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किस-किस ने कब्जाई है वन विभाग की जमीन

निर्माण के समय वन विभाग ने लोगों को भूमि कब्जाने से रोका नहीं, अब एक या दो जगह पर नहीं, कई जगह अवैध कब्जे हो चुके हैं।...

Danik Bhaskar | May 16, 2018, 02:00 AM IST
निर्माण के समय वन विभाग ने लोगों को भूमि कब्जाने से रोका नहीं, अब एक या दो जगह पर नहीं, कई जगह अवैध कब्जे हो चुके हैं। हीरा नगर क्षेत्र में वन विभाग की भूमि का आलम यह है कि निर्माण तो हो चुके, अब इनको हटाना मुश्किल हो गया है। यही नहीं, जिस खास क्षेत्र में चीड़ पेड़ों के बीच यह निर्माण हुए हैं। उस भूमि की डिमार्केशन के लिए विभाग ने अप्लाई तो कर रखा है। लेकिन कब होगी और किन-किन अवैध कब्जा धारकों के खिलाफ कार्रवाई हो पाएगी, यह यक्ष प्रश्न उस दिन की इंतजार में है, जब निशानदेही की बेला आएगी और विभाग सचमुच में अवैध कब्जों को चिन्हित करके इनके खिलाफ कार्रवाई करेगा। हीरा नगर का क्षेत्र हमीरपुर शहर का पौष इलाका माना जाता है। यहां पर चारों तरफ घने चीड़ के पेड़ हैं और बीच में लोगों की मलकियत भूमि बस इसी के अगल-बगल में यह सब अवैध कब्जे कई जगह देखने को मिलते हैं। किस-किस ने कितने आकार के कब्जे कर रखे हैं, इसका पता तो निशानदेही के बाद ही चलेगा,लेकिन इतना जरूर है कि यदि समय पर डिमार्केशन ईमानदारी से हो जाए तो जिन अधिकारियों के समय में यहां अवैध कब्जे हुए उनकी पोल भी खुलेगी और अवैध कब्जा धारकों की तो खुलेगी ही। यहां रिहायशी इलाके के साथ कहीं भी चिन्हित करने बाली बुर्जियां मौजूद हैं और न ही कांटेदार तार की बाड़। एसी स्थिति में इस पूरे क्षेत्र में कई कनाल भूमि पर प्रथम नजर में अवैध कब्जे दिखते हैं।

छानबीन से पता चला है कि पिछले 20 साल में यहां पर जिस तेजी के साथ निर्माण हुआ और हीरा नगर में कंक्रीट का जंगल तैयार होता गया, उसकी एवज में कहां-कहां अवैध कब्जे हुए हैं अधिकारी इस समय बोलने को तैयार नहीं है।

डीएफओ प्रीति भंडारी का कहना है कि इस क्षेत्र में कहां-कहां अवैध कब्जे हैं, फिलहाल तो ऐसी जानकारी नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि इस संवेदनशील इलाके में विभाग प्रोटेक्शन के लिए बाड़ लगाएगा। इस काम के शुरू करने से पहले डिमार्केशन होगी।

दरअसल में अणू के सब स्टेशन के पास से लेकर पक्का-भरों तक का यह बड़ा इलाका काफी फैला हुआ है और यहां पिछले कुछ सालों में बड़े स्तर पर लोगों ने अपनी मलकियत भूमि पर निर्माण के साथ कई जगह वन विभाग की भूमि भी कब्जाने में कोई संकोच इसलिए नहीं किया,क्योंकि यहां इस जंगल को रिहायशी इलाके के साथ प्रोटेक्ट करने का कोई भी बंदोबस्त ही नहीं किया गया है। जो यहां आने वाले अधिकारियों की सबसे बड़ी लापरवाही मानी जा सकती है।

प्रभावशाली लोगों ने किए हैं विभाग की भूमि पर कब्जे, एक तरफ मलकीयत, तो दूसरी ओर वन विभाग की जमीन

एक हैंडपंप सरकारी भूमि पर आईपीएच विभाग ने लगाया

हीरा नगर चौक पर तो एक हैंडपंप भी सरकारी भूमि पर आईपीएच ने लगाया था, लेकिन वह किसने कब्जा रखा है। वह किस व्यक्ति ने अपने निर्माण के भीतर समेट लिया। इसका यह जीता जागता उदाहरण है कि यहां कोई भी किसी को टोकता नहीं है।

हीरा नगर क्षेत्र में जमीन के दाम आसमान छू रहे

हीरा नगर क्षेत्र में जमीन के दाम आसमान छू रहे हैं और इस तरह वन विभाग यदि बेखबर होकर अपनी भूमि की प्रोटैक्शन करने में कामयाब नहीं हो पा रहा,तो इसमें लोगों का भी क्या दोष है जो आसानी से अपनी मलकीयत भूमि के साथ आगे तक खेलने में संकोच नहीं कर सकते। क्योंकि पर्यावरण की दृष्टि से यह इलाका बेजोड़ है।