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चपरासी करवा रहा अार्ट्स की पढ़ाई तो किस तरह संवरेगा बच्चों का भविष्य

घ्याल पंचायत के अंतर्गत आने वाले हाई स्कूल टेपरा (डाबर) में अध्यापकों की कमी से अभिभावक भड़क उठे हैं। अभिभावकों का...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 12, 2018, 02:00 AM IST

घ्याल पंचायत के अंतर्गत आने वाले हाई स्कूल टेपरा (डाबर) में अध्यापकों की कमी से अभिभावक भड़क उठे हैं। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल में कई पद लंबे अरसे से खाली पड़े हैं। नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो जाने के बावजूद इन पदों को भरने की जहमत नहीं उठाई जा रही है। आलम यह है कि बच्चों को कला विषय की पढ़ाई चपरासी करवा रहा है। बुधवार को अभिभावकों ने बिलासपुर में प्रारंभिक शिक्षा उप निदेशक देवेंद्र पाल से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। अभिभावकों ने चेताया कि यदि रिक्त पद जल्द न भरे गए तो वे धरना-प्रदर्शन का सहारा लेने पर मजबूर होंगे।

सुरक्षा की दृष्टि से ठीक नहीं दूर के स्कूल में भेजना

अभिभावकों ने कहा कि अध्यापकों की कमी के कारण कई लोगों ने अपने बच्चे प्राईवेट स्कूलों में दाखिल कर लिए हैं। इससे उनकी जेब बेवजह ढीली हो रही है। वहीं, कई लोग प्राईवेट स्कूलों की भारी-भरकम फीस देने में असमर्थ हैं। उनके सामने अपने बच्चों को नम्होल स्कूल में भेजने का विकल्प है, लेकिन वह काफी दूर है। आए दिन हो रही घटनाओं के चलते बच्चों, विशेष रूप से बेटियों को इतनी दूर भेजना सुरक्षा की दृष्टि से ठीक नहीं होगा। बेहतर होगा कि रिक्त पद जल्द भरे जाएं। ऐसा न होने की स्थिति में अभिभावक कठोर कदम उठाने पर मजबूर होंगे, जिसके लिए सरकार और शिक्षा विभाग जिम्मेदार होंगे। प्रतिनिधिमंडल में हरि सिंह, नीलम, कांता, सोमा, अनिता, विमला, निर्मला, चंपा व रामस्वरूप आदि शामिल थे।

शिक्षा उप निदेशक को सौंपा ज्ञापन, नियुक्तियां जल्द न होने पर धरना-प्रदर्शन की चेतावनी

टेपरा स्कूल में शिक्षकों के खाली पद भरने की मांग को लेकर शिक्षा उप निदेशक को ज्ञापन सौंपते घ्याल पंचायत के लोग

पिछले सत्र में भी कई बार की पद भरने की मांगटेपरा स्कूल के एसएमसी अध्यक्ष रामपाल व घ्याल पंचायत प्रधान पदमदेव शर्मा की अगुवाई में उप निदेशक को ज्ञापन सौंपने पहुंचे अभिभावकों ने कहा कि स्कूल में टीजीटी के 2 तथा कला अध्यापक व क्लर्क के 1-1 पद लंबे अरसे से खाली पड़े हैं। पिछले सत्र में भी इन पदों को भरने की मांग कई बार उठाई गई, लेकिन स्थिति जस की तस है। अब नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो जाने के बावजूद सरकार व शिक्षा विभाग खाली पद भरने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। इससे नए सत्र की शुरुआत से ही बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बच्चों को गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के सरकारी दावों की कलई इसी बात से खुल रही है कि कला विषय की पढ़ाई स्कूल का चपरासी करवा रहा है।

नर्स के सहारे चल रहा है प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कलोल

बरठीं|प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कलोल में चिकित्सकों की कमी से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कोटधार क्षेत्र की लगभग 10 पंचायतों के हजारों ग्रामीणों को अपनी सेवाएं देने वाला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुद ही बीमार हो गया है। ग्रामीणों राजकुमार, संजीव कुमार, सुरेश कुमार सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि चिकित्सा केंद्र एकमात्र नर्स के सहारे चल रहा है और दवाइयों का भी टोटा है। इसके अतिरिक्त लगभग दो माह से इस केंद्र में चिकित्सक नहीं है। फार्मासिस्ट भी कभी कभार आते हैं। कोटधार की भडोलियां पंचायत सहित मरोतन, बुहाड, डूडियां, कलोल, जेजवीं, बकैण, पपलोआ, मलरांओं सहित अन्य पंचायतों के मरीजों को अपना इलाज करवाने के लिए बिलासपुर या हमीरपुर जाना पड़ रहा है जिसमें उनका भारी खर्चा भी हो रहा है। ग्रामीणों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा सहित प्रदेश सरकार व स्थानीय विधायक से मांग की है कि उक्त केंद्र की हालत को सुधारा जाए ताकि क्षेत्र की जनता को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। बीएमओ कार्यालय के अधीक्षक अशोक कुमार ने बताया कि चिकित्सक की तैनाती तलाई मेला में की गई है, जबकि फार्मासिस्ट तीन दिन कलोल व तीन दिन स्वास्थ्य केंद्र मरोतन में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मेलों के समापन के बाद चिकित्सक स्थाई रूप से कलोल में रहेंगे।

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