--Advertisement--

दादा-पोता 38 साल से काट रहे थे ऑफिस के चक्कर, नहीं लिया एक्शन तो टूटा आशियाना

हिमाल्वी कॉटेज पर गिरा पेड़ अधिकारियों के निकम्मेपन का गवाह बना।

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 08:11 AM IST
स्ट्राबरी में मकान की छत पर पेड़ गिरने से काफी नुकसान हुआ है। स्ट्राबरी में मकान की छत पर पेड़ गिरने से काफी नुकसान हुआ है।

शिमला. सरकारी ऑफिसों में बाबुओं से लेकर अफसरों तक पब्लिक की फरियाद को दशकों तक अनसुना करके लोगों के जान-माल को जोखिम में डालने की एक और मिसाल प्रदेश की राजधानी के स्ट्रॉबरी हिल एरिया में सामने आई है। ये था मामला...

- इस मकान पर जोखिम बने पेड़ को हटाने के लिए सबसे पहले 1980 में विशाल सिंह के दादा ने एप्लीकेशन दी थी लेकिन कुछ नहीं हुआ।

- फिर उनके बेटे बीआर हिमाल्वी इस पेड़ को कटवाने के लिए कई एप्लीकेशन लिखते रहे।

- विशाल सिंह पिछले 10 साल से इस पेड़ को कटवाने के लिए लगातार नगर निगम को पत्र लिखते रहे।

- इस मकान में रहने वाले किराएदारों ने भी कई बार पेड़ काटने के लिए पत्र लिखे लेकिन पेड़ नहीं काटा गया।


24 की रात को आए तूफान में गिरा था पेड़
- अब 24 फरवरी का रात आए तूफान में ये पेड़ खुद ही इस तीन मंजिला हिमाल्वी कॉटेज पर गिर गया। खैरियत ये रही कि उस रात इस मकान में काेई नहीं था।

- अब पेड़ खुद गिर चुका है लेकिन मकान पर गिरे इस पेड़ को हटाने कोई नहीं आ रहा। भार ज्यादा होने से मकान की दीवाराें में भी दरारें आ गई हैं। इस पेड़ से मकान को काफी नुकसान हुआ।

- अब मकान पर गिरे पेड़ को हटाने की न इजाजत मिल रही है और न ही पेड़ काटने कोई आया। बारिश का पानी घर में आ रहा है लेकिन वन विभाग के पास पेड़ हटाने का वक्त नहीं।

1980 में गिरी थी पेड़ की चोटी

- हिमाल्वी कॉटेज के मालिक विशाल सिंह ने बताया कि यह पेड़ बहुत पहले से ही भवन के ऊपर खतरा बना हुआ था।

- इसकी चोटी 1980 में भवन के ऊपर टूटी थी और उस दौरान भी दादा ने इस खतरनाक पेड़ को हटाने के लिए कमेटी से अनुमति मांगी थी। फिर उनके पिता बीआर हिमाल्वी निगम प्रशासन से लगातार एप्लिकेशन देकर पेड़ को काटने की अनुमति मांगते रहे।

- लेकिन प्रशासन की ओर से इस पेड़ को देखने के लिए ट्री कमेटी की ओर से विजिट भी नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि हाल ही में नवंबर में फिर से निगम को रिमांइडर दिया गया था।

किराएदारों ने भी की थी काटने की गुहार

- भवन में रहने वाले पांच किराएदारों ने निगम प्रशासन को 2008 में पत्र लिखकर पेड़ की स्थिति के बारे में जानकारी दी थी।

- किराएदार केसर सिंह, सुरेंद्र लाल, प्रेमलाल, योगेंद्र और मदनलाल ने निगम प्रशासन को इस पेड़ के खतरे के बारे में बताया था।

- वहीं निगम प्रशासन को 6 नवंबर 2017 को दी गई एप्लीकेशन को मेयर कार्यालय से 16 नवंबर को डीएफओ के पास भेजा गया था।

दीवारों पर दरारें आई हैं और सीलिंग टूटी है। दीवारों पर दरारें आई हैं और सीलिंग टूटी है।