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कांगड़ा-मंडी से ही निकली सत्ता की राह, मोदी की रैली भी काम न आई

भाजपा ने 44 में से 20 सीटें इन्हीं जिलों से जीती, मंडी में कांग्रेस का खाता न खुलने से 21 में सिमट कर रह गई।

bhaskar news | Last Modified - Dec 19, 2017, 06:29 AM IST

  • कांगड़ा-मंडी से ही निकली सत्ता की राह, मोदी की रैली भी काम न आई
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    {जैसे-जैसे सोमवार को रुझान आ रहे थे वैसे-वैसे समर्थक अपने प्रत्याशी के पक्ष में ढोल नगाड़ों और नरसिंघा के साथ नाचते गाते रहे। हर कोई अपने प्रत्याशी की जीत को लेकर खुश था।

    शिमला.प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाने का रास्ता इस बार मंडी आैर कांगड़ा जिले से निकला। मंडी जिला से भाजपा को दस में नौ सीटें मिली। कांगड़ा की पंद्रह सीटों मे से भाजपा को 11 सीटें मिली। एक सीट निर्दलीय के हाथ लगी, तीन सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली। शिमला, सोलन, सिरमौर, हमीरपुर, कुल्लू, किन्नौर बिलासपुर आैर ऊना में कांग्रेस की स्थिति ठीक ही रही। बिलासपुर आैर चंबा जिला में कांग्रेस के हाथ एक-एक सीट ही लगी।
    राज्य की 68 सीटों में से 25 सीटें दो जिलों में ही है।

    राजनीतिक कद के हिसाब से बड़ा जिला होने के कारण इसकी अहमियत शुरू से ही ज्यादा रहती है। पिछले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को कांगड़ा से शिमला का रास्ता मिला था, लेकिन मंडी ने दोनों ही राजनीतिक दलों को बराबर सीटें दी थी। उस समय कांग्रेस को शिमला से छह सीटें मिली थी। जिले से एक सीट निर्दलीय ने जीती थी। भाजपा ने शिमला में 2012 में एक ही सीट हासिल की थी। राजधानी से भाजपा के प्रत्याशी सुरेश भारदाज ने जीत हासिल की थी। इस बार भी उन्होंने अपनी सीट हासिल की है। इनके साथ ही भाजपा ने शिमला से जुब्बल कोटखाई आैर चौपाल की सीट हासिल की है।

    अर्से बाद सत्ता के साथ होगा चौपाल

    चौपाल अर्से के बाद सत्ताधारी दल के साथ होगा। चौपाल से अमूमन जिस दल के विधायक की जीत होती है, राज्य में सरकार इसके विरोधी दल की रहती है। इस बार चौपाल से भाजपा के प्रत्याशी ने जीत हासिल की है। वहीं पार्टी ने हिमाचल में सरकार बनाने के लिए बहुमत भी हासिल कर लिया है। इससे पहले जिस भी पार्टी की हिमाचल में सरकार बनती है, चौपाल में उसकी विरोधी पार्टी का विधायक जीत कर विधानसभा पहुंचते हैं।

    भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सत्ती पर भितरघाती भारी

    इस दफा ऊना जिला में भाजपा बढ़त बनाने में कामयाब रही है। उसे कुल पांच विधानसभा सीटों में से तीन पर जीत हासिल हुई है जबकि कांग्रेस को दो सीटों पर ही जीत नसीब हुई है, उसे एक सीट का नुकसान झेलना पड़ा है। जिला में सबसे बड़ा उल्टफेर ऊना सदर में हुआ है, जहां से भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती को कांग्रेस के सतपाल रायजादा से हार झेलनी पड़ी है। उनकी हार की मुख्य बजह भितरघात माना जा रहा है। क्योंकि मतदान के बाद मंडल भाजपा ने पांच लोगों को भितरघात करने पर बाहर का रास्ता दिखाया था। इसके अलावा कांग्रेस का आक्रामक प्रचार भी सत्ती पर भारी पड़ा। हालांकि चुनाव प्रचार में सत्ती ने पिछले पन्द्रह साल में करवाए विकास कार्यों और केंद्र सरकार से मिले बड़े प्रोजेक्ट को भी भुनाया। प्रचार के अंतिम दौर में पार्टी के पक्ष में माहौल बदलने के लिए यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली भी करवाई। लेकिन सत्ती मतदाताओं को अपने पक्ष में मोड़ने में कामयाब नहीं हो पाए। कार्यकर्ताओं से बेरुखी भी उनकी हार की एक बजह रही।

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    {जैसे-जैसे सोमवार को रुझान आ रहे थे वैसे-वैसे समर्थक अपने प्रत्याशी के पक्ष में ढोल नगाड़ों और नरसिंघा के साथ नाचते गाते रहे। हर कोई अपने प्रत्याशी की जीत को लेकर खुश था।
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