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पूर्व सरकार ने बिना मंजूरी के खरीदीं 300 बसें, फायदे वाले रूट प्राइवेट बस ऑपरेटरों को दिए

परिवहन मंत्री ने बताया कि जेएनएनयूआरएम के तहत प्रदेश को 791 बसों की खरीद की है।

Danik Bhaskar | Mar 14, 2018, 07:48 AM IST

शिमला. पूर्व कांग्रेस सरकार के समय में एचआरटीसी में बसों की खरीद में भारी अनियमितता बरती गई। वित्त विभाग और राज्य सरकार की मंजूरी के बावजूद निगम ने तीन सौ बसों की खरीद की। एचआरटीसी ने वर्ष 2015-16 में 10 वॉल्वो बसें खरीदी। 2016-17 में 15 और 2016-17 में फिर 20 वॉल्वो बसों की खरीद की। अपनी वॉल्वो बसें होते हुए निगम ने 52 बसें वैट लीजिंग आधार पर चलाने का निर्णय लिया।

निगम ने फायदे वाले रूट वैट लीजिंग आधार पर प्राइवेट बस ऑपरेटरों को दिए। इन रूटों पर एचआरटीसी की बसें चल रही थी। परिवहन मंत्री गोविंद सिंह ने विधानसभा में विधायक होशियार सिंह, व अन्य के सवाल के जवाब में दी। उन्होंने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार के समय में एचआरटीसी में भारी अनियमितता बरती गई। तकनीकी अधिकारियों की कमेटी होने के बावजूद निगम ने 12 मीटर लंबी बसें खरीदी।


इसके अलावा जो छोटी बसें खरीदी उनकी लंबाई 9 मीटर थी। लो-फ्लोर बसों की खरीद की गई जो हिमाचल के हिसाब से ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार के समय में एचआरटीसी में हुई अनियमितताओं को लेकर सरकार श्वेत पत्र जारी करेगी। उन्होंने कहा कि जेएनएनयूआरएम की बस खरीद के लिए तैयार की गई डीपीआर में अनियमितता हुई है।


जेएनएनयूआरएम की 300 बसें सड़कों के किनारे खड़ीं


परिवहन मंत्री ने बताया कि जेएनएनयूआरएम के तहत प्रदेश को 791 बसों की खरीद की है। इनमें से 300 बसें ऐसी हैं जो सड़कों के किनारे धूल फांक रही है। उन्होंने कहा कि इन बसों को चलाने के लिए क्लस्टर बनाए गए थे। प्राइवेट बस आपरेटर यूनियन ने इसे कोर्ट में चुनौती दी, इसमें आरोप लगाया कि ये बसें क्लस्टर के अनुसार नहीं चल रही है। हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगाई। इसको लेकर अवमानना का मामला भी चला। उन्होंने कहा कि अब कोर्ट के निर्देशानुसार सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है। इन बसों को चलाने के लिए दोबारा से योजना तैयार की गई है। प्राइवेट बस आपरेटर, एचआरटीसी और आम जनता के सुझाव भी इस पर लिए जाएंगे। जल्द ही 300 खड़ी बसों को चला दिया जाएगा।


1.18 करोड़ का नुकसान


परिवहन मंत्री ने बताया कि फायदे वाले रूटों पर प्राइवेट ऑपरेटरों को वाल्वो बसें चलाने की परमिशन दी गई। इससे निगम को 17 करोड़ का लाभ हुआ। मिनी बसों को चलाने से 1.18 करोड़ का घाटा हुआ है। 2013-14 से करोड़ों का लोन लिया गया और बिना डिमांड के बसों की खरीद की गई।


घाटा निगम-आॅपरेटर उठाएंगे


परिवहन मंत्री ने कहा कि पूर्व सरकार ने ऐसा एग्रीमेंट तैयार किया था जिस से वैट लीज का घाटा भी निगम को ही वहन करना पड़ रहा था। सरकार अब इस एग्रीमेंट में बदलाव कर रही है। यदि घटा हुआ तो निगम और प्राइवेट आपरेटर दोनों इसे बराबर वहन करेंगे।