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जहां प्राचीन काल से मना रहे उत्सव, भूतों जैसे मुखौटे पहन कसते हैं अश्लील तंज

इस परंपरागत दैवीय रिवायत और प्राचीन नृत्य को देखने के लिए हजारों

Dainik Bhaskar

Jan 16, 2018, 08:15 AM IST
festivals celebrating  ancient times, wears ghosts masks

कुल्लू (शिमला) ‘पारंपारिक वस्त्र पहने, मुंह पर प्राचीन भुतों जैसे मुखौटे पहन, वो अश्लील जुमले कसते गए...और मौजूद हजारों की भीड़ में महिला, बच्चों और बुजूर्गों ने उफ तक नहीं किया।’ कुछ ऐसा ही नजारा कुल्लू घाटी की पलदी फागली में था। घाटी के करथा और वासुकी नाग को समर्पित पलदी फागली उत्सव में प्राचीन दैवीय परंपरा का निर्वाहन किया गया। अश्लील जुमले कसते हुए ढोल नगाड़ों की थाप पर हारियानों ने मडियाहला (मुखौटा) नृत्य किया और पुरानी परंपरा का निर्वाहन किया गया। इस परंपरागत दैवीय रिवायत और प्राचीन नृत्य को देखने के लिए हजारों
की भीड़ उमड़ी।

- प्राचीन काल से मना रहे उत्सव |देवता वासुकी के हारियानों की माने तो प्राचीन काल से उनके पूर्वज फागली उत्सव को मनाते आ रहे हैं। जब पूरे हिमाचल में देवता अपने स्वर्ग प्रवास पर होते हैं तो बंजार के पलदी मे देवता करथनाग, वासुकी नाग स्वर्ग प्रवास पर न जाकर हारियानों के बीच रह कर इस अनोखे पर्व को निभाने की रस्म अदा करते हैं।

महाभारत, रामायण के युद्धों का वर्णन
- मढियाल्ले यानि मुखौटाधारियों ने देवता करथा नाग व वासुकी नाग के समक्ष रामायण व महाभारत के युद्ध का वर्णन कर नृत्य किया। खास कर समुंद्र मंथन का भी उल्लेख होता है।

भूतप्रेत, बद आत्माओं को भगाया

- पोष महिने में यहां के देवी-देवता स्वर्ग प्रवास पर होते हैं और क्षेत्रोंं में भूत-प्रेतों का वास रहता है। इन प्रेत आत्माओं व भूतों को भगाने के लिए देवता करथा नाग व वासुकी नाग और इनके सहायक देवता आहिडू महावीर, सिहडू देवता, गुढ़वाला देवता, खोडू, दंईत देवता इस करथा उत्सव में राक्षस रूपी मखौटों के साथ नृत्य कर, अश्लील जुमलों से भूत-प्रेतों व बूरी आत्माओं को भगाया जाता है।

लोग हुए हैरान : दहकते अंगारों पर किया दैवीय नृत्य नहीं हुआ किसी को नुकसान
- फागली उत्सव में क्षेत्र के विशेष देवताओं से जुड़े लोगों व कारकूनों बीठ मडियााहली पहन कर परंपरा निभाते हुए अश्लील जुमले सुनाए। आधी रात बीत जाने के बाद उत्सव के दौरान मरोड गांव से 100 फुट लंबी जलती मशाल ढोल नगाड़ों के साथ थाटीबीड गांव में लाई गई। मुखौटाधारियों हारियानों ने इस दौरान दहकते अंगारों पर कूदकर नृत्य किया। यह दैवीय नृत्य कई घंटों तक चला परंतु दहकते अंगारों से किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ, देख लोग दंग रह गए।

- देवता के गूर कड़कड़ाती सर्दी में ठंडे पानी के कुंड में दिन भर खड़े रहे और आम लोगों काे आशीर्वाद देते रहे। दोपहर बाद थाटीबीड गांव में नरगिस के फूलों से तैयार किए गए विष्णु अवतार बीठ को बांगी नामक खुले स्थान पर नचाया गया। फागली उत्सव की शोभा बढ़ाने के लिए घाटी के पटौला, नरौली, शिकारीबीड, घमीर, मरौड, गांव से दर्जनो देवलू मुखोटे पहन कर देवप्रथा का निर्वाहन करने थाटीबीड पहुंचे थे। यह विशेष फागली उत्सव संक्रांति से शुरू हुआ था जिसमें वासुकी नाग के कोठी प्रांगण अलाव जला कर सैकड़ों देवलू रात भर बैठे रहे।

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