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सिरमौर में बनेंगे एयरफोर्स और आर्मी हेलिकाप्टर के लिए हैलीपेड

जिला सिरमौर आपदा के दौरान अब एयरफोर्स व आर्मी के हेलिकाप्टर उतर सकेंगे। इसके लिए एयरफोर्स जल्द ही जिला सिरमौर में...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 16, 2018, 02:05 AM IST

जिला सिरमौर आपदा के दौरान अब एयरफोर्स व आर्मी के हेलिकाप्टर उतर सकेंगे। इसके लिए एयरफोर्स जल्द ही जिला सिरमौर में स्थलों का चयन करेगी। किसी भी आपदा स्थिति में लोगों को रेस्क्यू करने, राहत व बचाव कार्य समय पर पहुंचाने के लिए हेिलकाप्टर के उतरने की जगह तालाश की जाएगी। एयरफोर्स की ओर से जिले के विभिन्न स्थानों पर ऐसे स्थल चिह्नित किए जाएंगे, जहां पर हेिलकाप्टर आसानी से उतर सकता है, ताकि जिला में किसी भी प्रकार की आपदा स्थिति से निपटने के लिए हेिलकाप्टर का उपयोग किया जा सके। इसके अलावा जिला के शिक्षण संस्थानों के खेल मैदान और अन्य स्टेडियम इत्यादि को सूचीबद्ध किया जाएगा, ताकि इन हेिलकाप्टर का उपयोग आपदा के समय किया जा सके। सिरमौर जिला की भौलोगिक स्थिति काफी कठिन है। कठिन क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदा के दौरान राहत कार्य संचालन करना मुश्किल होता है।

जिला में हैं 13 हैलीपेड

जिला सिरमौर में 13 हैलीपेड हैं, जबकि कि हेिलकाप्टर को रिजेक्ट किया जा चुका है। इन हैलीपेड में छह पीडब्ल्यूडी के हैं। जबकि पांच हैलीपेड प्राइवेट व दो स्कूल के हैं। जहां पर चौपर को उतारा जा सकता है। जिला सिरमौर के हरिपुरधार, संगड़ाह, सलाना, क्वागधार, माइनाबाग व नाया के हैलीपेड को पीडब्ल्यूडी विभाग देखरेख करता है, जबकि बडू साहिब, पशुपति कालाअंब, डेंटल कालेज पांवटा साहिब, नाहन का चैतक व कफोटा हैलीपेड प्राइवेट प्रॉपर्टी है। इसके अलावा दो हैलीपेड तारूवाला ब्वायज व जीएसएस पांवटा साहिब स्कूल का है। जहां पर हेिलकाप्टर की लैंडिंग की जाती है, जबकि इसके अलावा रेणुकाजी मेले के दौरान सीएम का चौपर गिरिनदी के एक छोर पर उतारा जाता है। बताया जा रहा है कि जिसे बाद में रिजेक्ट किया गया था। फिल्हाल इन हैलीपेडों का दायरा बढ़ाने के लिए लेकर कार्रवाई की जा रही है।

यह हैं हैलीपेड के साइज: जिला सिरमौर में कुल 13 हैलीपेड हैं। इसमें से माइनाबाग का हैलीपेड सबसे बड़ा है। इसका साइज 120x75 मीटर का है। जबकि तारूवाला स्कूल पांवटा साहिब में 100 x 30, संगड़ाह का 40x32, बड़ू साहिब का 30x20, राजगढ़ के सलाना का 46x27, कफोटा का 40x25, शिलाई के नाया का 35x20, पशुपाति कालाअंब का 30x20, क्वागधार का 40x25, रामपुरघाट पांवटा साहिब का 100x50 मीटर का साइज है। विभागीय जानकारी के अनुसार इन हैलीपेडों का साइज को लेकर भी विभाग कार्रवाई कर रहा है। इसके अलावा जैतक, आर्मी व कफोटा का हैलीपेड है। मिली जानकारी के अनुसार हैलीपेड के साइज को लेकर संगड़ाह में 50x50 मीटर का हैलीपेड बनाया गया है। जबकि हरिपुरधार व क्वागधार हैलीपेड में भी हैलीपेड के साइज को बढ़ाया जाना प्रस्तावित है जिसे 50x50 मीटर किया जाना है।

एयरफोर्स की टीम चयनित करेगी स्थल

दिल्ली में वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक हुई

इस संबंध में डीसी सिरमौर ललित जैन ने बताया कि जिला में एयरफोर्स व आर्मी के हेिलकाप्टर उतारने को लेकर दिल्ली में वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक की गई है। डीसी सिरमौर ने बताया कि वायुसेना के अधिकारियों द्वारा शीघ्र ही सिरमौर जिला के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा करके हेिलकाप्टर के उतरने के उपयुक्त स्थलों का चयन किया जाएगा। सिरमौर में चयनित किए गए हैलीपैड के अतिरिक्त जिला के शिक्षण संस्थानों के खेल मैदान और अन्य स्टेडियम इत्यादि को सूचीबद्ध किया जाएगा, ताकि इन हेलीपैड का उपयोग आपदा के समय किया जा सके। वायुसेना के अधिकारियों द्वारा जिला प्रशासन के सुझावों पर गहनता से विचार किया गया और शीघ्र ही ट्रॉयल लैंडिग करवाने के बारे में आश्वासन दिया गया। उन्होंने कहा कि आपदा का कोई समय नहीं होता और आपदा से निपटने के लिए फूल प्रूफ प्रबंध किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सिरमौर जिला की भौलोगिक स्थिति काफी कठिन है। कठिन क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदा के दौरान राहत कार्य संचालन करना मुश्किल होता है। आपदा प्रबंधन को फाइलों तक सिमित न रखकर इसे व्यवहारिक बनाया जाएगा, ताकि प्राकृतिक आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्य निर्विध्न संचालित किए जा सकें।

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