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बीपीएल परिवार को मिली थी नौतोड़ जमीन, बंदोबस्त की गलती से उजाड़ दिया बगीचा

अवैध अतिक्रमण हटाओ मुहिम के तहत उच्च न्यायालय की ओर से गठित एसआईटी की गैर जिम्मेदाराना कार्यशैली भू-दस्तावेजों...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 09, 2018, 02:05 AM IST

  • बीपीएल परिवार को मिली थी नौतोड़ जमीन, बंदोबस्त की गलती से उजाड़ दिया बगीचा
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    अवैध अतिक्रमण हटाओ मुहिम के तहत उच्च न्यायालय की ओर से गठित एसआईटी की गैर जिम्मेदाराना कार्यशैली भू-दस्तावेजों की खामियों की परेशानियों से जूझ रहे बागवानों को परेशानी में डाल दिया है। मौके पर एसआईटी को लीड कर रहे डीएफओ रोहड़ू पर क्षेत्रीय बागवानों की आेर से न केवल बिना दस्तावेजों की जांच किए मलकीयत जमीन पर उगाए सेब के बगीचों को उजाड़ने का अारोप हैं, जबकि पीड़ित बागवानों के साथ बदसलूकी करने के भी गंभीर आरोप हैं।

    बंदोबस्त के पास विचाराधीन है मामला : बंदोबस्त विभाग की ओर से क्षेत्र को डीपीएफ घोषित किए जाने के बाद जब भू राजस्व विभाग के समक्ष दोनों भाइयों ने अपनी जमीन के इंतकाल के दस्तावेज प्रस्तुत किए तो बंदोबस्त विभाग ने रिकाॅर्ड में दुरुस्ती की कार्रवाई शुरू की, जिस पर फैसला आना अभी बाकी है। लेकिन डीएफओ रोहड़ू ने इंतकाल, बंदोबस्त विभाग की रिपोर्ट एवं अन्य दस्तावेजों को दरकिनार कर करीब चार सौ पौधों को काटने के निर्देश दे दिए।

    सदमें में है पूरा परिवार : डीएफ की ओर से की गई इस कार्रवाई में अपना सब कुछ गवां चुके ज्ञान चंद के पास अब खेती करने के लिए एक इंच जमीन तक नहीं बची है, जबकि बीपीएल परिवार से संबंधित सोहन लाल का परिवार भी गहरे सदमें में है। इस हादसे के बाद जहां ज्ञान चंद का इकलौता बेटा मानसिक संतुलन खो बैठा है, जबकि 26 साल की पुत्री प्रभा व स्वयं ज्ञान चंद सदमें की हालत में है। इसी तरह से सोहन लाल का पूरा परिवार भी सदमें में है।

    विरोधाभासी है अधिकारियों के बयान

    इन दोनों परिवारों पर एसआईटी द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर डीएफओ रोहड़ू सीबी तहसीलदार के बयान न केवल गैर जिम्मेदाराना है, बल्कि बेहद हास्यास्पद भी है।

    डीएफओं कभी मुहिम में गरीब परिवारों को बख्शने रिहायत देने की बात कर रहे हैं, तो कभी इस कार्रवाई का जिम्मा राजस्व विभाग के अधिकारियों के सर फोड़ रहे हैं। इसी प्रकार जहां भू-राजस्व विभाग के कर्मचारी दबी जुबान में ज्ञान चंद व सोहन लाल के बगीचों को काटे जाने को गलत बता रहे हैं वहीं तहसीलदार जुब्बल कश्मीर सिंह ने स्पष्ट तौर पर स्वयं को इस मामले से दूर करते हुए कहा कि इस बारे में एस आई टी उनसे कोई सलाह नहीं ली गई ।

    कटे हुए पेड़ो के साथ बी पी एल से संबधित सोहन लाल व ज्ञान चंद का परिवार

    बिना दस्तावेज को देख उजाड़ दिया बगीचा

    डीएफओ रोहडू पर शडाना निवासी सोहन लाल व ज्ञान चंद ने बिना दस्तावेज देखे उनके बगीचों को नष्ट कर उनके परिवारों को भूखे मरने पर विवश करने का आरोप लगाया है। इन दोनों भाइयों के घर सहित पूरी जमीन 1970 में भारी बारिश की वजह से हुए भू स्खलन में बह गई थी। इसके बाद प्रदेश सरकार ने दोनों भाईयों को बढाल में चार बीघा जमीन तबादले के रूप में चार बीघा जमीन नौतोड़ के रूप में दी थी। जिसका बाकायदा 1982 व 1984 में इंतकाल भी दर्ज हुआ है। इसके बाद 1986 में क्षेत्र बंदोबस्त की प्रक्रिया शुरू हुई जिसमें भू राजस्व विभाग ने इनको दी गई जमीन का कोई जिक्र नहीं किया और क्षेत्र को डीएफ घोषित कर दिया।

