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इन 20 पाठकों ने 5 सवालों के सबसे पहले सही जवाब दिए

िकरण कुमार बंसल, अजमेर  बीना राजेश शाह, वडोदरा  अिभजीत िसंह, नई िदल्ली  चौधरी चेतन पार्थिभाई, पालनपुर  शैलेष...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 02:05 AM IST
इन 20 पाठकों ने 5 सवालों के सबसे पहले सही जवाब दिए
िकरण कुमार बंसल, अजमेर  बीना राजेश शाह, वडोदरा  अिभजीत िसंह, नई िदल्ली  चौधरी चेतन पार्थिभाई, पालनपुर  शैलेष पंडित, जहानाबाद

 शेठ गौरंगकुमार, सूरत  विष्णु शर्मा, दौसा  सिसौदिया महिपालसिंह, वडाली  केशव शर्मा, कोटपुतली  साजिद हामिदभाई, पालघर  पिंकी पाठक, ऊना  जानवी, वडोदरा  मोहन हिरानी, भोपाल  मनोज गोयल, गुजरात  शंभू, गादरी, अहमदाबाद  राकेश तिवारी, जयपुर  नीरज सुंदा, सीकर  जावेद खान, बारां  हरीश आजाद, रोहतक  विकास सांगवान, िभवानी

जेटली फिर आर्थिक नियति बदलने वाला साहस न दिखा सके

ब जट में अच्छी बात यह है कि किसानों को काफी कुछ मिल सकता है। न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाना यह भाजपा का बहुत पुराना वादा है और अच्छी बात है कि अंतत: यह पूरा हुआ। किसानों को हमेशा दोनों तरफ अच्छा मिल जाता है। यही वजह है कि हमारे इतने सारे सांसद जताते रहते हैं कि वे किसान हैं। वे आयकर नहीं चुकाते और अब उनकी खरीफ फसल से उन्हें 50 फीसदी के मुनाफे की गारंटी है। कोई बुरी बात नहीं है खास तौर पर तब जब हममें से ज्यादातर लोग बिज़नेस में नफा-नुकसान बराबर ही कर पाए तो खुद भाग्यशाली मानेंगे।

स्वास्थ्य रक्षा में पहल का स्वागत है। गरीब परिवार एक गंभीर बीमारी के प्रहार से पूरी तरह बर्बाद हो जाते हैं। उम्मीद है कि अंतत: यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य रक्षा कार्यक्रम का हिस्सा बनेगा। इससे कई कम आय वाले परिवार हेल्थकेयर की बढ़ती लागत से निपट पाएंगे अौर दरिद्र होेने से बच जाएंगे। ईश्वर न करें परिवार में किसी को ऐसा रोग हो जाए जिस पर अस्पताल में लंबे संघर्ष के बाद िवजय पाई जा सके।

मध्यमवर्ग को वाकई कुछ नहीं मिला। बल्कि उसे तो कैपिटल गेन्स टैक्स भी देना होगा, जो मुझे लगता है शेयर बाजार के उत्साह को खत्म कर देगा। निवेशक शेयर और इक्विटी म्युच्युअल फंड में पैसा लगाने के पहले दो बार सोचेंगे। कम से कम अभी तो यही दशा होगी। लेकिन बैंकों की ब्याज दरें देखते हुए मेरा अनुमान है कि उनके पास इक्विटी म्युच्युअल फंड में बने रहने के अलावा चारा नहीं है। पेंशनभोगियों को आंशिक मार पड़ेगी। उन्हें कुछ तो मिला है लेकिन, ऐसा कुछ भी नहीं है कि उनका पूरा भला करे।

वैश्विक चलन और ट्रम्प द्वारा अमेरिका में कॉर्पोरेट टैक्स 35 से 21 फीसदी लाने से जिन कॉर्पोरेट्स को इसकी उम्मीद थी, वे बहुत हताश हुए हैं। हमें कॉर्पोरेट टैक्स को अधिक तर्कसंगत स्तर पर लाना होगा। इतने स्तर पर कि विदेशी निवेशक इतने दूर आकर भारत में अपना पैसा लगाएं। वरना उनके लिए भारत में निवेश के कारण घटते ही जाएंगे। मुझे लगता है 18 फीसदी का मतलब होगा अधिक निवेश और अधिक विदेशी निवेश का मतलब होगा भारतीयों के लिए अधिक जॉब।

हम भूतकाल से ( और शेष दुनिया से भी) अब भी कुछ नहीं सीखे हैं कि जितना कम टैक्स आप लगाएंगे उतना उसका बेहतर पालन होगा और उतना अधिक टैक्स इकट्ठा होगा। लेकिन, यहां कोई सरकार यह जोखिम लेने को तैयार नहीं है। यह दुखद है।

