--Advertisement--

खेल विधेयक का भाजपा ने किया था विरोध,अब इसे वापस लेगी सरकार

पूर्व कांग्रेस सरकार के बहुचर्चित खेल विधेयक को सरकार वापस लेगी। इसके लिए पहले विधानसभा से मंजूरी ली जाएगी।...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 02:05 AM IST
पूर्व कांग्रेस सरकार के बहुचर्चित खेल विधेयक को सरकार वापस लेगी। इसके लिए पहले विधानसभा से मंजूरी ली जाएगी। विधानसभा में प्रस्ताव पेश करने से पहले सरकार मंत्रिमंडल से स्वीकृति लेगी। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद सरकार खेल विधेयक को राजभवन से वापस मंगवाएगी। दो अप्रैल को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में इस बारे चर्चा की जाएगी। मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों से इस बिल को वापस मंगवाने के बारे में उनसे उनकी राय ली जाएगी। खेलमंत्री की इस संबंध में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से पहले ही चर्चा हो चुकी है। अब मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों से इस बारे चर्चा की जानी है।

राजभवन से खेल विधेयक को वापस मंगवाने के लिए पहले विधानसभा से मंजूरी लेनी पड़ती है। ऐसे इसलिए क्योंकि पूर्व की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इस बिल को विधानसभा की मंजूरी मिलने के बाद ही इसे राजभवन भेजा गया था। अब इस विधेयक में किसी भी तरह के संशोधन या बिल संबंधी किसी भी तरह का निर्णय लेने के लिए बिल का पहले वापस मंगवाना होगा और विधानसभा से मंजूरी मिलने के बाद ही सरकार पूर्व के बनाए गए खेल विधेयक पर कोई निर्णय ले सकती है। इस बिल को राजभवन से वापस लाने को लेकर सरकार ने विधि विभाग से भी राय मांगी है। खेल विधेयक दो साल से राजभवन में लंबित है। इस बिल को राज्यपाल की मंजूरी न मिल पाने के कारण सरकार इसे लागू नहीं कर पाई है।

यह है पूरा मामला

राज्य की पूर्व वीरभद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2015-16 के बजट सत्र के दौरान हिमाचल प्रदेश खेल विधेयक-2015 को पारित किया था। इस बिल के दायरे में क्रिकेट सहित 42 खेल संगठनों को लाया गया था। इस बिल को विपक्ष में बैठी भाजपा के भारी विरोध के बावजूद तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने पारित करवा दिया था। भाजपा इस विधेयक को लाने का इसलिए विरोध कर रही थी क्योंकि उसका तर्क था कि कांग्रेस सरकार का मकसद हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन पर शिकंजा कसना है। प्रदेश में अभी तक क्रिकेट या कई अन्य खेलों से जुड़े संगठनों को नियंत्रित करने के लिए सरकार का अपना कोई कानून नहीं है।

पूनम भारद्वाज | शिमला

पूर्व कांग्रेस सरकार के बहुचर्चित खेल विधेयक को सरकार वापस लेगी। इसके लिए पहले विधानसभा से मंजूरी ली जाएगी। विधानसभा में प्रस्ताव पेश करने से पहले सरकार मंत्रिमंडल से स्वीकृति लेगी। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद सरकार खेल विधेयक को राजभवन से वापस मंगवाएगी। दो अप्रैल को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में इस बारे चर्चा की जाएगी। मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों से इस बिल को वापस मंगवाने के बारे में उनसे उनकी राय ली जाएगी। खेलमंत्री की इस संबंध में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से पहले ही चर्चा हो चुकी है। अब मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों से इस बारे चर्चा की जानी है।

राजभवन से खेल विधेयक को वापस मंगवाने के लिए पहले विधानसभा से मंजूरी लेनी पड़ती है। ऐसे इसलिए क्योंकि पूर्व की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इस बिल को विधानसभा की मंजूरी मिलने के बाद ही इसे राजभवन भेजा गया था। अब इस विधेयक में किसी भी तरह के संशोधन या बिल संबंधी किसी भी तरह का निर्णय लेने के लिए बिल का पहले वापस मंगवाना होगा और विधानसभा से मंजूरी मिलने के बाद ही सरकार पूर्व के बनाए गए खेल विधेयक पर कोई निर्णय ले सकती है। इस बिल को राजभवन से वापस लाने को लेकर सरकार ने विधि विभाग से भी राय मांगी है। खेल विधेयक दो साल से राजभवन में लंबित है। इस बिल को राज्यपाल की मंजूरी न मिल पाने के कारण सरकार इसे लागू नहीं कर पाई है।