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कुल्लू के 17 स्कूलों पर लटक सकता है ताला

Kullu News - जिला कुल्लू में ऐसे 17 प्राथमिक स्कूलों पर ताला लटक सकता है जो विद्यार्थियों के लिए तरस रहे हैं। हालांकि जिला में...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:00 AM IST
कुल्लू के 17 स्कूलों पर लटक सकता है ताला
जिला कुल्लू में ऐसे 17 प्राथमिक स्कूलों पर ताला लटक सकता है जो विद्यार्थियों के लिए तरस रहे हैं। हालांकि जिला में अनेकों स्कूल ऐसे हैं जो अध्यापक और विद्यार्थियों के अनुपात पर खरे नहीं उतर रहे हैं। लेकिन जिला कुल्लू में 17 प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं जहां पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों की संख्या पांच से नीचे रह गई है। जिला के इन 17 स्कूलों में 63 विद्यार्थी अध्ययनरत है जबकि अध्यापकों की संख्या पर नजर दौड़ाएं तो इन स्कूलों में 28 अध्यापक तैनात हैं। लिहाजा, ऐसे स्कूलों की सूची शिक्षा विभाग ने निदेशालय को भेज दी है और निदेशालय से आदेश मिलते ही इन स्कूलों पर ताला लटकना तय माना जा रहा है। इन स्कूलों में सबसे ज्यादा स्कूल निरमंड खंड में शामिल है जहां 7 स्कूल ऐसे हैं जिसमें विद्यार्थियों की संख्या पांच से नीचे रह गई है। उसके बाद आनी, नग्गर, कुल्लू-2 में तीन-तीन स्कूल ऐसे हैं जबकि कुल्लू-1 में एक स्कूल ऐसा है जिसमें बच्चों की संख्या पांच से कम रह गई है। लिहाजा, इन स्कूलों में ताला लटकना तय माना जा रहा है।


ये स्कूल बंद होने की लाइन में जिला कुल्लू में 5 से कम विद्यार्थियों की संख्या वाले 17 स्कूलों में धार, बागी, कार्की, मोईन, चम्भू, इश्वा, रठोन, काण्डा, पोखनी, थारेधार, शंगचर, निपाला, गौर, मासू, खोपड़ी, डाली, समालंग आदि स्कूल शामिल हंै।


दस किलोमीटर जाना पड़ेगा मोईन के बच्चों को निरमंड खंड के मोईन प्राथमिक स्कूल के बंद होने से क्षेत्र के बच्चों को 10 किलोमीटर दूर आनस जाना पड़ेगा। क्योंकि इस स्कूल को आनस प्राथमिक स्कूल में मर्ज किया जाने की योजना है। ऐसे में क्षेत्र के बच्चों को इतनी दूर जाकर पढ़ाई करनी पड़ेगी। इसके अलावा कुल्लू के समालंग स्कूल के बंद होने पर क्षेत्र के बच्चों को 5 किलोमीटर दूर कडिंगचा स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने जाना पड़ेगा। इसके अलावा अन्य स्कूलों के बंद होने पर 4 से लेकर एक किलोमीटर तक दूर जाकर दूसरे स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करनी पड़ेगी।

ये स्कूल वीआईपी से कम नहीं इन 17 स्कूलों में कुछ स्कूल ऐसे भी हैं जहां अध्यापक और विद्यार्थियों का अनुपात किसी वीआईपी स्कूल से कम नहीं। इन स्कूलों में मासू और मोईन प्राथमिक स्कूल में दो विद्यार्थी दो अध्यापक तैनात है जबकि थारेधार स्कूल में एक विद्यार्थी एक अध्यापक हैं। इसके अलावा ज्यादातर स्कूल ऐसे हैं जहां 4 विद्यार्थी और दो अध्यापक तैनात है। कुछ स्कूल ऐसे हैं जहां पांच बच्चे और दो अध्यापक हैं। ऐसे में ये स्कूल किसी वीआईपी स्कूल से कम नहीं हैं।


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