अवैध बने फ्लैट के लिए 48 लाख, न बिजली, न था पानी का कनेक्शन

Shimla News - शिमला में राजदीप एंड कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। रियल एस्टेट कंपनी ने एक अवैध फ्लैट 48 लाख...

Jan 16, 2020, 07:21 AM IST
Shimla News - 48 lakhs for illegal flats no electricity no water connection
शिमला में राजदीप एंड कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। रियल एस्टेट कंपनी ने एक अवैध फ्लैट 48 लाख में बेचा। इस फ्लैट में बिजली और पानी का कनेक्शन नहीं था और एग्रीमेंट में इन सुविधाओं को देने की बात कही गई थी। खरीददार ने जांच की तो पता चला कि कंपनी ने डेविएशन कर निर्माण किया है। इसके चलते अब पीड़ित ने इस कंपनी के खिलाफ सदर थाना में शिकायत दी है।

संजौली के लोअर सिमिट्री निवासी रविकांत ने पुलिस थाना सदर में शिकायत दी है। इस शिकायत में रविकांत ने कहा है कि कंपनी ने भराड़ी में बिक्री के लिए फ्लैट बनाए हैं। रविकांत के अनुसार उन्होंने टूबीएचके खरीदने के लिए कंपनी के साथ एग्रीमेंट किया। फ्लैट का सौदा 36 लाख रुपए में तय किया गया था।

पीड़ित के अनुसार कंपनी ने एग्रीमेंट में वायदा किया था कि वह फ्लैट के लिए बिजली व पानी कनेक्शन देेगी। इसके बाद कंपनी ने फ्लैट के लिए एनओसी दिलाने और अन्य सुविधाएं दिलाने के नाम पर और भी पैसे लिए। पीडित के मुताबिक करीब 48 लाख रुपए वह कंपनी को दे चुके हैं, लेकिन फ्लैट में बिजली व पानी की सुविधाएं नहीं दी गईं।

शिकायत मिलने के बाद अब पुलिस ने कंपनी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 के तहत सदर थाना में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

रोहड़ू का एड्रेस बताकर पंजाब की राजदीप एंड कंपनी ने किया फ्रॉड

कंपनी के खिलाफ सदर थाना में फ्रॉड का मामला दर्ज

मैप में किया गया भारी डेविएशन: शिकायत में यह भी कहा गया है कि कंपनी का जो एड्रेस दिया है वो रोहड़ू का है जबकि कंपनी मूलत: पंजाब की है। कंपनी की ओर से उनके फ्लैट में बिजली व पानी का कनेक्शन नहीं दिलाने पर खुद अपने स्तर पर जांच की तो पता चला कि नक्शे के अनुसार निर्माण ही नहीं किया गया। कंपनी ने जो नक्शा पास करवाया था, उसमें भारी बदलाव किया है। कंपनी ने जो प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाई, उसमें कालानी में एक फ्लोर में थ्री बीएचके के फ्लैट का नक्शा दर्शाया गया है। लेकिन कंपनी ने बाद में थ्री बीएचके की बजाए, वन बीएचके और टू बीएचके के फ्लैट बना डाले। इस तरह नक्शे से हटकर निर्माण कार्य करने के कारण संबंधित आथोरिटी और नगर निगम फ्लैट की कंपलिशन सर्टिफिकेट नहीं दे रहे। इस कारण फ्लैट मालिक को न तो पानी और न ही बिजली मिल रही है।

नक्शे के अनुसार निर्माण नहीं तो अवैध:शिमला में टीसीपी एक्ट लागू किया गया है। इसके तहत सभी बिल्डरों को अपने प्रोजेक्ट रिपोर्ट के मुताबिक निर्माण कार्य करने हैं। यही नहीं आम लोगों को भी घर का निर्माण कार्य टीसीपी एक्ट के मुताबिक ही करना जरूरी है। ऐसा न होने पर इस तरह के भवनों को क्लीयरेंस नहीं मिलती और वे अवैध माने जाते हैं। ऐसे भवनों को कोई भी सुविधाएं नहीं मिलती। हालांकि हल्का डेविएशन होने पर भवनों को कमर्शियल रेट पर पानी व बिजली मिलती है। लेकिन रियल एस्टेट को ऐसी छूट नहीं है। यही वजह है कि नगर निगम ने भी कंपनी की फाइल पर आपत्तियां लगा दी हैं और प्लेट्स के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने से साफ इंकार कर दिया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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