--Advertisement--

दस शहर होंगे ओडीएफ, शहरी विकास विभाग को भेजा प्रस्ताव

प्रदेश के दस शहरों ने ओडीएफ (बाह्य शौच मुक्त) होने का दावा पेश किया है। इसमें इन शहरी निकायों ने शहरी विकास विभाग को...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 02:10 AM IST
प्रदेश के दस शहरों ने ओडीएफ (बाह्य शौच मुक्त) होने का दावा पेश किया है। इसमें इन शहरी निकायों ने शहरी विकास विभाग को ओडीएफ शहर घोषित करवाए जाने के लिए आवेदन किया है। यह शहर है नालागढ़, बद्दी, रामपुर, कांगड़ा, डलहौजी, कुल्लू, मनाली, मंडी, परवाणु और दाड़लाघाट शहरी निकाय शामिल है। विभाग को मिले आवेदनों को अब विभाग केंद्र सरकार को भेजेगा। केंद्र थर्ड पार्टी से इन शहरों के पूर्णत: बाह्य शौच मुक्त होने का निरीक्षण करवाएगा। इसमें स्कूली बच्चों के लेकर स्थानीय लोगों से इस संबंध में आवश्यक जानकारी हासिल करेगा। निरीक्षण दल खुद भी नई निकायों मे जा कर वहां पर व्यवस्था का जायजा लेगा। निरीक्षण के बाद इसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद इन शहरों को केंद्र सरकार ओडीएफ शहर घोषित करेगी।

ओडीएफ होने पर निकायों को दिया जाएगा नकद पुरस्कार| शहरों के ओडीएफ होने के बाद संबंधित निकाय को नकद पुरस्कार से भी सम्मानित किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने भी एक योजना शुरु की है। इसमें सबसे स्वच्छ और लोगों को अपनी बेहतर सुविधा देने वाले निकायों को एक करोड़ रुपए से लेकर 75 लाख रुपए तक की नकद ईनाम राशि प्रदान की जाएगी। इससे पहले प्रदेश के दस शहरी निकाय अपने आप को पूर्णत: बाह्य शौच मुक्त घोषित किए जाने का इंतजार कर रही है। अभी प्रदेश में सिर्फ अर्की एकमात्र ऐसा शहरी निकाय है जो ओडीएफ है।

चार अप्रैल को सरकार करेगी आकलन

प्रदेश में जिन दस शहरी निकायों ने ओडीएफ के लिए आवेदन कर रखा है केंद्र को उनका प्रस्ताव भेजने से पहले सरकार अपने स्तर पर उनका आंकलन करेगी। इसमें सरकार अपने स्तर पर देखेगी कि जिन निकायों ने दावा किया है वक कितना सही है। इसे लेकर एसीएस तरुण कपूर ने चार अप्रैल को संबंधित निकायों के अधिकारियों के साथ बैठक करके पूरी फीडबैक लेंगे। इसमें वह सारा रिकार्ड चैक किया जाएगा जिसमें शहरों को ओडीएफ घोषित किए जाने की लिए जरुरी होगा। अधिकारियों को भी मौके पर भेज सही स्थिति का पता लगाया जाएगा। चैकिंग के दौरान अगर अधिकारियों को कुछ कमी मिलती है तो उसे दूर करने के लिए कहा जाएगा।

शहरों को 2019 तक बाह्य शौच मुक्त करने का लक्ष्य

प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की तर्ज पर शहरी विकास विभाग ने वर्ष 2019 में सभी 53 निकायों को ओडीएफ करने का लक्ष्य तय किया है। इसी के चलते अब निकाय अपने आप को ओडीएफ घोषित करवाने के लिए आगे आ रही है। हालांकि शिमला इस दौड़ में पीछे है। तीन बार के आवेदन के बाद शिमला को ओडीएफ घोषित नहीं किया जा सका है।

नकद पुरस्कार से भी सम्मानित किया जाएगा: कपूर


भास्कर न्यूज | शिमला

प्रदेश के दस शहरों ने ओडीएफ (बाह्य शौच मुक्त) होने का दावा पेश किया है। इसमें इन शहरी निकायों ने शहरी विकास विभाग को ओडीएफ शहर घोषित करवाए जाने के लिए आवेदन किया है। यह शहर है नालागढ़, बद्दी, रामपुर, कांगड़ा, डलहौजी, कुल्लू, मनाली, मंडी, परवाणु और दाड़लाघाट शहरी निकाय शामिल है। विभाग को मिले आवेदनों को अब विभाग केंद्र सरकार को भेजेगा। केंद्र थर्ड पार्टी से इन शहरों के पूर्णत: बाह्य शौच मुक्त होने का निरीक्षण करवाएगा। इसमें स्कूली बच्चों के लेकर स्थानीय लोगों से इस संबंध में आवश्यक जानकारी हासिल करेगा। निरीक्षण दल खुद भी नई निकायों मे जा कर वहां पर व्यवस्था का जायजा लेगा। निरीक्षण के बाद इसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद इन शहरों को केंद्र सरकार ओडीएफ शहर घोषित करेगी।

ओडीएफ होने पर निकायों को दिया जाएगा नकद पुरस्कार| शहरों के ओडीएफ होने के बाद संबंधित निकाय को नकद पुरस्कार से भी सम्मानित किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने भी एक योजना शुरु की है। इसमें सबसे स्वच्छ और लोगों को अपनी बेहतर सुविधा देने वाले निकायों को एक करोड़ रुपए से लेकर 75 लाख रुपए तक की नकद ईनाम राशि प्रदान की जाएगी। इससे पहले प्रदेश के दस शहरी निकाय अपने आप को पूर्णत: बाह्य शौच मुक्त घोषित किए जाने का इंतजार कर रही है। अभी प्रदेश में सिर्फ अर्की एकमात्र ऐसा शहरी निकाय है जो ओडीएफ है।