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चेक करने को बुलाया तो बोली ट्रेनी डॉक्टर, शर्म नहीं आती क्यों चिल्ला रहे

डॉक्टरों को चेक करने के लिए बुलाया, तो एक ट्रेनी डॉक्टर ने बीमारी से तड़फ रहे दादू से कहा, ‘शर्म नहीं आती क्यों चिल्ला रह

Danik Bhaskar | Nov 17, 2017, 08:54 AM IST

सोलन। दादा को अस्पताल में भर्ती करने के बाद डॉक्टरों को चेक करने के लिए बुलाया, तो एक ट्रेनी डॉक्टर ने बीमारी से तड़फ रहे दादू से कहा, ‘शर्म नहीं आती क्यों चिल्ला रहे हो।’ पेशेंट को टाइम से नहीं ला सकते थे।’ और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने शुगर बढ़ने की बात कहकर पेशेंट को 216 बेड नंबर पर एडमिट कर दिया। उपचार के बाद भी जब पेशेंट को आराम नहीं आया, तो डॉक्टर ने उन्हें शिमला या चंडीगढ़ ले जाने के लिए रेफर कर दिया। दो दिन पूर्व समय पर ऑक्सीजन सिलेंडर एंबुलेंस मिलने के कारण हुई अपने दादा की मौत से आहत ऋर्चा व्यवस्था के साथ-साथ अस्पताल में स्टाफ के व्यवहार को लेकर भी रोष में है।

क्षेत्रीय अस्पताल सोलन से रेफर किए 65 वर्षीय देवीराम को समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने और व्यवस्थागत खामियों से उनकी मौत हो गई। घर संभालने के लिए अब पोती अकेली रह गई है। 10 वर्ष पहले अपने माता-पिता को खो चुकी 18 वर्षीय ऋचा को अब अपनी बुजुर्ग दादी को सहारा देने की चिंता सता रही है। सोलन में जवाहर पार्क के नजदीक कर्नल संधू निवासी के केयर टेकर देवीराम को शूगर की की समस्या थी। 14 तारिख को सुबह करीब साढ़े 12 बजे उन्हें शूगर कम होने का अटैक पड़ा तो पड़ोसियों की मदद से देवीराम को अस्पताल पहुंचाया गया। एमरजेंसी में तैनात डॉक्टर ने शुगर कम होने की बात कहकर उन्हें गुलूकोज चढ़ाने को कहा। डॉक्टर ने बताया कि पेशेंट अब ठीक है एक-दो घंटे बाद घर जा सकते हैं। इस बीच करीब चार बजे देवीराम की तबीयत और बिगड़ गई।

अस्पताल प्रशासन ने गलती तो मानी, पर इसका बताया कारण भी
परिजनोंकी आर्थिक हालत की नहीं थी जानकारी : प्राइवेटएंबुलेंस को सिक्योरिटी जमा किए बगैर ऑक्सीजन गैस सिलेंडर नहीं दिए जाने की गलती प्रशासन ने जरूर मानी, लेकिन इसका कारण भी बताया। मेडिकल सुपरिंनटेंनडेंट डॉ. राजन उप्पल ने बताया कि उन्हें परिजनों की आर्थिक हालत की जानकारी नहीं थी। प्राइवेट एंबूलेंस के लिए ऑक्सीजन गैस सिलेंडर सिक्योरिटी जमा करने पर ही दिया जाता है। पहले भी कई मामलों में बिना सिक्योरिटी के सिलेंडर दिए गए लेकिन वापस नहीं मिले। इससे ड्‌यूटी पर तैनात स्टॉफ को रिकवरी भरनी पड़ी। किसी के साथ ऐसा हो इसके लिए अस्पताल में हेल्पलाइन नंबर लगाए जाएंगे ताकि समय पर जरूरतमंद को मदद मिल सके।
ऑक्सीजन मांगी तो सिक्योरिटी 5 हजार मांगी : ऋर्चाने बताया कि करीब साढ़े पांच बजे 108 एंबुलेंस को कॉल किया गया, लेकिन जवाब मिला कि एंबुलेंस अभी किसी पेंशेंट को ले बाहर भेजी गई है। एक घंटे इंतजार करने पर प्राइवेट एंबुलेंस करने का निर्णय लिया, लेकिन इसमें ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत थी। ऋचा उसके साथ आए पड़ोसियों ने अस्पताल प्रशासन से सिलेंडर की मांग की, तो उससे सिक्योरिटी के तौर पर 5 हजार मांगे गए। उस समय किसी के पास इतने पैसे नहीं थे, लेकिन सिलेंडर इंचार्ज ने ऑक्सीजन सिलेंडर देने से साफ मना कर दिया। हालांिक स्टेचर में देवीराम को ऑक्सीजन दी जा रही थी। इस बीच रात करीब 8 बजे 108 एंबुलेंस अस्पताल पहुंची। ऋचा ने बताया कि एंबुलेंस में डालते ही दादू को ऑक्सीजन लगाई गई, लेकिन उसी समय उनके प्राण निकल गए।

डाॅक्टरों के सामने व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने जताया विरोध
समिति का पैसा कहां खर्च हो रहा, जरूरतमंदों का इलाज क्यों नहीं हो रहा

व्यापारमंडल सोलन के प्रधान मुकेश गुप्ता महासचिव मनोज गुप्ता ने अस्पताल के एसएस राजन उप्पल से मिलकर अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। प्रधान मुकेश गुप्ता ने कहा कि अस्पताल की रोगी कल्याण समिति का पैसा कहां खर्च हो रहा है। क्या इससे जरूरतमंद रोगियों पर यह पैसा खर्च नहीं हो सकता है। व्यापारमंडल ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही हुई, तो उसका खामियाजा अस्पताल प्रशासन को भुगतना पड़ेगा। व्यापार मंडल ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों स्टॉफ का पैशेंट के साथ अच्छा व्यवहार नहीं रहता है। ऐसे माहौल में रोगी की हालत और बिगड़ जाती है। व्यापारमंडल ने 108 एंबुलेस सेवा की कार्य प्रणाली पर भी सवाल उठाए। अस्पताल में पैसे संबंधित किसी भी प्रकार की एमरजेंसी से निपटने के लिए व्यापार मंडल ने अपना हेल्प लाइन नंबर दिया है। व्यापार मंडल के प्रधान मुकेश गुप्ता ने ऋचा की पढ़ाई की फीस का खर्चा उठाने की बात भी कही। हेल्पलाइन नंबर को अस्पताल की रिकार्ड बुक एमरजेंसी वार्ड में अंकित किया जाएगा।