राज्य में लोक अदालतों के माध्यम से 5733 केसों का किया निपटारा
लोक अदालतों में 17,16,06,987 रुपए का मुआवजा भी पक्षकारों को दिलवाया गया
आपसी विवादों के निपटारे के लिए शनिवार को प्रदेश में लोक अदालतों का आयोजन किया गया। हाईकोर्ट सहित अन्य अधीनस्थ न्यायालय में हुई लोक अदालतों के माध्यम से 5733 मामलों का निपटारा किया गया। इसके तहत 17,16,06,987 रुपए का मुआवजा भी पक्षकारों को दिलाया गया।
राज्य में लंबित मामलों की संख्या को कम करने और पक्षकारों के बीच समझौते के आधार पर उन्हें हल करने के लिए पूर्व-मुकद्दमेबाजी और लंबित मामलों के लिए पूरे प्रदेश में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। हाईकोर्ट सहित राज्य के सभी न्यायालयों में हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक एवं मुख्य न्यायधीश एल नारायण स्वामी एवं कार्यकारी अध्यक्ष, न्यायधीश तरलोक सिंह चौैहान के मार्गदर्शन में इन लोक अदालतों का आयोजन किया
गया। शनिवार को आयोजित की गई राष्ट्रीय लोक अदालत मेें कुल 12169 मामलों को आपसी सुलह समझौते के लिए लिया गया, जिनमें 6884 पूर्व मुकद्दमेबाजी व 5285 लंबित मामले थे।
इन्हें निपटान के लिए विभिन्न बेंचों में रखा गया। जिनमें से 5733 मामले (2906 पूर्व मुकद्दमेबाजी व 2827 लंबित मामलों) का निपटारा आपसी सुलह व समझौते से किया गया। इसके तहत 17,16,06,987 रुपये का मुआवजा भी पक्षकारों को राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से दिलाया गया। उल्लेखनीय है कि लोक अदालतें विवादों के निपटारे का वैकल्पिक माध्यम है।
इसे बोलचाल की भाषा में लोगों की अदालत भी कहते हैं। लोक अदालतें ऐसे मंच या फोरम हैं, जहां न्यायालय में लंबित या वाद पूर्ण मुकद्दमे,जो अदालत में दाखिल नहीं किए गए हों, का सौहार्द्र पूर्ण तरीके से निपटारा किया जाता है।
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव (जिला एवं सत्र न्यायधीश) प्रेमपाल रांटा ने कहा है कि ऐसी लोक अदालतें भविष्य में भी आयोजित किया जाएगा ताकि लोगों को सुलभ व त्वरित न्याय मिल सके। और लोगों का किमती समय भी इससे बजाया जा सकें।