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आचार संहिता लगने वाले दिन ही किया गया सिंगल टेंडर, जांच शुरू

कमर्शियल व्हीकल (व्यवसायिक वाहनों) में ट्रैकिंग डिवाइस लगाने का काम शुरू होने से पहले ही विवादों से घिर गया है।...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 02:05 AM IST
कमर्शियल व्हीकल (व्यवसायिक वाहनों) में ट्रैकिंग डिवाइस लगाने का काम शुरू होने से पहले ही विवादों से घिर गया है। आरोप है कि पूर्व कांग्रेस सरकार के समय में इस काम के आवंटन में अनियमितता बरती गई। कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को दरकिनार किया गया। परिवहन विभाग ने इस कार्य के लिए टेंडर जारी किया। इस कार्य के लिए सिर्फ एक ही कंपनी आई।

सिंगल टेंडर आने के बावजूद काम का आवंटन किया गया। जबकि नियम इसकी इजाजत नहीं देते थे। 12 अक्टूबर को विधानसभा चुनावों की आचार संहिता लगने से ठीक पहले इसके लिए जल्दबाजी में एग्रीमेंट साइन किया गया। औपचारिकता पूरी न होने के चलते इसकी नोटिफिकेशन जारी नहीं की गई। पूर्व कांग्रेस सरकार के समय अंतिम 6 महीनों के कार्यों की समीक्षा के दौरान ये मामला सामने आया। विभाग ने इसकी फाइल परिवहन मंत्री को भेजी। अनियमितता सामने आने के बाद इस पर जांच बिठा दी गई है। बता दें कि केंद्र सरकार के आदेश के बाद प्रदेश में दो लाख कमर्शियल वाहनों में ट्रैकिंग डिवाइस (जीपीएस) लगने थे।

केंद्र ने दिए थे आदेश

केंद्र ने सभी कमर्शियल वाहनों के लिए जीपीएस और स्पीड गर्वनर लगाने के आदेश राज्यों को दिए थे। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार इन दिशा निर्देशों के तहत भारी वाहनों की सीमा 60 किमी प्रतिघंटा और बस व सवारी वाहनों की गति सीमा 80 किमी प्रति घंटा तय की जा रही है। ये दिशा निर्देश सड़क की स्थिति को देखकर किए गए है। मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में चलने वाले व्हीकल्स की स्पीड अलग-अलग होगी। ऐसे वाहनों में स्टेज कैरिज वाहन, कॉन्ट्रेक्ट कैरिज वाहन, मैक्सी कैब, ओमनी, बस, डंपर, टैंकर, स्कूल बस शामिल हैं। स्पीड गवर्नर और ट्रैकिंग डिवाइस लगने के बाद डंपर, टैंकर,स्कूल बस की स्पीड 60 किमी प्रति घंटा और अन्य माल वाहन व यात्री वाहनों को अधिकतम गति 80 किमी प्रति घंटा रहेगी। इससे दुर्घटनाओं में कमी आएगी।

ऐसे काम करता है टैंपर प्रूफ स्पीड गवर्नर

टैंपर प्रूफ स्पीड गवर्नर गतिरोधक उपकरण या मीटर होता है। यंत्र वाहन के अंदर बिजली मीटर की तरह काम करेगा। मीटर को तय मानक गति से सील होगा, जिसके कारण उससे ज्यादा गति से संबंधित वाहन को नहीं चलाया जा सकेगा। इस मीटर में कोई भी वाहन चालक गति को घटाने या बढ़ाने के लिए छेड़छाड़ नहीं कर सकेंगे। यदि ऐसा होता है तो मीटर से छेड़छाड़ करने पर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

विभाग से रिकाॅर्ड तलब, कार्रवाई होगी: परिवहन मंत्री

परिवान मंत्री गोविंद ठाकुर ने कहा कि मामला ध्यान में आया है। सिंगल टैंडर आने के बाद ही काम उसी कंपनी को दिया गया। उससे लग रहा है कि कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया हो। इस मामले का पूरा रिकार्ड मंगवाया गया है। इसमें ये भी पूछा गया है कि ऐसी क्या जल्दी थी कि आचार संहिता वाले दिन ही एग्रीमेंट साइन करना पड़ा। कौन लोग इस कार्य में शामिल थे।यदि मामले में अनियमितता पाई जाती है तो दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

जांच के बाद मंत्रीमंडल में रखा जाएगा मामला

केंद्र का कहना था कि इस योजना के अमल में आने के बाद सभी राज्यों में होने वाली दुर्घटनाओं पर लगाम लगेगी। प्रदेश में योजना शुरू होने के पहले ही विवाद शुरू हो गया है। जांच के बाद राज्य सरकार ये मामला मंत्रिमंडल में रखेगी। अगर इसमें अनियमितता पाई जाती है तो कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा इस योजना के लिए दोबारा टेंडर कॉल करने होंगे। साथ ही नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करनी होगी।