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150 साल बाद कल 53,816 किमी पास, 14 फीसदी बड़ा और लाल दिखेगा चांद

घटना के दौरान हम बिना किसी डर के एक साथ सुपर मून, ब्लड मून और सुपर मून देख सकते हैं।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 30, 2018, 06:34 AM IST

  • 150 साल बाद कल 53,816 किमी पास, 14 फीसदी बड़ा और लाल दिखेगा चांद

    शिमला.अगर आप आसमान में होने वाली खगोलीय घटनाओं को देखने या अच्छी तस्वीरों को खींचने के शौकीन हैं तो कल शाम यानी 31 दिसंबर की शाम अपने मोबाइल या घड़ी पर 6 बजकर 20 मिनट का अलार्म सेट कर दीजिए क्योंकि 150 साल बाद लोगों को चंद्रग्रहण यानी लुनर एक्लिप्स के साथ सुपर ब्लड मून देखने का मौका मिलने जा रहा है। बुधवार शाम होने वाली इस खगोलीय घटना के दौरान हम बिना किसी डर के एक साथ सुपर मून, ब्लड मून और सुपर मून देख सकते हैं।

    आम तौर पर चंद्र ग्रहण के वक्त पृथ्वी की छाया पड़ने से चांद काला दिखाई देता है कि इस सुपर ब्लड मून के दौरान चंद सेकंड के लिए वो वक्त भी आएगा जब चंद्रमा पूरी तरह लाल दिखाई देगा। खगोल शास्त्रियों की मानें तो सुपर ब्लड मून डेढ़ सौ साल बाद देखने को मिलेगा।

    - इसलिए है ब्लू मून-क्योंकि इस बार एक ही महीने में दो बार फुल मून होगा। एक जनवरी को फुल मून था।
    - इसलिए है ब्लड मून-क्योंकि मूनराइज यानी चांद उदय के साथ ही लाल रंग के धब्बे के साथ दिखेगा जो बाद में बढ़ता जाएगा।
    - इसलिए है सुपर मून- क्योंकि इस दिन चांद आम दिनों की बजाय धरती के सबसे नजदीक होगा।

    यह तीन कारण जो इस चांद का खास बनाएंगे, 6 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगी खगोलीय घटना, करीब सवा घंटे तक धरती के करीब आएगा
    ग्रहण से कोई डर नहीं, बस ठंड से बचें डॉ. संदीप सहजपाल कहते हैं कि इस खगोलीय घटना से डर या नुकसान का कोई जोखिम नहीं है। लेकिन ये खगोलीय घटना सूरज ढलने के बाद होने वाली है तो इस घटना को देखने के शौकीन इतनी देर तक ठंड से बचने का इंतजाम जरूर करें। इन दिनों कम से कम उत्तर भारत में सूरज ढलने के बाद ठंड बढ़ रही है।

    30 फीसदी ज्यादा होगी चमक बुधवार शाम 6 बजकर 20 मिनट से लगभग 7.45 बजे के बीच इस बार चांद बाकी लगने वाले ग्रहण से बिलकुल अलग दिखने जा रहा है। सुपर ब्लड मून की खूबसूरती के बारे में पंजाब यूनिवर्सिटी के फिजिक्स डिपार्टमेंट के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. संदीप सहजपाल बताते हैं कि इस दिन चंद्रमा के उदय के साथ ही सुपर ब्लड मून शुरू हो जाएगा और चांद लाल दिखना शुरू होगा। सवा घंटे से कुछ ज्यादा वक्त के लिए चांद धरती के ज्यादा नजदीक आने की वजह से आम दिनों की बजाय 14 फीसदी ज्यादा बड़ा दिखेगा। इसी वजह से चांद की चमक भी 30 फीसदी ज्यादा होगी।

    बेदाग होगा आम तौर पर माना जाता है कि चंद्रग्रहण के दौरान चांद पर पड़ने वाली पृथ्वी की छाया की वजह से चांद की खूबसूरती पर दाग लग जाता है। लेकिन इस बार चांद पर काला नहीं बल्कि सुर्ख लाल रंग देखने का मौका मिलेगा। क्योंकि इस बार धरती की नहीं बल्कि सूरज की रोशनी चांद पर पड़ेगा। डॉ. सहजपाल बताते हैं कि चंद्रग्रहण पर पृथ्वी की परछाई चांद पर पड़ने से काला धब्बा नजर आता है लेकिन इस बार सूरज की रोशनी अर्थ यानी धरती के एटमोस्फेअर पर पहुंचेगी तो चांद लाल दिखेगा। उगते और ढलते सूरत की तरह इस बार चांद भी लाल दिखेगा।

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