कुल-मिलाकर ओके बजट है, जिसे पर्याप्त नहीं कहा जा सकता। कल्पनाहीन, पर्याप्त साहस का अभाव, लेकिन खराब तो बिल्कुल नहीं है। 10 के पैमाने पर मैं तो 4 अंक दूंगा। मेरा मानना है कि अरुण जेटली इससे बेहतर कर सकते थे। वे स्मार्ट हैं, जानते हैं कि दुनिया में क्या चल रहा है और भारतीय वित्त नीति पर अपनी छाप छोड़ना चाहेंगे। मुझे अचरज है कि हर बार वे खुद को वह करने से रोक क्यों लेते हैं, जो भारत की आर्थिक नियति बदल सकता है। यही बात मुझे चिंतित कर देती है।

सियासी बजट

गुजरात याद रहा, इसलिए गांव-गरीब पर ध्यान

 ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर की राशि और कृषि ऋण लक्ष्य

में इजाफा। सभी फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य भी देने जा रही है। 1 करोड़ घर बनेंगे। गरीबों को 5 लाख सालाना तक का स्वास्थ्य बीमा।

मायने: मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में भी भाजपा की स्थिति गुजरात सी। इसलिए यहां के ग्रामीण वोटों पर नजर।

 उज्ज्वला योजना के तहत 3 करोड़ और गरीब महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन देंगें। महिलाओं को जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित करने की भी बात। नौकरीपेशा महिलाओं का पीएफ भी सिर्फ 8% काटा जाएगा।

मायने : 2009 में 18% रहा बीजेपी का महिला वोट बैंक 2014 में 29% था। इसे बरकरार रखने का प्रयास।

 नए रोजगार पैदा करने के लिए खर्च 20 फीसदी बढ़ाया। सरकार ने 70 लाख नई नौकरियों का एेलान भी किया। इसके अलावा ईपीएफ में भी अपना योगदान बढ़ाया है।

मायने : गुजरात में इनकी नाराजगी झेली। 52% में से 38% कांग्रेस के साथ चले गए। इसलिए बड़े कदम।

गांवों में बुरी तरह पिटी थी भाजपा, युवाओं की नाराजगी भी झेलनी पड़ी थी

किसान-आिदवासियों को साधने की कोशिश, कर्नाटक में मेट्रो के बहाने शहरी वोटर्स पर नजर

मध्यप्रदेश : नाराज किसान को मनाने की कोशिश

15 साल से बीजेपी सत्ता में। एंटी इन्कम्बेंसी। किसान नाराज। ऐसे में सभी फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का ऐलान, वह भी लागत से 1.5 गुना ज्यादा, यहां के किसानों से जोड़कर देखा जा रहा है। इसलिए भी कि मंदसौर गोलीकांड, फसल के कम दाम, वादे पूरे न होने से किसानों में गुस्सा है। वहीं बजट के माध्यम से यहां आदिवासियों को साधने का प्रयास भी है। राज्य में 21% आदिवासी हैं।

राजस्थान : व्यापार-रोजगार का वादा

यहां हर बार सरकार बदलने का ट्रेंड। सातवें वेतनमान की वजह से निराशा। जाट और गुर्जर आरक्षण की मांग से असंतोष है। ऐसे में यहां जनाधार बरकरार रखने के लिए भाजपा किसानों के अलावा व्यापारी वर्ग और बेरोजगार युवा पर निगाहे रखे हुए है। टेक्सटाइल के लिए मंजूर 1 हजार करोड़ रुपए यहां फायदा पहुंचाएंगे। इसलिए कि राज्य में भीलवाड़ा सहित कुछ अन्य क्षेत्र टेक्सटाइल सेंटर हैं।

उत्तर-पूर्व के चार राज्यों में भी इस साल चुनाव होने हैं। एेसे में एकलव्य स्कूल तथा बांस पैदावार को लिए 1290 करोड़ के प्रवाधान से भाजपा यहां फायदा तलाशेगी। मेघालय में 86.2%, नागालैंड में 86.4%, त्रिपुरा में 31.1%, मिजोरम में 94.4% आदिवासी हैं।

