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76 बड़े केसों की जांच के लिए 11 इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर

प्रदेश में अगर पुलिस किसी केस को सुलझाने में असफल रहती है तो सरकार उस केस को जांच के लिए सीआईडी (क्राइम) को सौंपती...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:05 AM IST

प्रदेश में अगर पुलिस किसी केस को सुलझाने में असफल रहती है तो सरकार उस केस को जांच के लिए सीआईडी (क्राइम) को सौंपती है। सीआईडी सरकार के भरोसे पर हमेशा खरी उतरी है। युग मर्डर केस समेत कई बड़े मामले सीआईडी ने सुलझाए भी हैं, बावजूद इसके सरकार सीआईडी क्राइम विंग को मजबूत नहीं कर रही है। मौजूदा हालात यह है कि क्राइम विंग में जांच के लिए इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर (आईओ) कम हैं। सीआईडी के पास 76 केस हैं। इनमें 2013 से 2017 तक के केस हैं। हत्या से लेकर फ्रॉड तक के ये बड़े केस हैं। इनकी जांच के लिए सीआईडी के पास 10 से 11 आईओ ही हैं। केसों के हिसाब से देखें तो एक आईओ के हिस्से सात केस पड़ते हैं। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि जांच किस तेजी से आगे बढ़ पाएगी। ऐसे में जरूरत है क्राइम विंग को मजबूत बनाने की। सीआईडी क्राइम विंग में आईओ बढ़ाने के साथ ही अन्य जांच के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध करवाने की भी जरूरत है, तभी मामले समय पर सुलझेंगे और पीड़ितों को भी न्याय मिल सकेगा।

सरकार की ओर से सीआईडी क्राइम को केस तो सौंपे जाते हैं, मगर स्टाफ की तरफ ध्यान नहीं, कैसे समय पर पूरी होगी जांच

केस एक: 45 लाख रुपए के गबन की जांच

कुल्लू जिले के पतलीकूहल स्थित एक बैंक में हुए 45 लाख रुपए के गबन की जांच सीआईडी के पास है। 2015 में सामने आए गबन मामले में 15 केस दर्ज किए गए हैं। मामले में लोगों ने पटवारी के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज बनाए और बैंक से लोन लिया। बाद में लोन चुकाया ही नहीं। लोन न चुकाने पर बैंक ने कागजात जांचें तो सभी फर्जी निकले। यह पता चलने पर बैंक ने पुलिस में मामला दर्ज कराया।

केस दो : फर्जी दस्तावेज बनाकर वाहन चोरी

मंडी जिले में लग्जरी वाहन चोरी मामला। वर्ष 2016 में सामने आए इस मामले में बाहरी राज्यों से चोरी वाहन यहां फर्जी दस्तावेज बनाकर बेचे गए। इसमें पुलिस के कुछ लोग भी शामिल थे। इसमें एक एचएएस अधिकारी, एक एमबीआई की संलिप्तता भी पाई गई है। इस बड़े मामले में करीब अलग-अलग केस बनाए गए हैं। इनमें कई मामलों की जांच अंतिम चरण में है।

थाने में ही जांच के लिए आईओ पूरे नहींसीआईडी का भराड़ी में पुलिस स्टेशन है। राज्य स्तर के इस पुलिस स्टेशन में ही सरकार जांच के लिए पूरे आईओ उपलब्ध नहीं करवा पाई है। यहां पर डीएसपी समेत पांच आईओ हैं, जिनके पास 23 से 25 केस हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार क्राइम विंग को लेकर कितनी गंभीर है। आईओ की कमी के कारण क्राइम विंग को खासी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

इन मामलों की भी जांच सीआईडी के पास पांवटा में एक फैक्ट्री में करोड़ों रुपए के घपले, कुल्लू में हुई विदेशी पर्यटक की मौत, कंडाघाट बाबा प्रकरण, कांगड़ा में एक युवक की हत्या, ध्रुव लखनपाल केस, पुलिस थाना कोटखाई को जलाने के मामले की भी सीआईडी जांच कर रही है।

जब पुलिस, सीबीआई फेल रही तो सीआईडी ने सुलझाए केस

रामबाजार निवासी चार वर्षीय युग अपहरण एवं हत्या केस को सुलझाने में जब पुलिस फेल रही तो सीआईडी क्राइम को यह केस साैंपा गया। करीब छह माह बाद हाथ में आए इस केस को सीआईडी न केवल सॉल्व किया, बल्कि हत्यारोपी भी सलाखों के पीछे पहुंचाए। इस केस का कोर्ट में ट्रायल चल रहा है। इसी तरह शिमला की ही एक शिक्षिका के आत्महत्या मामले को भी सीआईडी ने ही सॉल्व किया। महत्वपूर्ण यह है कि इस केस में सीबीआई क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर चुकी थी। सीआईडी ने आत्महत्या मामले में शिक्षिका के पति को आरोपी बनाया है और उस पर आत्महत्या के लिए मजबूर करने का केस चलेगा।

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Web Title: 76 बड़े केसों की जांच के लिए 11 इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर
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