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वीरभद्र सरकार ने सीएस के साइन के बगैर ही की अध्यक्ष की तैनाती, ये था कारण

अध्यक्ष पद की तैनाती के लिए फाइल पर मुख्य सचिव के भी हस्ताक्षर नहीं है।

Dainik Bhaskar

Dec 30, 2017, 07:48 AM IST
Deployment of president without sine

शिमला. पूर्व कांग्रेस सरकार का एक बड़ा कारनामा सामने आया है। पूर्व सरकार के कार्यकाल के अंतिम दिनों मेें फूड कमीशन में अध्यक्ष पद पर पूर्व आईएएस की तैनाती खुलेरूप से नियमों की अनदेखी कर की। इस पद को भरने के लिए तत्कालीन सरकार ने तो विज्ञापन जारी किया ही किसी का आवेदन लिया। इतना करने के बावजूद मुख्य सचिव के हस्ताक्षर के बगैर ही तैनाती भी कर दी। सूत्रों की माने तो अध्यक्ष पद की तैनाती के लिए फाइल पर मुख्य सचिव के भी हस्ताक्षर नहीं है।

इससे साफ आशंका है कि नियमों की अनदेखी कर पूर्व सरकार ने चेहते अधिकारी को लाभ देने के लिए नियमों को दरकिनार किया है। सेवानिवत्त आईएएस अधिकारी ऐजेवी प्रसाद को फूड कमीशन का अध्यक्ष नियुक्त किया। हालांकि अधिकारी इसे अस्थाई तौर पर नियुक्ति बता रहे है। अधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार और सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को प्रदेश में शीघ्र फूड कमीशन का गठन किए जाने को कहा गया था। खाद्य आपूर्ति विभाग ने मामला सरकार के समक्ष रखा। इस पर सरकार ने पूर्व आईएएस अधिकारी एजेवी प्रसाद को कमीशन का अध्यक्ष बनाए जाने को कहा। सरकारने आनन फानन में कर दिया था फूड कमीशन का गठन : केंद्रसरकार और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के बाद सरकार ने आनन फानन में फूड कमीशन का गठन कर दिया। इसका तो कोई दफ्तर है और हीं कमीशन में किसी भी स्टाफ की नियुक्ति की जा सकी है। सरकार ने सिर्फ अध्यक्ष और गैर सरकारी दो सदस्यों की नियुक्ति करना ही अपनी प्राथमिकता समझा। चुनाव आचार संहिता लगने से पहले सरकार ने कमीशन का गठन किया और सेवानिवृत आईएएस अधिकारियों को कमीशन का नया अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया। कमीशन में काम करने वाले स्टाफ नियुक्त नहीं किए जा सके।

प्रदेश में जल्दी से तैनात करना था फूड कमीशन
केंद्र सरकार और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार प्रदेश में जल्दी से फूड कमीशन का गठन किया जाना था। पूर्व सरकार ने जिस अधिकारी को अध्यक्ष नियुक्त किया है उनकी अस्थाई तौर पर तैनाती की गई है। अभी उन्हें कार्यालय भी आबंटित नहीं किया गया है। एजेवी प्रसाद को कमीशन का अध्यक्ष बनाकर रखा जाना है या नहीं, इस बारे में फिर से सरकार से विचार विमर्श किया जाएगा। तरुणकपूर, अतिरिक्त मुख्य सचिव खाद्य एवं आपूर्ति विभाग

कांग्रेस के समय में तैनात गैर सरकारी सदस्य हटाए
कमीशनमें तैनात किए गए दो नौ ऑफिशल सदस्यों को सरकार ने पद से हटा दिया है। यह सदस्य पूर्व सरकार ने अपनी मर्जी से तैनात किए थे। प्रदेश में नई सरकार के बनने के बाद इन सदस्यों को हटाया है। अब राज्य सरकार अपने स्तर पर फूड कमीशन में नए सदस्याें की नियुक्ति करेगी। इसकी तलाश जारी है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार प्रदेश में जल्दी से फूड कमीशन का गठन किया जाना था।

केंद्र ने इसलिए गठित किया था कमीशन
प्रदेश में पीडीएस योजना के तहत दिए जाने वाले राशन की गुणवत्ता को बनाए रखने और राशन के आंबटन में पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने हर राज्यों में अलग से फूड कमीशन का गठन किया जाना अनिवार्य किया है। इस कमीशन में लोग राशन संबंधी किसी भी तरह की शिकयात कर सकते है। फिर चाहे उन्हें राशन मिल रहा हो, राशन का देरी से मिलना, क्वालिटी राशन का मिलना आदि कई तरह की शिकायतें वह आयोग के समक्ष उठा सकते है।

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