4 राज्य ये भी

बजट सार

इंफ्रा से फूड जाेन तक कमाई करने और बढ़ाने के मौके

ऐसे होगी आमदनी

एमएसएमई से जुड़े जाॅब्स 5%, इन्फ्रा के 10% बढ़ेेंगे

250 करोड़ सालाना टर्नओवर वाली छोटी कंपनियों के लिए इनकम टैक्स को घटाकर 25 फीसदी करना। मुद्रा स्कीम में राशि और मध्यम एवं लघु उद्योगों के लिए आर्थिक मदद बढ़ाना। और नए कर्मचारियों के ईपीएफ में सरकार द्वारा 12% फंडिंग। इनसे इन उद्योगों में निवेश बढ़ेगा। इनकी क्षमता बढ़ेगी और रोजगार में भी इजाफा होगा। फिलहाल मध्यम एवं लघु उद्योग 12.5 करोड़ लोगों के रोजगार का जरिया है, जो इन उपायों से एक साल में 5 फीसदी और बढ़ सकता है। वैसे सरकार के अनुसार इसके इन उद्योगों से जुड़े 49 हजार प्रोजेक्ट 2.94 रोजगार दे सकते हैं। इसी तरह 12 मेगा फूड पार्क की स्थापना से 95 हजार लोगों को रोजगार देने का दावा सरकार खुद कर रही है। कोल्ड चेन के 101 प्रोजेक्ट प्रत्यक्ष तौर पर 12 हजार और अप्रत्यक्ष रूप से 63 हजार रोजगार दे सकते हैं। वहीं स्वच्छ भारत मिशन के तरह प्रस्तावित 1.88 करोड़ टॉयलेट्स के लिए 16.92 करोड़ कार्यदिवस की जरूरत होगी। इसके अलावा सस्ते मकान, रोड तथा एयरपोर्ट से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से इस क्षेत्र में रोजगार में 10 फीसदी और इजाफा देखा जा सकता है।

निवेश माध्यम जिनके अगले साल बेहतर परफॉर्मेंस का अनुमान है। साथ में बजट के दिन उन कंपनियों का हाल, जिन्होंने 1 साल में सबसे ज्यादा ग्रोथ दर्ज की है। ताकि आप निवेश के बेहतर फैसले ले सकें।


निवेश के प्रमुख छह माध्यमों में से मौजूदा वित्त वर्ष के 10 महीने के दौरान लोगों ने सबसे ज्यादा पैसा म्युचुअल फंड से बनाया है। इस मामले में गवर्नमेंट

बॉन्ड्स, रियल एस्टेट इसके बाद रहे। इस साल भी म्युचुअल फंड के सबसे बेहतर रिटर्न देने का अनुमान है। बजट घोषणाओं में सरकार ने हाउसिंग फॉर ऑल के लक्ष्य को पाने के लिए रियल एस्टेट सेक्टर पर जोर दिया है। वहीं दूसरी ओर फंड-इक्विटी मार्केट को सपोर्ट करने के लिए सरकार ने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की वापसी की है। वहीं सुस्त पड़े रियल एस्टेट सेक्टर को रफ्तार देने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। बजट के ऐलान के साथ ही यह भी साफ हो गया है कि इसमें की गई घोषणाओं या प्रावधानों से किस-किस क्षेत्र को फायदा या नुकसान हुआ है या होने वाला है। इस बजट में बुज़ुर्गों को ध्यान में रखते हुए फिक्स्ड डिपॉजिट में 10 हजार रुपए की छूट को चार गुना बढ़ाकर 50 हजार रुपए किया गया है, जो सामान्य निवेशक के लिए नहीं है। यह कमोबेश ‘प्रधानमंत्री वय वंदना योजना’ के करीब है। वहीं सरकार ने निम्न और मध्यम वर्ग को ध्यान में रखते हुए गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम को और आसान बनाने की कोशिश की है। इसका फायदा भविष्य में मिलेगा।

मनी & पॉलिटिक्स

इन सेक्टर्स पर सरकार के फोकस से बेहतर रिटर्न और जॉब के मौके बढ़ने की उम्मीद

इस बजट के बाद अब आमदनी कैसे बढ़ाएं?

बजट भाषण में जेटली ने जब फिस्कल डेफिसिट बढ़ने की बात की तो बाजार में गिरावट आ गई। इसके बाद लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स पर 10% टैक्स की घोषणा से गिरावट और तेज हो गई। साल में सबसे बेहतर परफॉर्म करनी वाली पांच कंपनियों में से चार के शेयर गिरे।

बजट में दवाओं की कीमतों को कंट्रोल किया गया है। दूसरी तरफ अमेरिका में ट्रम्प प्रशासन ने भी दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण का फैसला किया है। इन दोनों फैसलों का असर फार्मा सेक्टर के शेयरों पर पड़ा है।

