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नई पटरी तो दूर, पुरानी रेल लाइनों के विस्तार केे लिए भी हिमाचल को कुछ नहीं मिल पाया

केंद्र सरकार के बजट पर हिमाचल के संदर्भ में नजर दौड़ाएं तो न कोई नई रेल पटरी हाथ लगी आैर ही पुरानी पर काम तेजी से...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:05 AM IST

केंद्र सरकार के बजट पर हिमाचल के संदर्भ में नजर दौड़ाएं तो न कोई नई रेल पटरी हाथ लगी आैर ही पुरानी पर काम तेजी से होने की घोषणा। 70 लाख की आबादी वाले प्रदेश के लोग केंद्रीय बजट से इस बार उम्मीद लगाए थे। केंद्र में भाजपा सरकार तो हिमाचल में भी लोगों ने भाजपा को मौका दिया है, इसके बदले में पहाड़ी राज्य के लोग तोहफे की उम्मीद कर रहे थे। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपना बजट भाषण शुरू आैर खत्म कर दिया। इसमें हिमाचल का नाम तक नहीं आया। प्रदेश में बन रही रोहतांग टनल का काम पूरा हो गया है, इसका जिक्र जरुर किया गया। उड़ान योजना के तहत हैली टैक्सी योजना का लाभ हिमाचल को मिलना है, इसकी घोषणा पहले ही पीएम कर चुके हैं। पर्यटन को लेकर केंद्र ने योजना तैयार की है, लेकिन यह किसी राज्य के लिए विशेष नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक तरह की होगी। हिमाचल सरकार का काफी बजट केंद्रीय प्रायोजित स्कीमों पर निर्भर रहता है। इस बजट में यह सुखद रहा कि केंद्र की आेर से केंद्रीय प्रायोजित स्कीमों में रखे सालाना बजट में कटौती नहीं है। इसके बजट में केंद्र सरकार ने 14 हजार करोड़ का इजाफा किया है। चालू वित्त वर्ष में इसके लिए 2 लाख 63 हजार करोड़ का प्रावधान था, इसमें अगले वित्तीय वर्ष के लिए बढ़ाकर केंद्र सरकार ने 2 लाख 77 हजार करोड़ करने का प्रावधान किया है। इससे हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों की एक चिंता तो साल भर के लिए कम से कम खत्म है कि केंद्र प्रायोजित स्कीमों में कट लगा तो वित्तीय स्थिति आेर खराब हो सकती थी। अरुण जेटली के बजट से रेल लाइन ब्राडगैज करने से लेकर नई रेल लाइनों की सूची में हिमाचल के नाम शामिल होने की उम्मीद थी, लेकिन इसमें जनता को निराशा ही हाथ लगी है। उड़ान योजना में हिमाचल को लाभ मिलना है। इसकी घोषणा पहले ही हो चुकी है।

केंद्रीय स्कीमों से हिमाचल को मिलता है 3 हजार करोड़

टैक्स से साढ़े छह हजार करोड़ का राजस्व जुटाने वाले हिमाचल को 3000 करोड़ केंद्र प्रायोजित स्कीमों से मिलता हैे। इसमें स्वास्थ्य, आईपीएच से लेकर शहरी विकास विभाग की स्कीमें शामिल रहती है। इसके अलावा केंद्र दारा प्रायोजित कई स्कीमें ऐसी भी है, जहां हजारों कर्मचारियों का रोजगार चलता है। इस कारण केंद्रीय प्रायोजित स्कीमों में कटौती राज्य को काफी प्रभावित करती है। केंद्र की बढ़ोतरी के बाद राज्य को इसमें सौ से दो सौ करोड़ के इजाफे की आस है।

रोहतांग टनल का नाम आते ही टिकी थी सभी की नजरें

रोहतांग टनल का नाम जैसे ही केंद्रीय वित्त मंत्री नेअपने बजट भाषण में लिया तो हिमाचल के लोगों की नजरें टीवी पर अटक गई, सभी ने उम्मीद लगाई कि इसके लिए कुछ घोषणा हो सकती है। इस पर भी केंद्रीय मंत्री की आेर से कोई घोषणा हिमाचल के लिए नहीं की गई।

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Web Title: नई पटरी तो दूर, पुरानी रेल लाइनों के विस्तार केे लिए भी हिमाचल को कुछ नहीं मिल पाया
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