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सरकारी और गैर सरकारी बैंकों में बीओडी नहीं चाहिए

सरकारी और गैर सरकारी बैंकों में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर (बीओडी) की कोई जरूरत नहीं है। इसी को ढाल बनाकर बैंकों के अधिकारी...

Danik Bhaskar | Apr 12, 2018, 02:00 AM IST
सरकारी और गैर सरकारी बैंकों में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर (बीओडी) की कोई जरूरत नहीं है। इसी को ढाल बनाकर बैंकों के अधिकारी चेयरमैन कई तरह के गोलमाल करते हैं। जिससे बैंकों को सबसे ज्यादा हानि होती है। वहीं बीओडी के सदस्य राजनैतिक होते हैं। उनकी नियुक्ति 5 साल के लिए होती है। इसलिए इनकी मजबूरी होती है। इनके स्थान पर निरीक्षण अधिकारी नियुक्त किए जाने चाहिए। यह बात पूर्व डायरेक्टर केवीएआरडी बैंक करतार चंद ने कही।

उन्होंने कहा कि वे अधिक जांच पड़ताल के बगैर लोगों को लोन देने की सहमति दे देते हैं। नियमों की मानें तो अगर कोई 3 लाख का कर्ज मांगता है, तो उसे साढ़े 3 लाख की संपति अमानत के रूप में बैंक में रखनी होती है, लेकिन ऐसा नहीं होता। अगर सारी जिम्मेदारी बैंक के कर्मचारियों- अधिकारियों की हो जाए तो वे नौकरी के खो जाने के डर से कर्ज देते समय पूरी तहकीकात करके ही उसे पास कर सही पात्रों को देंगे।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बीओडी के सदस्यों को ढाल बना कर गोलमाल किया जा रहा, जबकि बीओडी सदस्यों का बैंकों में सहकारी समितियां में शून्य योगदान है। इनसे केवल आर्थिक बोझ बढ़ता, टीए डीए सहित विदेशों के सैर सपाटे में लाखों खर्च करवाते हैं। इनके स्थान पर निरीक्षण अधिकारी नियुक्त होंगे। करतार ने आरोप लगाया कि चालाक लोग चेयरमैन और बैंक अधिकारियों से मेलजोल करके ज्यादा लोन ले लेते, बाद में तीन किस्तें न देकर लोन को एनपीए में डलवा लेते, जिससे बैंक को लाखों का नुकसान हो रहा है।