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गिरि की 2.50 किमी राइजिंग मेन होगी चेंज, 8.5 करोड़ से होगा सुधार

शहरवासियों को रोजाना दो एमएलडी से अधिक पानी शहर को मिलना शुरू हो सकेगा।

शहरवासियों को रोजाना दो एमएलडी से अधिक पानी शहर को मिलना शुरू हो सकेगा। | Last Modified - Dec 18, 2017, 07:17 AM IST

  • गिरि की 2.50 किमी राइजिंग मेन होगी चेंज, 8.5 करोड़ से होगा सुधार

    शिमला. शहर को 18 से 20 एमएलडी तक रोजाना पानी की सप्लाई करने वाली गिरि परियोजना की मेन राइजिंग लाइन की 2.50 किलोमीटर लाइन को बदला जाएगा। इसके लिए निगम प्रशासन साढ़े 8 करोड़ रुपए खर्च करने जा रहा है। इस राशि से केवल राइजिंग मेन को बदला जाएगा बल्कि बरसात के दिनों में सिल्ट की वजह से होने वाली पानी की किल्लत से छुटकारा दिलाने के लिए ट्यूब सेटलर में भी बदलाव किए जाएंगे। परियोजना की मेन राइजिंग लाइन को बदलने से शहरवासियों को दो तरह से फायदा पहुंचने वाला है। इससे एक तो हर रोज हो रही लाखों लीटर पानी की बर्बादी को रोका जा सकेगा। वहीं दूसरी तरफ लीकेज की वजह से चारों पंपों को चला पाने की बाध्यता भी दूर हो जाएगी। नई लाइन डलने के बाद चारों पंपों को फुल कैपेसिटी में चलाना भी संभव हो सकेगा। इससे शहरवासियों को रोजाना दो एमएलडी से अधिक पानी शहर को मिलना शुरू हो सकेगा।

    सेकंडस्टेज में पानी के स्टोरेज टैंक की क्षमता भी बढ़ेगी
    गिरीपरियोजना की सेकंड स्टेज में बने पानी के स्टोरेज टैंक की क्षमता को बढ़ाया जाएगा। अभी सेकंड स्टेज में 10 एमएलडी वाला टैंक बनाया गया है लेकिन अब इसकी क्षमता को 15 एमएलडी तक किया जाएगा ताकि पंपिंग प्रभावित होने पर भी शहरवासियों को यहां से पर्याप्त पानी पहुंचाया जा सके। इसके अलावा सेकंड स्टेज में ही स्टाफ रूम में सुधार और अटेंडेंट के रहने के लिए व्यवस्था की जाएगी।

    सिल्ट की समस्या से निपटने के लिए होगा खास इंतजाम
    बरसातके दिनों में गिरी परियोजना में आने वाली सिल्ट से निपटने के लिए निगम प्रशासन ने खास इंतजाम करने का फैसला लिया है। गिरी परियोजना में इस वक्त सिल्ट से निपटने के लिए ट्यूब सेटलर लगाए गए हैं। इनकी रिपेयर की जाएगी।

    इसके अलावा इस परियोजना में सबसे अधिक सिल्ट देहा खड्ड से आने वाले स्त्रोत से रही है। इसलिए प्रशासन अब इससे निपटने के लिए हेड वेयर पाइप लाइन डालेगा। इसके अलावा परियोजना में अन्य क्षेत्रों से आने वाली सिल्ट को रोकने के लिए भी काम किए जाएंगे।

    मलबा पानी में डाला जाए इसके लिए प्रशासन आस पास के एरिया के लोगों को ऐसा करने के प्रचार के लिए जागरूक करेगा। साइन बोर्ड भी लगाए जाएंगे। गिरी परियोजना का निर्माण वर्ष 2008 में किया गया था और इस परियोजना के निर्माण में 69 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। इसके अलावा इस परियोजना में अनियमितताओं को लेकर विजिलेंस इनक्वायरी भी हो रही है।

    लीकेज की वजह से नहीं चल पाते थे चारों पंप
    मेनराइजिंग लाइन में लीकेज के चलते परियोजना के चारों पंपों को पूरी क्षमता पर नहीं चलाया जा रहा है। वहीं हर तीसरे दिन होने वाली लीकेज से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा भेखल्टी से मशोबरा तक की लाइन की कैरेज केपेसिटी को बढ़ाया जाएगा। पानी की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए क्लोरिनेशन के सिस्टम में भी सुधार किया जाएगा।

    पंपस्हाउस में रिपेयर का काम किया जाएगा
    कॉमन हेडर पर काम करके इसे सुधारा जाएगा। बिजली जाने पर इसकी वजह से दिक्कतों का सामना करना पड़ता है पहले और दूसरे चर के बीच में फ्लो मीटर लगाए जाएंगे। रॉ वाटर स्टेज पर पानी से लेकर मेन टैंकों तक पानी की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए काम किया जाएगा। देहा खड्ड से आने वाली सिल्ट को कम करने के लिए हेडवेयर पाइप और ब्रिज बनाए जाएंगे।

    पाइप को बदला जाएगा
    गिरी परियोजना की मेन राइजिंग लाइन के 2.50 किलोमीटर पाइप को भारी लीकेज के चलते बदला जाएगा। इसके अलावा इस परियोजना में अन्य सुधारों के लिए भी राशि खर्च की जाएगी। इस परियोजना में सुधार के लिए लगभग 8 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे इसके लिए आज कल तैयारियां की जा रही हैं। राजेशकश्यप, एक्सीयन ग्रेटर वाटर सर्कल शिमला

    मई माह में 4 करोड़ रुपए से बदली थी 2000 मीटर लाइन
    इससे पहले नगर निगम प्रशासन ने पहले चरण में पानी की भारी लीकेज को देखते हुए शुरू की दो हजार मीटर लाइन को बदला था। मई माह में इसका काम पूरा हुआ था और इसमें चार करोड़ रुपए की लागत आई थी। जबकि इससे पहले इस लाइन में लीकेज को दूर करने के लिए हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे थे। इस लाइन की रिपेयर करने के बाद शहर को इस परियोजना से पांच एमएलडी तक अतिरिक्त मिलना शुरू हुआ था।

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