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हराने में कई कांग्रेसियों ने की पार्टी से गद्दारी, ये रहा कारण

जनता पार्टी और 2003 2007 में लगातार राकेश वर्मा बतौर आजाद प्रत्याशी ठियोग से विजयी रहे।

bhaskar news | Last Modified - Dec 20, 2017, 07:41 AM IST

  • हराने में कई कांग्रेसियों ने की पार्टी से गद्दारी, ये रहा कारण

    ठियोग. ठियोग विस क्षेत्र में इस बार के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी दीपक राठौर को अपनों ने ही कहीं का नहीं छोड़ा है। ठियोग को हमेशा से कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है। 1974 से लेकर ठियोग विस क्षेत्र से केवल चार बार गैर कांग्रेसी विधायक चुना गया है। 1977 में स्वर्गीय मेहरसिंह, 1993 में राकेश वर्मा जनता पार्टी और 2003 2007 में लगातार राकेश वर्मा बतौर आजाद प्रत्याशी ठियोग से विजयी रहे। बाकि सभी विस चुनावों में स्टोक्स यहां से जीतती रहीं।

    विजयपालखाची का नाम आगे : इसबीच स्टोक्स वीरभद्र सिंह ने ठियोग से कांग्रेस टिकट विजयपाल खाची को देने की सिफारिश की लेकिन राहुल गांधी के करीबी दीपक राठौर दिल्ली से टिकट हासिल करने में सफल रहे और उन्होंने नामांकन भरने का भी निर्णय कर लिया जबकि स्टोक्स वीरभद्र सिंह इससे खफा हो गए और स्टोक्स ने चुनाव में उतरने की घोषणा कर दी। लेकिन अंतिम दिन जब वे नामांकन भरने ठियोग पहुंची तो दीपक पहले की नामांकन भर चुके थे। स्टोक्स का भरा नामांकन रद्द हो गया। वे इसके विरूद्ध उच्च न्यायलय भी गईं जहां से भी उन्हें राहत नहीं मिलीं।

    14000हजार वोटों की बढ़त कांग्रेसके इस ड्रामे का असर माकपा के लिए शुभ रहा। राकेश सिंघा को पिछले विस चुनावों की अपेक्षा 14000 से अधिक वोट मिले। उन्होंने अपने गृह क्षेत्र कुमारसैन कोटगढ़ से पिछली बार की अपेक्षा 6हजार से अधिक वोट और ठियोग क्षेत्र से 8 हजार से अधिक वोट अधिक मिल गए। पिछले चुनावों में 10 हजार तीन सौ वोट लेने वाले सिंघा इस बार 24771 पर जा पहुंचे।

    राकेश वर्मा बने शिकार
    पिछले 24 सालों से ठियोग की राजनीति में डटे कांग्रेस के लिए चुनौती बने राकेश वर्मा इस बार विस चुनावों में बुरी तरह घिर गए। जिला संगठन से अनबन के अलावा पिछले चुनावों की तरह क्षेत्रवाद का भी उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ा। कांग्रेस प्रत्याशी दीपक की जमानत जब्त होने के कारण भी राकेश वर्मा को हार देखनी पड़ी। पिछली बार ठियोग में स्टोक्स को अपने क्षेत्र से भारी बढ़त मिली थी। इस बार राकेश वर्मा ने हार के बावजूद अपनी हार का अंतर कम किया बावजूद इसके कि कांग्रेस का भारी वोट सिंघा को चला गया। पिछली बार स्टोक्स ने साढ़े 21 हजार वोट हासिल किए थे जो इस बार दीपक के लिए घटकर 9101 रह गए। वैसे ठियोग में दीपक के साथ हुई साजिश का चिट्ठा बनाने में दीपक खेमा मंडल कांग्रेस के साथ मिलकर जुट गया है।

    नेताओं ने पहले ही घोषित की हार
    मतदानके दिन ही वीरभद्र सिंह ने ठियोग में कांग्रेस की हार की भविष्यवाणी कर दी थी। इससे ही ठियोग में हार जीत को लेकर साजिश बुनी जा चुकी थी। ठियोग सीट से इस बार चुनाव लड़ने का ऐलान कर स्टोक्स ने वीरभद्र सिंह को सीट छोड़ी जिसे स्वीकार कर वीरभद्र सिंह ने कुबूल कर दिया और नामांकन की तारीख भी घोषित कर दी। लेकिन ठियोग से वीरभद्र सिंह का कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध शुरू कर दिया। दूसरा फैक्टर ठियोग में जुलाई माह से सरगर्म गुड़िया मुद्दा भी रहा। वीरभद्र सिंह ने अर्की जाने का निर्णय कर दिया। उनके ठियोग छोड़ने के बाद दोबार पहले ठियोग से चुनाव लड़ चुके राजेन्द्र वर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष केहरसिंह खाची, महेन्द्र झराईक, कुलदीप राठौर, विजयपाल खाची और राहुल गांधी से जुड़े दीपक राठौर, आशा कंवर, जोगेन्द्र ठाकुर सहित कई दावेदार सामने गए।

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Web Title: Congressmen Have Betrayed The Party
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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