स्कूल आते-जाते गर्ल्स के सामने अश्लील हरकतें करता था बदमाश, दो लड़कियों ने जुटाई हिम्मत और भिड़ गईं; फिर.... / स्कूल आते-जाते गर्ल्स के सामने अश्लील हरकतें करता था बदमाश, दो लड़कियों ने जुटाई हिम्मत और भिड़ गईं; फिर....

जानें, मुस्कान और सीमा ने कैसे किया ये कारनाम

dainikbhaskar.com

Jan 14, 2019, 06:08 PM IST
two girls seema and muskan will get national bravery award on republic day

कुल्लूकुल्लू जिला मुख्यालय के गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल की दो छात्राओं मुस्कान और सीमा को उनकी बहादुरी के लिए गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इन छात्राओं ने बहादुरी दिखाते हुए अश्लील हरकत और छेड़छाड़ करने वाले शरारती तत्वों और बदमाशों को सबक सिखाया और पुलिस के हवाले किया। तब दोनों का चयन साल 2018 के लिए वीरता पुरस्कार के लिए हुआ।

आते-जाते लड़कियों को छेड़ते थे बदमाश

- जानकारी के अनुसार, खराहल घाटी के बराधा गांव की मुस्कान और थरमाण गांव की सीमा घर से रोज स्कूल के लिए निकलती थीं। इलाके के कुछ बादमाश स्कूल आते जाते समय छोटी-बड़ी लड़कियों के साथ रास्ते-गलियों में छेड़छाड़ करते थे। उनमें से एक छात्राओं के सामने अश्लील हरकतें करता था।
- जब भी छात्राएं स्कूल जातीं और लौटतीं वह रास्ते में अश्लील हरकतें करता। 10 जुलाई 2017 को स्कूल जा रहीं मुस्कान और सीमा के सामने उस बदमाश ने फिर वही अश्लील हरकतें कीं।
- इस पर मुस्कान और सीमा ने अपने साथियों के साथ मिलकर उस बदमाश 43 वर्षीय संजू यादव की जमकर पिटाई की। उन्होंने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। बदमाश के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और छात्राओं के हिम्मत दिखाने से दूसरे बदमाशों के भी होश उड़ गए। इसके बाद इलाके में छात्राओं के साथ छेड़छाड़ की घटना घट गईं।
- इस घटना के बाद राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल, सुलतानपुर के प्रिंसिपल रविंद्र सिंह और इलाके की एसपी शालिनी अग्निहोत्री ने दोनों बच्ची की तारीफ की और उनका नाम वीरता पुरस्कार (National Bravery Award) के लिए भेजा।

क्यों दिया जाता है राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार, कब दिया गया पहला पुरस्कार

- राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार हर साल 16 साल के कम उम्र के बच्चों को उनके वीरता पूर्ण कार्य के लिए दिया जाता है। यह पुरस्कार भारत सरकार और इंडियन काउंसिल फार चाइल्ड वेलफेयर की ओर से साल 1957 में शुरू किया गया था।
- वीरता पुरस्कारों की शुरूआत 2 अक्टूबर 1957 को तब हुई जब तत्कालीन पीएम जवाहर लाल नेहरू रामलीला मैदान में एक कार्यक्रम में सम्मिलित हुए थे। इस दौरान शार्ट सर्किट से शामियाने में आग लगने वाली थी। तभी 14 वर्षीय हरीश चन्द्र मेहरा नाम के एक स्काउट ने जलते टैंट को चाकू से काट कर अलग कर दिया जिससे हजारों जानें बच गईं।
- इन पुरस्कारों को मोटे तौर पर पाँच श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है, जिनमें भारत पुरस्कार, संजय चोपड़ा पुरस्कार, गीता चोपड़ा पुरस्कार, बापू गाइधानी पुरस्कार और सामान्य राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार शामिल हैं।
- इस तरह पहला राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार हरीश चन्द्र के साथ अन्य बच्चों को 4 फरवरी 1958 को प्रदान किया गया। वीरता पुरस्कारों का निर्धारण इंडियन काउंसिल फार चाइल्ड वेलफेयर द्वारा किया जाता है।

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