--Advertisement--

एचपीयू भर्ती विवाद: पूर्व वीसी के खिलाफ जांच में खुलने लगी परतें

पीएमओ ने एक साल पहले दिए थे जांच के आदेश, विवि के कमेंट पर बंद हुई थी फाइल

Dainik Bhaskar

Dec 14, 2017, 06:50 AM IST
Hpu recruitment dispute

शिमला. हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के पूर्व कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी के खिलाफ शुरू हुई जांच के बाद कई परतें खुलना शुरू हो गई है। विश्वविद्यालय टीचर एसोसिएशन (हपुटवा) ने भ्रष्टाचार को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और एमएचआरडी को शिकायत पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी। एसोसिएशन के महासचिव डाॅ. देसराज ठाकुर ने दिसंबर 2016 में ये शिकायत की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय से इसकी जांच के आदेश राज्य के मुख्य सचिव को दिए गए। शिक्षा सचिव ने एचपीयू से इसकी रिपोर्ट तलब की। 3 जनवरी को इसकी इन्क्वायरी शुरू हुई।


सूत्रों के मुताबिक कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने अपने रसूख के चलते एचपीयू के रजिस्ट्रार के मार्फत पत्र भिजवाया। इसमें कहा गया था कि ऐसी कोई भी अनियमितता विवि प्रशासन ने नहीं बरती है। एचपीयू में जो भर्तियां हुई है वह सारी नियमों के तहत है। हैरानी की बात ये है कि राज्य सरकार ने एचपीयू के इस कमेंट के बाद जांच को बंद कर दिया। जबकि शिकायत पत्र में भ्रष्टाचार के कई गंभीर मामलों को डॉक्यूमेंट के साथ उठाया गया था। एचपीयू के पूर्व वीसी एडीएन वाजपेयी पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में कुलपति बने थे। वीसी के पद पर तीन साल का सेवाकाल पूरा होने के बाद कांग्रेस सरकार ने उनका कार्यकाल तीन साल के लिए बढ़ाया।

क्या है मामला

एचपीयू में सहायक आचार्य भर्तियों में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार की शिकायत हुई है। केंद्रीय विजिलेंस कमिशन ने राज्य सरकार को इसकी जांच के आदेश दिए हैं। राज्य सरकार ने ज्वाइंट सेक्रेटरी हायर को इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। दो रोज पूर्व जांच अधिकारी ने एचपीयू जाकर इस पूरे मामले के दस्तावेजों को तलब कर दिया है। विवि के कुलपति पर आरोप है कि भर्तियों में लेनदेन हुआ है। भर्तियों में लेनदेन और भाई भतीजावाद के अलावा नॉन टीचिंग स्टाफ को फायदा पहुंचाने और वित्तीय अनियमितताओं की जांच भी शुरू हुई है।

अब ऐसे फंसेगा विवि प्रशासन

सेंट्रल विजिलेंस कमिशन से आए पत्र के बाद राज्य सरकार ने अब नए सिरे से जांच बिठाई है। ये जांच उन्हीं बिंदुओं पर हो रही है जो हपुटवा ने अपनी शिकायत में उठाए थे। इसके बाद आने वाले दिनों में स्क्रीनिंग कमेटी से लेकर ईसी भी जांच के दायरे में आ गई है। यदि जांच में आरोप साबित हो सकते हैं तो कई बड़े अधिकारी इसके लपेटे में आएंगे हैं। खासकर वह अधिकारी जिन्होंने बिना तथ्यों को जांचे ऐसी रिपोर्ट सरकार को भेजी थी।

तीन पन्नों के शिकायत पत्र में ये लगाए थे आरोप

हपुटवा ने तीन पन्नों का शिकायत पत्र पीएमओ और एमएचआरडी को भेजा था। हर शिकायत के साथ प्रूफ के तौर पर डॉक्यूमेंट अटैच किया गया था। एचपीयू प्रशासन पर आरोप लगाया था कि भर्तियों में नियमों की अनदेखी की गई है। यूजीसी द्वारा तय नेट, सेट की अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों को छुपाते हुए विवि के एकीकृत हिमालयन अध्ययन संस्थान (आईआईएचएस) में चहेतों को लाभ दिया गया। परियोजना में निर्धारित पारिश्रमिक पर काम कर रहे कर्मचारियों को वित्त अधिकारी यानि एक व्यक्ति की कमेटी की सिफारिशों से सीधे पे बैंड 15,500-39100 में बिना विवि के अध्यादेश व एक्ट में निर्धारित चयन प्रक्रिया से नियमित कर दिया गया। नियमितिकरण की तारीख से दो-दो पदोन्नतियां भी दी गई। इसके लिए कुलपति ने अपनी विशेष शक्तियों (12 सी)का प्रयोग किया जो न्याय संगत नहीं है।

सहायक आचार्य भर्ती में यूजीसी नियमों में दी छूट
एचपीयू में सहायक आचार्य भर्ती के लिए यूजीसी की निर्धारित शैक्षणिक योग्यताओं को हटाकर भर्ती की गई। यूजीसी के विभिन्न निर्देशों को धत्ता बताकर उन अभ्यार्थियों की नियुक्तियां की गई जो शैक्षणिक योग्यताएं पूरी नहीं रखते थे। ऐसे चहेतों को नियुक्ति दी गई है जिनकी पीएचडी नहीं थी। शिकायत में कहा है कि क्या देश में शैक्षणिक योग्यताओं का अकाल पड़ गया है जो ऐसे व्यक्ति को नियुक्तियां देनी पड़ रही है।

2 इंप्लॉइज को रिटारयमेंट से पहले बेनफिट दिया
एचपीयू में भारी वित्तीय अनियमितता हुई है। गैर शिक्षक कैडर के दो कर्मचारियों को रिटायरमेंट से पहले बेनफिट दिया गया। नियमों में छूट देकर 3-3 प्रमोशनें दी गई। एसओ से सहायक कुल सचिव के लिए तीन साल व सहायक कुल सचिव उप कुलसचिव के लिए दो सालों का अंतराल होना जरूरी है। एक विशेष विचारधारा से संबंध रखने वाले इन कर्मचारियों को लाखों का फायदा पहुंचाया गया। जो ड्राफ्टमैन के पद पर तैनात थे उन्हें एसडीओ बनाया।

नियुक्ति में लाखों का लेनदेन

शिकायत पत्र में आरोप लगाया है कि एचपीयू में जो भी नियुक्तियां हुई है उसमें लाखों का लेनदेन हुआ है। भाई भतीजावाद का प्रचलन बढ़ा है। हपुटवा ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

X
Hpu recruitment dispute
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..