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24 साल बाद प्रदेश में माकपा की फिर एंट्री,

bhaskar news | Last Modified - Dec 19, 2017, 08:40 AM IST

इस बार बड़े नेताओं ने नहीं बल्कि अप्रत्याशित रिजल्ट देकर युवाओं ने चौंकाया।
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    विजयी कैंडिडेट।

    शिमला. सीपीआईएम ने 24 साल बाद विधानसभा में एंट्री की है। पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने ठियोग से चुनाव जीता है। उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी राकेश वर्मा को हराया। यह दूसरा मौका है जब राकेश सिंघा ने सीपीआईएम को जीत दिलाई। 1993 में पहली बार भी पार्टी एक सीट जीती थी। उस समय सिंघा ने शिमला शहर से मैदान में उतरकर चुनाव जीता था।

    जनहित के मुद्दें उठाने का मिला फायदा
    सिंघा की जीत में जनहित मुद्दे मुख्य वजह बने। हाईकोर्ट के ऑर्डर के बाद जब सेब के पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाई गई तो सीपीआईएम सबसे पहले विरोध में उतरी। ठियोग समेत अन्य जगहों पर सिंघा ने आंदोलन का नेतृत्व किया। कड़ी मेहनत से तैयार किए गए सेब के पौधों को बचाने के लिए सिंघा ने हर स्तर पर लड़ाई लड़ी। इसके चलते उन्हें आरक्षित वर्ग का लाभ भी मिला। ठियोग विस क्षेत्र में इस वर्ग के 15 हजार से अधिक वोटर्स हैं। इसके अलावा गुड़िया गैंगरेप एवं मर्डर केस के गुनहगारों को पकड़वाने के लिए भी सिंघा के नेतृत्व में माकपा ने ठियोग में लंबा संघर्ष किया।

    15 विस क्षेत्रों में मिली हार
    सीपीआईएम को पंद्रह सीटों पर हार का सामना करना पड़ा पार्टी ने रामपुर, आनी, जोगेंद्रनगर, शिमला शहरी आदि हलकों में भी प्रत्याशी उतारे थे। सिंघा के अलावा कोई प्रत्याशी नहीं जीत सका। इन पंद्रह जगहों पर सीपीएमआई के प्रत्याशी समर्थन जुटाने में पूरी तरह से असफल रहे।

    बसपा,स्वाभिमान पार्टी का खाता भी नहीं खुला
    चुनावमें बसपा और स्वाभिमान पार्टी ने भी कई विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन इनका खाता भी नहीं खुला। स्थिति ये रही कि कई जगहों पर इन पार्टियों के नेताओं को समर्थन देने के बजाय लोगों ने नोटा का बटन दबाया।

    राकेश सिंघा ने भाजपा के राकेश वर्मा को हराया।
    1993 के बाद प्रदेश में हुए चार विधानसभा चुनावों में सीपीआईएम जीत के लिए तरसती रही। पूर्व विधायक के 24 साल बाद फिर चुनाव जीत जाने से प्रदेशभर के माकपा नेताओं में खुशी का माहौल है। ठियोग में कार्यकर्ताओं ने विजय जश्न बनाया।

    इस बार दिग्गजों ने नहीं, नए चेहरों ने लीडकर रिकॉर्ड बनाया है। नाचन से भाजपा के युवा नेता विनोद कुमार ने हिमाचल के विधानसभा चुनावों में सबसे बड़ी जीत हासिल की है। विनोद ने कांग्रेस के प्रत्याशी को 15 हजार 896 वोटों से हराया। 2012 के बाद विनोद कुमार दूसरी बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। इस चुनाव में नए चेहरों या अप्रत्याशित तौर पर लीड का रिकार्ड दर्ज हुआ है।

    2017 के विधानसभा चुनावों में अप्रत्याशित लीड रही। रोहडू हलके से पिछली बार कांग्रेस के विधायक मोहन लाल ब्राक्टा 29 हजार मतों से जीते थे। सीएम वीरभद्र सिंह ने शिमला ग्रामीण से 20 हजार मतों से जीत हासिल की थी। इस बार बड़े नेता आैर पारंपरिक सीटों से ज्यादा वोटों से जीत हासिल नहीं की है बल्कि अप्रत्याशित रिजल्ट देकर युवा आैर मंडी भाजपा के नेताआें ने सभी को चौका दिया है। इन्होंने 15 हजार 896 यानि लगभग सोलह हजार मतों से जीत हासिल की है। बैजनाथ से भाजपा के प्रत्याशी मुलखराज प्रेमी पहली बार विधानसभा पहुंचेंगे, लेकिन इनकी जीत का अंतर भी 12 हजार के आंकड़े को पार कर गया। इन्होंने कांग्रेस विधायक किशोरी लाल को 12 हजार 669 मतों से हराया। इसी तरह जयसिंहपुर से रविंद्र कुमार ने 10 हजार 710 मतों से जीत हासिल की है। पावंटा से सुखराम ने भी 12 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की है।

    हालांकि पिछली बार इन्हें निर्दलीय प्रत्याशी से ही हार का सामना करना पड़ा था। उस समय के निर्दलीय प्रत्याशी पर कांग्रेस ने दाव खेला था, लेकिन यह रणनीति कांग्रेस के करगर साबित नहीं हो सकी। कांगड़ा के सुलह के विपीन परमार पिछली बार कांग्रेस के जगजीवन पाल से हार गए थे। इस बार सुलह से भाजपा के विपिन परमार ने 10 हजार 291 मतों से जीत हासिल की है। जोगिंद्र नगर से निर्दलीय प्रत्याशी प्रकाश राणा ने भाजपा के गुलाब सिंह ठाकुर को 9200 वोटों से हराया।

    ये जीतें बड़े अंतर से
    नाचन से विनोद 15 हजार 896, बैजनाथ से मुल्खराज 12 हजार 669, बल्ह से इंद्र सिंह 12 हजार 811, जय राम ठाकुर 11 हजार 254, जयसिंह पुर से रविंद्र कुमार 10 हजार 710, सुलह से विपिन परमार 10 हजार 291, पावंटा से सुखराम की 12 हजार 619 और महेंद्र सिंह ठाकुर 11 हजार 964 वोटों से जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं।

    रोहडू- रामपुर में 4 हजार से जीती कांग्रेस
    कांग्रेस को रामपुर आैर रोहडू से 4 हजार के अंतर से जीत हासिल की है। हालांकि पहले यहां से विधानसबा चुनाीवों में कांग्रेस को हमेशा ही 20 हजार से ज्यादा के अंतर से जीत मिलती रही है। यहां से कांग्रेस को इस बार भी बड़े अंतर से जीत की उम्मीद थी, लेकिन अंतर काफी कम हो गया। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की जीत का अंतर भी छह हजार से कुछ अधिक रहा। इनसे भी कांग्रेस को बड़े अंतर से जीत की उम्मीद थी।

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Web Title: 24 Years Later The CPIs Entry In The State Again
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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