छत्तीसगढ़ : 32.5% आदिवासियों पर फोकस

तीन बार से बीजेपी की सरकार। पिछली बार बड़ी मुश्किल से जीते थे। ऐसे में आबादी में 32 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले आदिवासियों पर पार्टी का फोकस है। एकलव्य स्कूल इसी फोकस का नतीजा है। किसानों को दी गई राहत से यहां भी फायदा तलाशने की कोशिश होगी। क्योंकि राज्य में 2015-16 में करीब 252 किसानों ने कर्ज, गरीबी और बीमारी से तंग आकर आत्महत्या की।

कर्नाटक : मेट्रो से लुभाने की कवायद

यहां कांग्रेस की सरकार है। भाजपा के पास भ्रष्टाचार में घिरे येदियुरप्पा के अलावा विकल्प नहीं है। गुजरात चुनावों को देखते हुए भाजपा के लिए चुनौती और कड़ी नजर आ रही है। ऐसे में बेंगलुरू मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए 17 हजार करोड़ की घोषणा की गई है। इससे केंद्र ने राज्य में रेलवे को और आधुनिक करने के साथ-साथ युवाओं में रोजगार बढ़ने की उम्मीद जगाई है। यहां 4.5 करोड़ मतदाता हैं।

ऐसे बढ़ेगी आमदनी

रोड, सीमेंट, कैपिटल गुडस में खरीदारी का रुख

सरकार ने बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। इस वजह से आने वाले समय में रोड, सीमेंट, कैपिटल गुड्स हेल्थकेयर और एविएशन सेक्टर में शेयर की खरीदारी का रुख देखने को मिल सकता है। इससे इन सेक्टर्स में डिमांड बढ़ेगी जिसकी वजह से उत्पादन भी बढ़ेगा। हाउसिंग सेक्टर के लिए घोषणाओं से रियल एस्टेट और इससे जुड़े टाइल्स, सीमेंट और हाउसिंग फाइनेंस में खरीदारी देखी जा सकती है। ऐसे में यहां निवेश एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

बजट में रेलवे और रोड के लिए 9.46 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इनके अलावा ग्रामीण विकास से जुड़ी बड़ी घोषणाएं भी इसमें शामिल हैं। इस वजह से इंफ्रास्ट्रक्चर और उससे जुड़े सेक्टर के अलावा फर्टिलाइजर, एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर में खरीदारी का रुख देखने को मिल सकता है। जीडीपी बढ़ाने के लिए बजट में गांव, किसानों के अलावा रोजगार में बड़ी भूमिका निभाने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए कई बड़े ऐलान किए गए हैं।

शिमला, शुक्रवार, 2 फरवरी 2018

किसान को कर्ज ताकि चक्रव्यूह में फंसे

क लिंग राज्य में मंगरू नाम का किसान रहता था। शरीर से दुबला-पतला। प्राण और ऋण- इन दो चीजों ने ही उसका साथ कभी नहीं छोड़ा था। बाकी प|ी-बच्चे सब छोड़कर जा चुके थे। सिर से पैर तक कर्ज में डूबा मंगरू एक दिन मंत्री केशवनाथ के पास पहुंचा और सवाल किया कि मेरी स्थिति कब सुधरेगी? आपके खजाने से खूब ऋण भी मिलता है, लेकिन न मैं किसी को जानता हूं, न कोई मुझे सही सलाह दे पाता है। जवाब देने के बजाय मंत्री केशवनाथ ने उसे एक दर्पण दे दिया और कहा कि ये कमियां बताता है। मंगरू दर्पण लेकर अपने मित्रों और घरवालों तक सबके पास गया लेकिन उसे उनकी कमियां ही दिखीं। उसे लगने लगा कि इस दर्पण के कारण वो और परेशान रहने लगा है। ऐसे में वो इसे वापस करने केशवनाथ के पास पहुंचा। और स्थिति बताई। केशवनाथ ने कहा कि मैंने तुम्हे दर्पण इसलिए नहीं दिया था कि तुम दूसरों की कमियां देखों। बल्कि तुम अपनी कमियां पहचानों।

मंत्री की इस चतुराई को देख किसान ने एक विद्वान ब्राह्मण से सवाल किया मंत्रीजी दर्पण से क्या कहना चाह रहे थे।

जवाब मिला- वे कह रहे थे कि हम तुम्हें ऋण इसलिए नहीं देते हैं कि तुम्हारी स्थिति सुधर जाए। बल्कि हम करोड़ों का ऋण इसलिए बांटते और माफ करते हैं कि तुम हमेशा हमें ही चुनो और फिर से कर्ज के चक्रव्यूह में फंस जाओ।

अगले साल रिटर्न में सबसे ज्यादा गिरावट गवर्नमेंट बॉन्ड्स में देखने को मिल सकती है।

*अगले वित्त वर्ष के रिटर्न अनुमानित। रियल स्टेट का रिटर्न जगह और इलाके के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है।

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