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सीएम के लिए चर्चा में हैं ये 3 नाम, जीतने वाले 68 विधायकों में सिर्फ चार महिलाएं

पार्टी मंडी जिले को जीत का इनाम दे सकती है क्योंकि यहां भाजपा ने 10 में से 9 सीटें जीती हैं।

Dainik Bhaskar

Dec 19, 2017, 07:50 AM IST
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शिमला. धूमल की हार के बाद अब सीएम कौन होगा? इस पद की दौड़ में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, सिराज से विधायक जयराम ठाकुर आैर मंडी से नेता अजय जमवाल के नाम शामिल हैं। पार्टी मंडी जिले को जीत का इनाम दे सकती है क्योंकि यहां भाजपा ने 10 में से 9 सीटें जीती हैं।

दागी दोगुने, महिलाओं की संख्या घटी

इस बार विधानसभा चुनावों में 4 महिलाएं जीत कर आई है। इनमें डलहौजी से आशा कुमारी, इंदौरा से रीता देवी, भोरंज से कमलेश कुमारी और शाहपुर से सरवीण चौधरी। चुनावी मैदान में 19 महिलाएं उतरी थीं। भाजपा ने 6 महिला प्रत्याशियों को टिकट देकर मैदान में उतारा था। जबकि, कांग्रेस टिकट पर तीन महिला प्रत्याशी चुनाव लड़ रही थीं। 2012 के चुनावों में 3 महिलाएं जीतकर पहुंची थीं। इनमें आईपीएच मंत्री विद्या स्टोक्स, डलहौजी से विधायक आशा कुमारी और शाहपुर से सरवीण चौधरी शामिल थीं।

पिछली बार सिर्फ 13 दागी विधायक थे, इस बार 27 दागी जाएंगे सदन में
2017 के चुनावों में जीत कर आए 27 विधायक ऐसे हैं, जिन पर कोई न कोई आपराधिक मामला दर्ज हैं। कुल 338 प्रत्याशी थे। इनमें से 61 यानि 18 फीसदी पर आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें से 27 जीत कर आए हैं। 2012 के विस चुनावों में जीतकर विधानसभा पहुंचे 13 विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज थे। करीब 20% विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज थे।

40 साल की उम्र तक के सिर्फ छह जीते

इस बार विधानसभा में युवाओं की संख्या काफी कम हैं। जीत कर आए 6 विधायक ऐसे हैं जिनकी आयु 40 व इससे कम हैं। जबकि 41 से 50 साल तक के 12 विधायक जीते हैं। चुनावी मैदान में 338 प्रत्याशी थे, इनमें से 155 यानि 45 फीसदी 25 से 50 साल के थे। 2012 में 25 से 30 आयु के 2 विधायक जीते थे। 31 से 40 आयु के 8 विधायक जीत कर आए थे।

19 विधायक ग्रेजुएट भी नहीं

इस बार 49 विधायक ऐसे जीत कर आए हैं जो बीए, एमए, एमफिल, पीएचडी व प्रोफेशनल डिग्री धारक हैं। 19 विधायक ऐसे हैं जो इससे कम पढ़े-लिखे हैं। यानी ग्रेजुएट भी नहीं है।

2014 लोकसभा चुनाव में जीते 15 हलके गंवाए, 2019 में जीत आसान न होगी

भाजपा को 2019 के लोकसभा चुनावों में 2014 का प्रदर्शन दोहराने के लिए ज्यादा पसीना बहाना पड़ सकता है। भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनावों में 59 विधानसभा हलकों में लीड ली थी, जबकि कांग्रेस को नौ हलकों में ही लीड मिली थी। इस तरह चारों संसदीय सीटों पर भाजपा काबिज हुई। लेकिन 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा 44 सीटें तो कांग्रेस ने 21 हलकों में जीत हासिल की है। इस तरह भाजपा ने तीन साल के बाद हुए इन चुनावाें में अपनी पकड़ वाले 15 विधानसभा हलके गंवा दिए। भाजपा के लिए सुखद है कि उनकी सरकार बन रही है लेकिन यह चिंता की बात है कि एकदम से 25% का डाउनफॉल क्यों आया। 2019 में लोकसभा चुनाव होने हैं। इनमें जीत के लिए पार्टी को दोबारा से बेहतर काम करते हुए वोटर तक पहुंच बनानी होगी। कांग्रेस में 2014 के मुकाबले में तो काफी सुधार किया है, लेकिन 2019 में कांग्रेस यदि जीत की सोचती है तो उन्हें नई रणनीति तैयार करनी होगी।

कांगड़ा में कांग्रेस को झटका

मंडी के साथ कांग्रेस को कांगड़ा में बड़ा झटका लगा है। यहां जिले से ही पार्टी को 2012 के चुुनावों में 12 सीटें मिली थी, इस बार पूरे संसदीय क्षेत्र से ही 4 सीटें हासिल हुईं। इसमें कांगड़ा जिले की तीन आैर चंबा जिले की एक सीट शामिल है। पूरे संसदीय सीट में कांग्रेस के हाथ कुछ नहीं लगा। दो साल में इस सीट को जीतने के लिए कांग्रेस को सत्ता से बाहर रहने के बावजूद कांगड़ा को 2019 में जीतने के लिए पसीना बहाना होगा।

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