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कीवी से किसानों-बागबानों की आर्थिकी हो रही मजबूत

सिरमौर जिले में किसान सेब, अदरक, टमाटर, शिमला मिर्च, फ्रांसबीन व लहुसन जैसे नकदी फसलों के अलावा उन्नत फसलों व अधिक...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:05 AM IST

सिरमौर जिले में किसान सेब, अदरक, टमाटर, शिमला मिर्च, फ्रांसबीन व लहुसन जैसे नकदी फसलों के अलावा उन्नत फसलों व अधिक आमदनी वाली फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। अपनी आर्थिकी को सुदृढृ करने के लिए किवी को नए फल के रूप में विकसित करने का विकल्प चुन लिया है।

जिला के किसान व बागबान पारंपरिक नकदी फसलों से कभी मौसम का मार तो कभी दाम सही न मिलने की मार झेलते आ रहे हैं। सिरमौर जिला के कई हिस्सों में किवी की फसल को उगाया जा रहा है। फसल सही समय पर और अच्छी हो रही है। पिछले पांच वर्षों से देश के महानगरों व बड़े शहरों में किवी की मांग लागतार बढ़ रही है। किवी के कई औषधीय फायदे भी हैं। इसलिए इन शहरोंं में डेंगू बुखार के अलावा अन्य बीमारियों से निपटने के लिए डॉ. रोगियों को किवी खाने की सलाह देते हैं। किवी में भारी मात्रा में विटामिन सी होती है। इसके चलते बाजार में बागवानों को इसका मूल्य 200 रुपए से लेकर 350 रुपए प्रतिकिलो मिल रहा है। कई लोग तो किसानों व बागबानों के घरों से आकर इस फल को खरीद रहे हैं। पिछले कुछ महीनों से किवी की मांग भी पूरी हो पा रही है। सिरमौर जिले के नारग निवासी रिंकू पंवार ने पच्छाद में सबसे पहले किवी का ट्रायल किया था। इसके बाद किवी में अधिक फयदा देखते हुए अन्य किसानों ने भी इसका उत्पादन शुरु किया है। रिंकू पंवार किवी से सालाना 8 से 10 लाख रुपए कमा रहे हैं। इसके अलावा मानगढ़ निवासी सुरेश कुमार, अशोक, रणबीर सिंह, डिंगरी निवासी यशापाल तोमर व नैनाटिक्कर निवासी मदन सिंह आदि किवी का उत्पादन कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें शुरु में थोडी परेशानी आई थी। मगर इसके बाद मार्केटिंग व अन्य उत्पादन संबंधि सभी कार्य आसानी से हो रहे हैं।

मेल और फीमेल पौधे को टच करा कर तैयार किया जाता है फल, 200 से लेकर 350 रुपए मिल रहा मूल्य

डिमांड नहीं हो रही पूरी : डाॅ.वाईएस परमार वानिकी एवं बागवानी यूनिवर्सिटी नौणी पिछले तीन वर्षों से किवी के पौधों की डिमांड भी पूरी नहीं कर पाया है। सिरमौर की नारग उपतहसील के थलेड़ी की बैड़, दाड़ों-देवरिया, मानगढ़ और राजगढ़ में किसानों व बागवानों ने किवी के बगीचे तैयार किए हैं। यहां के किसान व बागवान इन दिनों किवी की फसल से अच्छी आय प्राप्त कर रहे हैं।

क्या कहते हैं उत्पादक : थलेड़ी की बेड के बागवान रिंकू पंवार, सुरेश, अशोक कुमार, रणबीर सिंह, मदन सिंह व राम कुमार आदि ने बताया कि किवी का फल सितंबर माह में तैयार होकर मंडियों में भेजा जाता है। इन दिनों दिल्ली व गाजियाबाद की मंडियों में किवी 150 से 350 रुपए प्रतिकिलो बिक रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के कई अन्य जिलों से किवी के पौधों की मांग लगातार बढ़ रही है। प्रदेश में सेब के पौधे तो आसनी से मिल रहे हैं, मगर किवी डिमांड के बावजूद भी नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा किक डाॅ.वाईएस परमार वानिकी एवं बागवानी यूनिवर्सिटी नौणी मांग के अनुपात में पौधे उपलब्ध नहीं करवा पा रही है।

किवी का पौधा पांच वर्ष में फल देना करता है शुरू

गौरतलब है कि किवी का पौधा पांच वर्षों में फल देना शुरू कर देता है। प्रदेश के बागवानों को एलीसन, हेवाड़, ब्रुनों व मोंटी किस्में नौणी यूनिवर्सिटी द्वारा वितरित की जा रही है। इसमें मेल किस्म अलग से उपलब्ध कराई जाती है। किवी में पोलीनेशन का मुख्य काम होता है। इसमें मेल व फीमेल फूल को टच करा कर फल तैयार किया जाता है। मई में पोलीनेशन के बाद जुलाई-अगस्त में फल लगता है।

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