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चंडीगढ़-शिमला हाईवे पर टनल के दोनों सिरे जुड़े, सफर 9 किलोमीटर होगा कम

शिमला से चंडीगढ़ की ओर जाने वाली एक लेन का ट्रैफिक क्रॉस होगा।

bhaskar news | Last Modified - Dec 18, 2017, 07:20 AM IST

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    परवाणू-शिमला नेशनल हाइवे पर कुमारहट्टी-शमलेच टनल के दोनों सिरे आपस में जुड़ गए हैं।

    कुमारहट्टी. परवाणू-शिमला नेशनल हाइवे पर कुमारहट्टी-शमलेच टनल के दोनों सिरे आपस में जुड़ गए हैं। बनकर तैयार रविवार को टनल के दोनों सिरे आपस में मिलने के बाद अब इसका फिनिशिंग काम होगा। जुलाई 2018 तक इस टनल को पूरा करना का लक्ष्य रखा गया है। इस टनल के बनने से कालका शिमला के बीच की दूरी 9 किलोमीटर कम हो जाएगी। इस टनल को बनाने पर 95 करोड़ रुपए खर्च हुआ है। कालका शिमला फोरलेन पर इस टनल के बनने के बाद शिमला से चंडीगढ़ की ओर जाने वाली एक लेन का ट्रैफिक क्रॉस होगा।

    एसके धर्माधिकारी इससे पहले तीन टनल बना चुके
    सैमनइंफ्रा कंपनी के सलाहकार एसके धर्माधिकारी इससे पूर्व तीन टनल बना चुके हैं। इससे पूर्व वह चमेरा विद्युत परियोजना चमेरा तीन नाथपा झाकड़ी विद्युत परियोजना में टनल का निर्माण कर चुके हैं। सैमन इंफ्रा कॉर्प के मुख्य कार्यकारी अधिकारी समीर नागरानी ने कहा कि शनिवार को इसे दोनों सिरे आपस में मिल गए हैं। टनल का फिनिशिंग के बाद 11.78 मीटर डाया होगा।

    97 हजार क्विंटल लगा लोहा
    टनल के निर्माण पर अभी तक 97 हजार क्विंटल लोहा लगा। खुदाई के बाद चट्टानों को खिसकने से रोकने के लिए 137 हजार रनिंग मीटर कंकरीट की स्प्रे की गई है। अभी तक 425 क्विंटल लोहे के गाडरों का प्रयोग किया जा चुका है। इसकी फिनिशिंग पर 11500 टन लोहे का और इस्तेमाल होना है। टनल के निर्माण के लिए विश्व स्तरीय मशीनों का प्रयोग किया ड्रिलिंग के लिए ऑट्रेलिया की जम्बो मशीन कंकरीट स्प्रे के लिए फिनलैंड से आयात रोबोट के माध्यम से की गई।

    खर्च हुए 95 करोड़
    कुमारहट्टी-शमलेच टनलके निर्माण पर अभी तक करीब 95 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। निर्माण में कर्मचारियों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है। कुमारहट्टी-शमलेच टनल के निर्माण पर करीब 35 इंजीनियर 225 कर्मचारी दो शिफ्टों में 23 घंटे काम कर रहे थे। करीब डेढ़ वर्ष में ही टनल के दोनों सिरे आपस में मिल गए। शनिवार को टनल की खुदाई का काम करीब अढ़ाई मीटर बचा था। इसे खोलने के लिए टनल के अंदर ब्लास्ट किया गया। इसके साथ दोनों सिरे आपस में जुड़ गए।

    ये है खास
    हिमाचल में पहली बार ऑस्ट्रेलियन तकनीक से टनल का निर्माण हुआ
    कंपनी ने इस काम को विश्व स्तरीय करार दिया
    924 मीटर लंबी इस सुरंग का निर्माण जून 2016 में शुरू हुआ
    कुमारहट्टी की ओर से 625 मीटर और शमलेच की ओर से 299 मीटर की आधुनिक मशीनों से खुदाई की गई।
    कंपनी ने रविवार को समारोह में निर्माण में लगे इंजीनियर मजदूरों को सम्मानित किया।

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    जुलाई 2018 तक इस टनल को पूरा करना का लक्ष्य रखा गया है।
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Web Title: Travel Less Than 9 Kilometers
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