32 हजार कंज्यूमर काे अाएगा 4 महीने के पानी का बिल एक साथ, फिर डाला एकमुश्त बोझ

Shimla News - शहर के 32 हजार उपभाेक्ताअाें काे अब एक साथ 4 माह का िबल चुकाने के लिए तैयार रहना हाेगा। एसजेपीएनएल जल्द ही शहर में...

Bhaskar News Network

Sep 11, 2019, 07:30 AM IST
Shimla News - 32 thousand consumer will get 4 month water bill together then put outright burden
शहर के 32 हजार उपभाेक्ताअाें काे अब एक साथ 4 माह का िबल चुकाने के लिए तैयार रहना हाेगा। एसजेपीएनएल जल्द ही शहर में अप्रैल से जुलाई का िबल जारी करेगी। यानि उपभाेक्ताअाें पर एक बार फिर भारी-भरकम िबलाें का बाेझ पड़ने वाला है। कंपनी ने दावा िकया था कि शहर में जल्द ही पुराने बैकअप काे क्लियर कर लाेगाें काे हर माह िबलाें की सुविधा ऑनलाइन मिलेगी। लेकिन अभी तक 31 मार्च तक के ही िबल लाेगाें काे मिले हैं अाैर अब एक साथ चार महीने का बिल एक साथ चुकाना हाेगा। यही नहीं इससे पहले भी मीटर रीडिंग पर कंपनी ने जाे िबल जारी िकए हैं वे भी हजाराें में अाए हैं, इन िबलाें काे देखकर लाेग हैरान हैं।

शिमला शहर में उपभाेक्ताअाें काे अब खपत के अनुसार ही पानी के िबल मिल रहे हैं। बीते साल अगस्त से 31 मार्च तक के िबल उपभाेक्ताअाें काे मिले हैं। हाउस में भी बार-बार यह मुद्दा उठता रहा है कि कंपनी हर माह लाेगाें काे िबल जारी करे लेकिन अभी तक यह व्यवस्था पटरी पर नहीं लाैटी है। इसके साथ ही ही हाउस में पार्षदाें की डिमांड पर यह भी तय िकया गया था कि कंपनी एक साथ अगर अाठ माह का बिल जारी करती है ताे उसमें हर माह में पानी की खपत अाैर िबल का रिकार्ड दर्शाया जाए लेकिन एेसा नहीं हाे रहा। इस कारण भी कुछ लाेगाें काे वार्ड में हजाराें रुपए के िबल अाए हैं जिन पर लाेगाें ने सवाल खड़े िकए हैं।

इसलिए हो रही दिक्कत





दाे साल से चली अा रही समस्या पिछले दो साल से कंपनी मीटर रीडिंग पर बिल देने की व्यवस्था में लगा रहा। इस योजना को शहर में लागू करने में ही लंबा समय गया और अब प्रशासन की लापरवाही आम जनता पर भारी पड़ने वाली है। लोग बार-बार बिल जारी करने की मांग करते रहे, ताकि उन पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। लेकिन अब एक साथ बिलों का बोझ पड़ने से लोगों को अपनी जेब ढीली करनी होगी। गौर रहे कि मार्च माह के बाद नगर निगम ने उपभोक्ताओं को नए पानी के बिल जारी नहीं किए हैं। मीटर रीडिंग में अब उपभोक्ताओं को पानी की खपत के अनुसार ही बिल देना होगा। यानि जितना पानी यूज करेंगे उसी के अनुसार बिल आएगा। इसके लिए निगम ने नई स्लैब दरें भी तय की हैं।

इधर, कूड़े की फीस बढ़ाेतरी का विराेध

शिमला| शहरवासियों से कूड़ा उठाने की फीस की दरों में की गई बढ़ाेतरी अाैर व्यवस्था को तुरंत वापस लेने की मांग की गई है। कम्यूनिस्ट पार्टी का कहना है कि जिस प्रकार से मनमाने तरीके से कूड़ा उठाने की फीस वसूली का तरीका भी लागू किया गया है उससे एेसा लग रहा है कि निगम केवल शहरवासियों से पैसा वसूलने तक ही सीमित है और उसको सेवाओं को बेहतर करने का कोई अनुभव नहीं है। कूड़ा उठाने की फीस केवल उन्हीं घरों से मान्य हो सकती है जहां से नगर निगम केवल कूड़ा उठा रहा है। जिन घरों से नगर निगम कूड़ा नहीं उठाता है वहां से कूड़ा उठाने की फीस लेना न्यायसंगत नही है क्योंकि शहरवासी पहले ही सेवाओ जिनमें बेहतर पेयजल, सफाई, स्ट्रीट लाइट, सड़कों, पार्कों आदि के लिए प्रॉपर्टी टैक्स दे रहे हैं। सीपीएम का कहना है कि इन जनविरोधी निर्णयों को तुरंत वापस लिया जाए।

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