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धूमल के किले में कांग्रेस के तीन लोगों की जीत, भीतर तक हिला गई नई चुनौतियां

कांग्रेस राजनीति में तीन दिग्गजों का फिर से उदय भाजपा के लिए नई चुनौती बन कर खड़ा हो गया है।

Danik Bhaskar | Dec 20, 2017, 07:44 AM IST

हमीरपुर. करीब ढाई दशकों के बाद हमीरपुर जिला की कांग्रेस राजनीति यहां नए मिजाज में पहुंच गई है। धूमल की हार के साथ नादौन और बड़सर में भाजपा प्रत्याशियों की हार अब कांग्रेस को नए सूत्र में पिरो गई है। जिला की इस कांग्रेस राजनीति में तीन दिग्गजों का फिर से उदय भाजपा के लिए नई चुनौती बन कर खड़ा हो गया है।


चूंकि सीएम हमीरपुर की राजनीति में अब फिलहाल कोसों दूर चला गया है और कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सुक्खू नादौन की राजनीति में जीत कर जिस तरीके से फिर स्थापित हुए हैं। उससे जिला के मायूस कांग्रेसियों में अब फिर से ताजगी गई है।

उधर सुजानपुर में राजेंद्र राणा की मौजूदगी और बड़सर में आईडी लखनपाल की दूसरी जीत इन तीनों क्षेत्रों में भाजपाइयों के लिए पुरानी राहें तलाशने के लिए कई तरह के सवाल खड़े कर गई हैं। गौर रहे कि 1985 में हमीरपुर जिला की राजनीति में पहली बार कांग्रेस चार सीटों पर और भाजपा एक सीट पर ठाकुर जगदेव चंद के रूप में काबिज हुई थी। उसके बाद कभी भी कांग्रेस तीन सीट नहीं जीत पाई। हालांकि 1993 के चुनावों में जब ठाकुर जगदेव चंद की आकस्मिक मौत हो गई तो उपचुनाव में कांग्रेस की जीत की वजह से तीन सीट फिर कांग्रेस की झोली में रहीं और वर्ष 1998 में जब पूर्व सीएम प्रो. प्रेमकुमार धूमल के प्रभाव का युग शुरू हुआ तो अब तक कांग्रेस इस जिले में लगातार हिचकौले खाती रही।

उधर विधायकी के रूप में हमीरपुर और भोरंज में नए अध्याय की शुुरुआत हुई है। नरेंद्र ठाकुर की विधायकी के रूप में दूसरी जीत इस परिवार के लिए नया जीवनदान दे गई है। अब भविष्य की भाजपा राजनीति में यह परिवार खुद को किस तरीके से बिसात बिछा कर पार्टीजनों को प्रभािवत कर पाएगा, इसकी भी इंतजार रहेगी। लेकिन भोरंज की राजनीति में अब कमलेश कुमारी के रूप में भाजपा को नई विधायक मिली हैं।

भाजपाइयों में मायूसी
प्रदेश में भले ही भाजपा की सत्ता काबिज हो रही है लेकिन पूर्व सीएम के प्रभाव वाले इस जिले में भाजपाइयों के मायूसी वाले माहौल में कांग्रेस के यह तीन दिग्गज अब किस रणनीति पर सवार होकर यहां कांग्रेस के बिखरे कुनबे की जड़ों को मजबूत कर पाएंगे। इसकी तो इंतजार रहेगी लेकिन इतना तय है कि आगामी लोस के आम चुनावों में भाजपाइयों को भयंकर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सुक्खू और सुजानपुर में प्रोजेक्टेड सीएम को मात देने वाले राजेंद्र राणा के प्रभाव के अागे भाजपाइयों को राहें तलाशने में अब वक्त तो लगेगा साथ ही पार्टी के भीतर नए ध्रुवीकरण की राजनीति की सवारी भी उनके लिए आसान होने वाले नहीं है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव सांसद अनुराग ठाकुर के लिए नई चुनौती बनेगा।