेशान होने लगे हैं। बढ़ती...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 16, 2018, 02:00 AM IST

डॉक्टर हो गए 68, पैरामेडिकल स्टाफ नहीं, वार्डों से लेकर दवा केंद्र तक मरीजों की भीड़
डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल काॅलेज कम रीजनल अस्पताल में अब पैरामेडिकल स्टाफ की कमी से मरीज परेशान होने लगे हैं। बढ़ती डॉक्टरों की तादाद से रोजाना मरीजों की भी संख्या बढ़ने लगी है। वार्डों से लेकर पर्ची केंद्रों तक इस वर्ग के कर्मचारियों की कम संख्या के चलते सुविधाएं लेने के लिए बारी के इंतजार में लाइनों में लग कर घंटों इंतजार करने पर विवश होना पड़ रहा है। हालात यह हो चुके हैं कि यहां हर सर्जरी के मरीज के लिए ओटी केवल 4 ही स्टाफ नर्सें हैं, जबकि वार्डों में भी बेहद कमी है। नाइट से लेकर डे-डयूटी तक जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है। हाल ही में स्टाफ नर्सें व फार्मासिस्टों की प्रमोशन के आदेश जारी हो गए हैं। इस कारण यहां प्रमोट होने पर इस वर्ग के कर्मचारियों की संख्या में कमी आ सकती है। इस अस्पताल को मेडिकल कॉलेज के साथ अटैच किया है। इसी सत्र से इसे चलाने की योजना को लेकर 65 डॉक्टर्स की नियुक्तियों को किया जा चुका है, इनमें कई डॉक्टर्स ने तो वार्डों से लेकर ओपीडी तक मरीजों के चेकअप का कार्य शुरू कर दिया है।

ओपीडी 1 हजार से 1200 तक रोजाना, मरीजों को होना पड़ रहा है परेशान

मेडिकल कॉलेज कम रीजनल अस्पताल में लगा मरीजों का तांता, पैरामेडिकल स्टाफ की कमी।

मरीजों को बरामदे में भर्ती कर उनका उपचार किया जा रहा |ओपीडी 1 हजार से 1200 तक रोजाना हो चुकी है, जबकि दूसरे मरीजों सहित यह आंकड़ा यहां रोजाना का 2,500 तक पहुंच रहा है। इस कॉलेज के सर्जिकल, आॅर्थो, जनरल, आई, गायनी व ईएनटी सहित वार्डों में करीब 200 मरीज भर्ती किए जाते हैं। इन दिनों यहां के मेडिकल वार्ड में मरीजों को बरामदे में भी भर्ती कर उनका उपचार किया जा रहा है। ऐसे में पैरामेडिकल स्टाफ की इस कमी का अंदाजा लगाया जा सकता है कि सभी मरीजों को समय पर कैसे सुविधा देने के लिए यह मौजूद हों।

पैरामेडिकल कर्मचारियों के पदों को शीघ्र भरा जाना जरूरी |हिमाचल फार्मासिस्ट अस्पताल एसोसिएशन के राज्य अध्यक्ष बीरबल शर्मा व प्रेस सचिव विपिन शर्मा का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में पैरामेडिकल कर्मचारियों के पदों को शीघ्र भरा जाना जरूरी है। फार्मासिस्टों को नाइट डयूटी भी देनी पड़ रही है। लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण समस्या आ रही है। उनका कहना है कि मरीजों की बढ़ती तादाद को देखते हुए सरकार को यहां शीघ्र मेडिकल कॉलेज के अनुरूप पदों को भरा जाना चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से भी मांग की है कि इस पर शीघ्र कार्रवाई कर पदों को भरा जाए।

डॉक्टर 65, फार्मासिस्ट 6 |यहां डॉक्टरों के 65 पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं, इनमें मेडिकल कॉलेज फैकल्टी, रेजीडेंस डॉक्टर से लेकर जनरल डॉक्टर शामिल हैं। जबकि यहां फार्मासिस्टों के मात्र 6 ही पद भरे गए हैं, इनकी नाइट, ईवनिंग व दवा केंद्र पर भी ड्‌यूटी होती है। किसी फार्मासिस्ट के छ़ुट्टी पर जाते ही कार्य मुश्किल हो रहा है। सरकार की योजना के तहत मरीजों को दवाइयां नि:शुल्क भीतर से ही देने का प्रावधान है। जाहिर है कर्मचारियों की कमी के कारण मरीजों को इस केंद्र पर इंतजार करना पड़ रहा है। यही हाल यहां स्टाफ नर्सोंं की कमी के कारण है। वार्डों में भी स्टाफ नर्सो की कमी के कारण एक या दो-दो नर्सों को हर वार्ड में 40 से 50 मरीजों का जिम्मा पड़ रहा है। गायनी व जनरल वार्ड में तो ज्यादा मरीज भर्ती होते हैं। आॅपरेशन थियेटर में 20 में से 4 नर्सों की डयूटी रहती है। जबकि यहां मेजर सर्जरी, सिजेरियन, ईएनटी, आर्थो, नेत्र तक के आपरेशन होते हैं। उन सभी मरीजों के स्वास्थ्य का जिम्मा इनके सहारे ही है, यही नहीं यहां एनीस्थिसिया का भी एक ही पद भरा हुआ है।

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