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नए साल में अब कर्मचारी चयन आयोग में भी होगी ओवर-हाॅलिंग, एेज लिमिट 65 की थी

वजह यह है कि इस आयोग में चेयरमैन के अलावा चार और सदस्य हैं।

bhaskar news | Last Modified - Dec 29, 2017, 07:39 AM IST

  • नए साल में अब कर्मचारी चयन आयोग में भी होगी ओवर-हाॅलिंग, एेज लिमिट 65 की थी

    हमीरपुर.हिमाचल कर्मचारी चयन आयोग की भी अब सत्ता परिवर्तन के बाद ओवर-हाॅलिंग तय है। पिछले कई महीनों से इसकी उम्मीद भी जताई जा रही थी क्योंकि विधानसभा चुनाव नजदीक थे। अब सत्ता परिवर्तन हो चुका है। आयोग की मौजूदा हालत में नए सदस्यों के आने का प्रोसेस चेयरमैन के जाने और नयों के आने के बाद शुरू हो जाएगा। नए साल में यह प्रक्रिया शीघ्र ही शुरू हो सकेगी। वजह यह है कि इस आयोग में चेयरमैन के अलावा चार और सदस्य हैं।

    जिनके पास अब इंटरव्यू का काम नहीं रहा है। ऐसे में कितने सदस्यों का जाना तय होगा, इसका पता तो नव गठित सरकार के इस आयोग को लेकर लिए जाने बाले फैसलों की बैठक के बाद ही चल सकेगा लेकिन इतना तय ही है कि आयोग में इस समय जितने सदस्य हैं। इतने सदस्यों की जरूरत अब नहीं रही है।

    गौरतलब है कि सत्ता परिवर्तन के साथ सदस्यों के आने-जाने का सिलसिला भी बराबर बनता है। चेयरमैन भी बदले जाते हैं। आयोग में इस समय एमएल झारटा अध्यक्ष हैं। जबकि सतीश कुमार, कमल शर्मा, डॉ. डीएस गुरंग और एसआर नेगी फिलहाल 4 सदस्य हैं। सदस्यों के दो पद पूर्व सरकार के समय अतिरिक्त रूप में भरे गए थे। उस समय तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की इस आयोग के हवाले जो भर्ती प्रक्रिया थी। उसमें इंटरव्यू प्रोसेस इन्हीं के हवाले रहता था, मगर अब क्योंकि इंटरव्यू प्रोसेस खत्म हो चुका है। ऐसे में तमाम सदस्यों का बना रहना असरदार नहीं होगा। इसीलिए कम से कम 3 सदस्यों का जाना तय माना जा रहा है। कौन-कौन सदस्य जाएंगे? या फिर सभी जाएंगे और उसके बाद मौजूदा नई सरकार कब तक इस बाबत फैसला लेती है, किसका इंतजार रहेगा।

    कई पॉइंट बने गले के फांस
    सवाल एक ही है कि जब इंटरव्यू प्रोसेस खत्म कर दिया गया है तो ऐसे में पूर्व सरकार ने जिन 11 पॉइंट्स के आधार पर एक नया प्रोसेस मुकम्मल करने के लिए शुरू किया है। उस पर भी सवाल हैं और माना यही जा रहा है कि उस प्रोसेस की भी सरकार समीक्षा निश्चित रूप से करेगी। जिसमें कई पॉइंट आयोग के लिए गले की फांस बने हुए हैं।

    उधर पूर्व सरकार ने सदस्यों की ऐज लिमिट जब 62 साल से 65 की थी तब यही सवाल उठा था कि ऐसा सरकार ने अपनों को खपाने के लिए किया था। यह फैसला यदि सरकार पलटती है तो सभी का जाना अपने-आप ही तय हो जाएगा।

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