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चुनाव के बाद कांग्रेस की पहली बैठक आज, हार की समीक्षा अौर नेता प्रतिपक्ष का होगा चयन

पार्टी की बैठक में किसने किसके खिलाफ काम किया है। इस पर हंगामा हो सकता है।

Danik Bhaskar | Dec 22, 2017, 07:49 AM IST

शिमला. विधानसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस शुक्रवार को मंथन करेगी। इसमें हार के कारणों की समीक्षा की जानी है। पार्टी के हिमाचल प्रभारी सुशील कुमार शिंदे की मौजूदगी में बैठक होनी है। पहली बैठक में हिमाचल के चुनावों में कांग्रेस के सभी जीते आैर हारे हुए प्रत्याशी हिस्सा लेंगे। बैठक में सभी को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। पार्टी की बैठक में किसने किसके खिलाफ काम किया है। इस पर हंगामा हो सकता है।

इतना ही नहीं बैठक में पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ जिन बड़े नेताआें ने काम किया या अन्य किसी प्रत्याशी को प्रत्यक्ष या परोक्ष रुप से समर्थन किया है तो यह मुद्दा उठाया जा सकता है। शिमला, ठियोग से लेकर कुटलैहड़ तक पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए जा सकते हैं।

पार्टी का कांगड़ा का किला भितरघात के कारण ही ढहा है, यह बात जगजाहिर है कि पार्टी के बड़े नेताआें ने अपनी जीत के साथ दूसरे के निर्वाचन हलके का पूरा ध्यान रखा है। इसलिए सभी को कांगड़ा में खामियाजा भुगतना पड़ा है। आलम यह है कि राज्य में 2012 के विस चुनावों में कांग्रेस के पास 10 सीटें थी, वह इस बार तीन सीटें ही उनके खाते में आई है। भाजपा को कांगड़ा जिले से 11 सीटें जीतने में सफलता मिली है। एक सीट निर्दलीय प्रत्याशी के खाते में गई है। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष विप्लव ठाकुर को भी हार का सामना करना पड़ा। वह मतगणना में तीसरे नंबर पर रही। अपनी सीट से उनका वोट बैंक आठ हजार पर ही सिमट गया।

कांगड़ा के नेता चंद्र कुमार, जीएस बाली, सुधीर शर्मा जैसे नेताआें को कांगड़ा में हार का सामना करना पड़ा। इस बैठक में कांगड़ा के अलावा मंडी के दिग्गज नेता कौल सिंह ठाकुर भी बड़े नेताआें के खिलाफ मोर्चा खोल सकते हैं। वह पहले की खुले रुप से कह चुके हैं कि उन्हें हराने के लिए बागी नेता को खड़ा किया गया। इस मसले पर भी शुक्रवार को होने वाली बैठक में हंगामा हो सकता है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता नरेश चौहान ने बताया कि सभी प्रत्याशियों से बैठक तीन बजे आैर विधायक दल छह बजे की जानी है

वीरभद्र सिंह का नाम तय
पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह का नाम नेता प्रतिपक्ष के लिए लगभग तय है, लेकिन वह सहमति नहीं देते हैं तो कांग्रेस में जीते हुए 21 विधायकों में इसके लिए जंग होगी। पूर्व मंत्री आशा कुुमारी, राम लाल ठाकुर, सुजान सिंह पठानिया इस दौड़ में होंगे। वहीं सुखविंद्र सिंह सुक्खू से लेकर अन्य युवा विधायक भी लाबिंग कर सकते हैं। पार्टी के काफी कदावार नेता चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे हैं, ऐसी स्थिति में नेता प्रतिपक्ष के लिए पार्टी के भीतर की गुटबाजी साफ देखने को मिल सकती है।


शुक्रवार शाम को होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक में नेता प्रतिपक्ष चुना जाएगा। पार्टी प्रभारी आैर अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू की मौजूदगी में होने वाली बैठक में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के आने पर संशय है लेकिन पार्टी में इनके नाम पर सहमति बन सकती है। इस बैठक में सभी विधायक और जिलाध्यक्षों के भी शािमल रहने की उम्मीद है।