    क्या कहते है अधिकारी

    ज्ञान चंद व सोहन लाल को तबादला व नौतोड़ के तहत 1982 व 1984 में जमीन प्रदान की गई थी। बंदोबस्त के दौरान क्षेत्र डी पी एफ घोषित हुआ जिसके बाद इस मामले में दुरुस्ती की कार्रवाई चल रही है जिस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। हेमराज शर्मा , नायब तहसीलदार बंदोबस्त

    मैं एसआईटी से बाहर हूं। मुझे इस मामले में कोई जानकारी नहीं है और न ही एसआईटी ने इस मामले में मुझसे किसी भी प्रकार की सलाह ली है। कश्मीर सिंह, तहसीलदार जुब्बल

    हमने कई गरीब लोगों को राहत भी दी है। वैसे व्यक्ति गत रूप से मुझे भू राजस्व से संबंधित दस्तावेजों के बारे में कोई ज्यादा जानकारी नहीं है इस लिए कार्रवाई राजस्व विभाग के अधिकारियों की डिमार्केशन के बाद की जा रही है। इस मामले में लटठा देख कर कार्रवाई की गई है। सीबी ताशीलदार, डीएफओ रोहड़ू

    ये है सवाल :

    माननीय उच्च न्यायालय ने पांच बीघा तक के अवैध अतिक्रमण को फिलहाल नहीं हटाने के निर्देश दिए थे लेकिन इन दोनों परिवारों को इंतकाल के कागज होते हुए भी कोई रिहायत क्यों नहीं दी गई।

    डीएफओ रोहड़ू सी बी तहसीलदार स्वयं मानते हैं कि उन्होंने कुछ गरीब परिवारों को रिहायत दी है और यह भी मानते हैं कि उन्हें भू राजस्व विभाग के दस्तावेजों का अधिक ज्ञान नहीं है तो वे किस आधार पर अतिक्रमणकारियों को रियायत दे रहे हैं और किस आधार पर अतिक्रमण हटा रहे हैं। तहसीलदार जुब्बल जो संबंधित क्षेत्र के भू राजस्व अधिकारी है यह मान रहे हैं कि उनसे एसआईटी किसी भी प्रकार की सलाह व सहयोग नहीं ले रही है तो फिर वन विभाग कैसे निशानदेही कर रहा है और किस आधार पर कार्रवाई कर रहा है। दोनों पीड़ित परिवारों को नौतोड़ तबादला नीति के तहत बंदोबस्त से पहले जमीन प्रदान की गई और कब्जा दिया गया तो इसमें दोषी कौन है। क्या किसी भी परिवार को भूमि हीन करना न्याय है।

    क्या कहते हैं पीड़ित

    इस मामले में पीड़ित ज्ञान चंद व साेहन लाल का कहना है कि उन्होंनें डीएफओ रोहड़ू सी बी तहसीलदार को अपने नौतोड़ व तबादले के इंतकाल सहित अन्य सभी दस्तावेज दिखाने के प्रयास किए लेकिन उन्होंने बंदूकधारी सुरक्षा कर्मी से दूर भेजने के निर्देश दिए। इतना ही नहीं उन्होंने हमारी किसी भी बात को सुनने से इंकार करते हुए जेल भिजवाने की धमकी भी दी। दोनों भाईयों का कहना है उनके पास अब आजीविका उपार्जन का कोई भी जरिया नहीं बचा है ऐसे में अगर हमारे परिवार के किसी भी सदस्य को कुछ होता है तो उसके जिम्मेवार डी एफ ओ रोहड़ू होंगे।

    मैं इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं करूंगी। जो भी जानकारी है। उच्च न्यायालय को ही अपनी रिर्पोट दूंगी। देव श्वेता, एडीसी व चीफ एसआईटी

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