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लैंडस्लाइड रोकने को ग्रिड टेक्नोलॉजी, 45 डिग्री से ज्यादा ढलान नहीं होगी

शिमला | फोरलेन प्रोजेक्ट शिमला-मटौर (कांगड़ा) के निर्माण को लेकर प्रक्रिया तेज हो गई है। भू-अधिग्रहण कार्य के साथ...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:10 AM IST

लैंडस्लाइड रोकने को ग्रिड टेक्नोलॉजी, 45 डिग्री से ज्यादा ढलान नहीं होगी
शिमला | फोरलेन प्रोजेक्ट शिमला-मटौर (कांगड़ा) के निर्माण को लेकर प्रक्रिया तेज हो गई है। भू-अधिग्रहण कार्य के साथ सर्वे का काम भी शुरू हो गया है। फोरलेन बनने से दूरी 28 किलोमीटर कम हो कर 195 किलोमीटर रह जाएगी। ये निर्माण कार्य 5 चरण में होगा

नेशनल हाइवे अथॉर्टी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने लैंडस्लाइड के खतरे को कम करने को फैसला लिया है कि इस फोरलेन में ग्रिड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। यह तकनीक केवल दो पैकेज में ही इस्तेमाल होगी। ज्वालामुखी से बिलासपुर तक इसकी जरूरत नहीं है। ब्रह्मपुखर से शिमला तक ऊंची पहाड़िया हैं, इसलिए वहां इस टेक्नोलॉजी से सड़क बनेगी। ग्रिड टेक्नोलॉजी से सड़क बनाने पर पहाड़ी पर ढलान भी 45 डिग्री से ज्यादा नहीं बनती है। इस महीने की 24 अप्रैल को सड़क निर्माण के टेंडर खुलेंगे।

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