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कविताओं से सामाजिक कुरीतियों पर िकया प्रहार

राज्य स्तरीय सुकेत नलवाड़ एवं देवता मेला कमेटी की ओर से सुकेत साहित्य एवं सांस्कृतिक परिषद के सहयोग से कवि...

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 02:00 AM IST
कविताओं से सामाजिक कुरीतियों पर िकया प्रहार
राज्य स्तरीय सुकेत नलवाड़ एवं देवता मेला कमेटी की ओर से सुकेत साहित्य एवं सांस्कृतिक परिषद के सहयोग से कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस मौके पर मशहूर कवि गणेश गनी ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। बीआर शर्मा ने कवि सम्मेलन की अध्यक्षता की। सुकेत साहित्य एवं संस्कृति परिषद के अध्यक्ष गंगा राम राजी ने कहा कि परिषद हर वर्ष मेला कमेटी के सहयोग से इस तरह के आयोजन करती आई है। इस कवि सम्मेलन कविताओं के माध्यम से कवियों ने सामाजिक कुरीतियों, रूढ़ियों और विसंगतियों पर करारा प्रहार किया।

कवि गोष्ठी का आगाज कुल्लू से आए कवि कैलाश गौतम ने गजल सुनाकर किया। वहीं पर हेमराज ने मंडयाली हास्य कविता में कहा-टाण मीण करना पौणा चेले ले जाणा पौणा, बाल्हाओ नजर लगी री नगरा री बची जाओ आधा पौणा। वही पर कवयित्री अर्पणा धीमान ने कहा- काल की आंख से छलकती पीड़ा की धारा ही तो हूं मैं, यथार्थ से जूझता जीवन सागर का किनारा ही तो हूं मैं। वरिष्ठ कवयित्री हरिप्रिया शर्मा ने कहा-एकांत में बैठे शब्दों के पास बहुत पास सरक आए विचार शब्द बन गए फूल। लोकगायिका एवं कवयित्री रूपेश्वरी शर्मा ने कहा-मां मैं जानती हूं, लोकसंस्कृति कर्मी एवं कवि कृष्ण चंद्र महादेविया ने अपनी कविता कुछ यूं बयां की- गेहूं मटर के बिस्से हवा ने थपथपाया, बादलों के पर्दे में चांद छुप गया गौशाला के पीछे बुल और बुलबुल चहकते रहे। वहीं पर अपने शायराना अंदाज में शायर रवि राणा शाीहन ने कहा- ऐ रफीको क्यों भला ऐसा है आलम, सांप जैसी हो गई क्यों नसल-ए-आदम।

कवि गोष्ठी को आगे बढ़ाते हुए जगदीश कपूर ने कहा -रात की रानी की खुशबू दे रही हमको सदाएं, शोख सावन की घटा में आओ चलें कहीं घूम आएं। किरण गुलेरिया ने अपनी सुरीली आवाज में गीत सुनाया। वहीं पर किरन शर्मा, एलआर शर्मा, पॉमिला ठाकुर ने भी अपनी कविता का पाठ किया। इसके अलावा प्रियवंदा शर्मा, रश्मि शर्मा, भी सिंह चौहान, हेमराज, गणेश गनी, विजय विशाल, बीआर शर्मा, आरके गुप्ता, सुरेंद्र मित्रा, रतन लाल शर्मा, गंगाराम राजी, सुरेश सेन निशांत, शीतल, प्रेरणा, पल्लवी, दीनू कश्यप, सरीर कश्यप, पवन चौहान, घनश्याम , सुषम लता सूद, हीरा सिंह, दीक्षा, राजेंद्र पाल, उमेश गौतम, विनोद कुमार, चंपा शर्मा, यादविंद्र शर्मा इत्यादि ने अपनी कविताओं का पाठ किया।

सुकेत साहित्य परिषद एवं मेला कमेटी के सौजन्य से कवि गोष्ठी का आयोजन

राज्य स्तरीय सुकेत नलवाड़ मेले में कवि सम्मेलन में भाग लेते ।

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