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2.5 लाख कर्मियों और 1 लाख पेंशनरों को झटका, नहीं बढ़ा है टैक्स स्लैब

मोदी सरकार के बजट ने राज्य के 2.5 लाख कर्मचारियों आैर एक लाख पेंशनरों की टैक्स स्लैब में इजाफा की उम्मीद तोड़ दी है।...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 02:05 AM IST
2.5 लाख कर्मियों और 1 लाख पेंशनरों को झटका, नहीं बढ़ा है टैक्स स्लैब
मोदी सरकार के बजट ने राज्य के 2.5 लाख कर्मचारियों आैर एक लाख पेंशनरों की टैक्स स्लैब में इजाफा की उम्मीद तोड़ दी है। केंद्र सरकार के बजट में टैक्स डिडक्शन को दोबारा से लागू किया है, लेकिन इसके साथ ही सेस में एक फीसदी का इजाफा कर दिया है। इनके अलावा राज्य में टैक्स अदा करने वाले कारोबारियों को कोई राहत नहीं हैं, उन्हें टैक्स पर एक फीसदी ज्यादा सेस अदा करना होगा। इससे कर्मचारियों को राहत की बजाय ज्यादा टैक्स देना पड़ सकता है। वहीं केंद्रीय कर्मचारियों को मेडिकल बिलों की वापसी पर 15 हजार की छूट के साथ 19 हजार 200 की दूसरी टैक्स छूट को खत्म कर दिया हैं। हिमाचल के आयकरदाता कारोबारियों को इस बजट से टैक्स में कोई राहत नहीं हैं। उन्हें पहले के मुकाबले एक फीसदी ज्यादा सेस कुल टैक्स पर अदा करना होगा। राज्य में टैक्स अदा करने वाले कारोबारियों की संख्या एक लाख के लगभग होगी। इन्हें पहली अप्रैल से ज्यादा टैक्स अदा करना होगा, हालांकि यह सेस शिक्षा आैर स्वास्थ्य के क्षेत्र में ही बढ़ाया है, लेकिन इसमें इजाफा बजट के बाद तय है।

औद्योगिक जगत निराश: हिमाचल में भाजपा की सरकार बनने के बाद से लगातार ही आैद्योगिक पैकेज की बात चल रही है। केंद्र सरकार से राज्य सरकार ने भी राज्य में लगने उद्योगों को आयकर, कैपिटल आैर ट्रांसपोर्ट में सब्सिडी का मामला उठाया है। इस बजट में राज्य को इस मसले पर भी कोई राहत नहीं मिली, हालांकि विशेष राज्य का दर्जा मिलने के बाद राज्य इसका पैकेज मिलने की उम्मीद बंध गई थी। अब इसके लिए राज्य की नई सरकार को अलग से काम करना होगा।

राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ के महासचिव विपिन डोगरा ने कहा कि बजट निराशाजनक है। टैक्स स्लैब में जो इजाफा नहीं किया है, यह निराशाजनक है।

कर्मचारी विरोधी है बजट, 5 लाख होनी चाहिए टैक्स छूट

राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष एसएस जोगटा ने केंद्र सरकार के इस बजट को कर्मचारी विरोधी करार दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने टैक्स स्लैब में कोई छूट नहीं दी है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को भी विधायकों की तर्ज पर सस्ता ऋण मिलना चाहिए। इस पर केंद्र सरकार ने बजट में कोई प्रावधान नहीं किया है।

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