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ये हैं प्रदेश के सबसे कम उम्र और सबसे अधिक उम्र के MLA, असेंबली में बैठेंगे एक साथ

सरकार गई, लेकिन बेटे को राजनीति में इस्टेबलिश कराने में सफल रहे वीरभद्र।

BhaskarNews | Last Modified - Dec 19, 2017, 08:38 AM IST

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    वीरभद्र सिंह के बाद अब विक्रमादित्य सिंह भी चुनाव जीत गए हैं।

    शिमला. प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में पहली बार बाप-बेटा एक साथ विधानसभा में होंगे। यहीं नहीं ये सबसे युवा और सबसे बुजुर्ग भी होंगे। वीरभद्र सिंह के बाद अब विक्रमादित्य सिंह भी चुनाव जीत गए हैं। इस चुनाव में वीरभद्र परिवारवाद की विरासत बचाने में सफल रहे। वीरभद्र सिंह खुद तो चुनाव जीते ही, साथ ही अपने बेटे को भी जिताने में सफल रहे। वीरभद्र ने पिछले चुनाव शिमला ग्रामीण से जीता था। इस बार उन्होंने अर्की से चुनाव लड़ा।

    बेटे के लिए छोड़ी थी शिमला ग्रामीण सीट

    शिमला ग्रामीण को सेफ सीट मानते हुए उन्होंने यहां से बेटे विक्रमादित्य को लड़ाया। सीएम का बेटे के लिए सीट छोड़ना सफल रहा। वीरभद्र सिंह के पिछले कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों का विक्रमादित्य सिंह को पूरा लाभ मिला। राजपरिवारों के ज्यादातर चेहरे चुनाव में अपनी साख बचा गए। लेकिन कुल्लू में महेश्वर सिंह का राज परिवार हार गया। इस विधानसभा में राजपरिवार से विधायकों के चार चेहरे होंगे। लेकिन परिवार में राजनीति की विरासत को आगे बढ़ाने में सिर्फ विक्रमादित्य और आशीष बुटेल ही सफल रहे।

    वीरभद्र सिंह अर्की तो विक्रमादित्य शिमला ग्रामीण से चुनाव जीते

    विधानसभा में राजपरिवार के चार चेहरे: राजपरिवाराें में सोलन के अर्की से सीएम वीरभद्र सिंह चुनाव जीते हैं। वे तत्कालीन बुशहर रियासत के वंशज हैं। उनके बेटे विक्रमादित्य भी चुनाव जीत गए। कसुम्पटी से विधायक अनिरुद्ध सिंह ने भी जीत दर्ज की है। उन्होंने राजपरिवार से ही चुनावी दंगल में उतरीं भाजपा प्रत्याशी विजय ज्योति को हराया। चंबा जिले में राजपरिवार की आशा कुमारी ने जीत दर्ज की लेकिन कुल्लू में महेश्वर सिंह और उनके भतीजे आदित्य विक्रम चुनाव हार गए।

    पहली परीक्षा में ही पास हुए विक्रमादित्य
    विधानसभामें इस बार विक्रमादित्य सिंह (28) सबसे युवा विधायक हैं। ये उनका पहला चुनाव था। पहली ही परीक्षा में वे पास हो गए। उन्होंने चुनाव में कभी सीएम के बेहद करीब रहे प्रमोद शर्मा को हराया। विक्रमादित्य ने कहा, ‘जनता ने उन्हें बेटे की तरह प्यार दिया है। इस प्यार और स्नेह के बदले वे विकास में कमी नहीं रखेंगे।’ पिछली विधानसभा में यादवेंद्र गोमा सबसे युवा विधायक थे। वे जयसिंहपुर से जीते थे।

    आशीष ने संभाली पिता की विरासत
    पालमपुरसे चुनाव जीते आशीष बुटेल ने पिता बृज बिहारी लाल बुटेल की विरासत संभाल ली। बुटेल विधानसभा में विक्रमादित्य के बाद दूसरे युवा विधायक हैं। आशीष के लिए पिता ने सीट खाली की थी। इस सीट पर बुटेल का मुकाबला भाजपा आलाकमान की पसंद इंदु गोस्वामी और भाजपा के बागी प्रवीण शर्मा से था। लेकिन अाशीष पालमपुर में परिवार के पुराने रुतबे और दबदबे को कायम रखने में कामयाब रहे।

    कौल सिंह हारे, बेटी भी नहीं जीती
    मंडी में परिवारवाद की लड़ाई में कौल सिंह ठाकुर हार गए। पहली बार चुनावी दंगल में उतरीं उनकी बेटी चंपा ठाकुर भी जीत नहीं पाई। कौल सिंह ठाकुर द्रंग तो चंपा मंडी सदर से चुनावी मैदान में थी। कौल सिंह अपनी बेटी को राजनीति में आगे लाने के लिए काफी मेहनत कर रहे थे।

    कुल्लू में पहली बार राजपरिवार की हार
    कुल्लूमें राजपरिवार की पहली बार बड़ी हार हुई है। 2012 में महेश्वर सिंह और उनके भाई कर्ण सिंह दोनों ही जीते थे। कर्ण सिंह को कांग्रेस सरकार में आयुर्वेदिक मंत्री बनाया गया था। पिछले साल उनका निधन हो गया। इस बार उनके बेटे आदित्य विक्रम सिंह मैदान में थे पर हार गए।

    चाचा-भतीजा नहीं बचा पाए लाज
    कुल्लूसदर से महेश्वर सिंह और बंजार से उनके भतीजे पूर्व मंत्री स्व. कर्ण सिंह के बेटे आदित्य विक्रम चुनाव नहीं जीते पाए। महेश्वर ने भाजपा और आदित्य विक्रम ने कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा। राजपरिवार के इन चाचा-भतीजे को जनता ने नकार दिया और गैर राजपरिवार से ताल्लुक रखने वाले प्रत्याशियों को जीता कर विधानसभा भेजा है।

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    वीरभद्र ने पिछले चुनाव शिमला ग्रामीण से जीता था।
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    प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में पहली बार बाप-बेटा एक साथ विधानसभा में होंगे।
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    इस चुनाव में वीरभद्र परिवारवाद की विरासत बचाने में सफल रहे।
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    इस बार उन्होंने अर्की से चुनाव लड़ा।
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    वीरभद्र सिंह खुद तो चुनाव जीते ही, साथ ही अपने बेटे को भी जिताने में सफल रहे।
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