शिमला

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इस CM ने खुद रिक्शा चलाकर दोस्तों को पहुंचाया था रूम, बनाया था ये बहाना

कॉलेज के दिनों में 3 बजे के बाद मंडी अस्पताल में करते थे मरीजों को गाइड।

Danik Bhaskar

Dec 27, 2017, 07:29 AM IST

मंडी. मुख्यमंत्री बनने जा रहे जयराम ठाकुर कॉलेज के दिनों से ही मुश्किल घड़ी में किसी दूसरे की मदद के लिए खुद आगे बढ़कर लीड करते रहे हैं। कॉलेज से लेकर यूनिवर्सिटी के दिनों के कई ऐसे वाक्य आज भी जयराम ठाकुर के साथ पढ़े लोगों के जहन में ताजा हैं।


मंडी कॉलेज से लेकर पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ तक स्टूडेंट लाइफ में साथ रहे वाले जयराम ठाकुर के मंडी के 5 दोस्तों के पास ऐसे कई वाक्य आज भी हैं। इन दोस्तों ने बताया कि हॉस्पिटल में वह कैसे मरीजों की मदद करते थे। मंडी में जयराम के साथ पढ़े कर्मजीत सिंह मल्होत्रा और गुरसेव मल्होत्रा बताते हैं कि जयराम ठाकुर अपने कॉलेज के दिनों में कॉलेज खत्म होने के बाद मंडी जोनल हॉस्पिटल पहुंच जाते थे। 3 बजे डॉक्टर का राउंड होता था तो जयराम डॉक्टरों के साथ-साथ पीछे चलते रहते थे।

हॉस्पिटल में अनपढ़ लोग जो डॉक्टरों की बातों को नहीं समझ पाते थे तो जयराम ठाकुर उन लोगों को समझाते कि अापको क्या करना है। जयराम ठाकुर 1987-88 में पंजाब यूनिवर्सिटी से अपनी मास्टर डिग्री की पढ़ाई पूरी कर रहे थे। कर्मजीत सिंह बताते हैं कि हम सभी दोस्त एक रात तेजाब फिल्म देखने बतरा थियेटर गए। रात को वापस आने के लिए जब रिक्शे वाले ने हम सभी 5 दोस्तों को एक साथ बिठाने से इंकार कर दिया तो जयराम ठाकुर ने आगे बढ़कर खुद रिक्शा चलाने की पेशकश कर डाली। जयराम ठाकुर ने रिक्शे वाले को पीछे बिठाया और हम सभी दोस्तों ने बारी-बारी से रिक्शा चलाकर कमरे तक पहुंचे और रिक्शे वाले को पैसे भी दिए।

बहाना बनाकर बोले लाइसेंस नहीं है

चंडीगढ़ में अपनी पढ़ाई के दौरान जब हम सभी दोस्तों एक कार्यकम कर रहे थे तो जयराम ठाकुर को एक दोस्त का स्कूटर लेकर बाजार से सामान लाने के लिए कहा गया। उस समय जयराम ठाकुर को स्कूटर नहीं चलाना आता था। इसके चलते उन्होंने लाइसेंस नहीं होने का बहाना बना कर जाने से इंकार कर दिया। कर्मजीत सिंह मल्होत्रा, गुरसेव मल्होत्रा, संजय आहुजा, अश्वनी कुमार, दिनेश कंवर व स्वयं जयराम ठाकुर सभी मंडी कॉलेज से चंडीगढ़ तक साथ रहे हैं।

साधारण तरीके से टारना मंदिर में हुई थी शादी

सीएम बने जयराम ठाकुर की शादी भी इन दोस्तों ने ही मैनेज की है। इनका कहना है कि बेहद साधारण तरीके से टारना मंदिर में डॉ. साधाना के साथ जयराम ठाकुर शादी के बंधन मे बंधे हैं। शादी के दौरान खाने से लेकर शादी तक का हर कार्य हम सभी दोस्तों ने मिलकर निपटाया था। यह शादी पूरी तरह से बिना दहेज के हुई थी। दोस्तों का कहना है कि जयपुर से संबंध रखने वाली डॉ. साधना की पहली मुलाकात जयराम ठाकुर के साथ जम्मू में हुई थी।

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