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एनेस्थीसिया के डॉक्टर छुट्टी पर तीन दिनों से नहीं हो पा रही हार्ट की सर्जरी

आईजीएमसी में हार्ट रोगियों के लिए एक बार फिर से परेशानी खड़ी हो गई। तीन दिन से आईजीएमसी में हार्ट ऑपरेशन ठप है। न तो...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:10 AM IST

आईजीएमसी में हार्ट रोगियों के लिए एक बार फिर से परेशानी खड़ी हो गई। तीन दिन से आईजीएमसी में हार्ट ऑपरेशन ठप है। न तो किसी रोगी का ऑपरेशन हुआ है और न ही किसी के ऑपरेशन की डेट दी जा रही है। हालांकि बुधवार को छुट्टी थी, मगर इमरजेंसी में यदि कोई मरीज आ जाता तो ऑपरेशन नहीं हो पाता। समस्या चिकित्सकों के दूसरे बैच के छुट्टी पर चले जाने के कारण खड़ी हो गई है। इस बैच में सीटीवीएस के एनेस्थीसिया चिकित्सक व हार्ट लंग्स मशीन चलाने वाले परफ्यूनिस्ट छुट्टी पर चले गए हैं। ऐसे में मजबूरन विभाग को ऑपरेशन टालने पड़े हैं। तीन दिन से यहां पर रोगी ऑपरेशन का इंतजार कर रहे हैं। इससे पहले सितंबर माह में भी ओटी रिपेयर के लिए यह ओटी करीब डेढ माह तक बंद रही थी। उस समय 250 से अधिक मरीजों के ऑपेरशन टालने पड़े थे।

4 लाख रुपए का पड़ेगा बोझ

आईजीएमसी में ऑपरेशन न होने के कारण यदि कोई पेंशेंट चंडीगढ़ में बाईपास सर्जरी करवाना चाहेगा तो उसे निजी अस्पताल का रूख ही करना होगा। जहां पर इसका कुल खर्चा करीब 4 लाख रुपए तक पड़ेगा। निजी अस्पताल में आईसीयू, बैड, दवाएं, खाना व सर्जरी का कुल खर्च 4 लाख रुपए तक पहुंच जाता है। जबकि आईजीएमसी में यह एक लाख रुपए में हो जाती है। ऐसे में अब मरीजों को परेशानी उठानी पड़ेगी। मरीजों की प्रशासन व विभाग ने काेई व्यवस्था नहीं की है।

आईजीएमसी के प्रधानाचार्य डॉ. अशोक शर्मा ने बताया कि एनेस्थीसिया चिकित्सक के छुट्टी पर जाने से ऑपरेशन नहीं हो पाए। ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था के लिए एक एनेस्थीसिया चिकित्सक को बुला दिया गया है। मरीजों को परेशानी नहीं आएगी। ऑपरेशन शुरू कर दिए जाएंगे।

इधर हांफ गई एक्सरे मशीन, मरीजों की लग गई कतारें

शिमला| आईजीएमसी अस्पताल में एक बार फिर एक्सरे मशीन ठप हो गई। जिससे मरीजों को परेशानियां उठानी पड़ी। इमरजेंसी के पास वीरवार को सुबह अचानक एक्सरे मशीन बंद हो गई। इमरजेंसी में आने वाले सभी रोगियों के एक्सरे यहां पर किए जाते हैं। इसके अलावा दोपहर 12 बजे से पहले ओपीडी में आने वाले रोगी भी यहीं पर एक्सरे करवाते हैं। मशीन के खराब होने के कारण मरीजों की लंबी कतारें लग गई। हालांकि कुछ देरबाद प्रशासन ने दूसरी मशीन शुरू की, मगर तब तक कई मरीज निजी लैब या आईजीएमसी के रेडियो डाइग्नोसिस डिपार्टमेंट में चले गए। यहां पर रोगियों को सस्ती दरों पर एक्सरे उपलब्ध करवाए जाते हैं, जबकि निजी लैब में रोगियों को 3 से 4 गुना अधिक दामों पर एक्सरे करवाने पड़ते हैं। ऐसे में मशीन खराब होने से रोगियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

आईजीएमसी के प्रधानाचार्य डॉ. अशोक शर्मा ने बताया कि तकनीकी खराबी के चलते मशीन कुछ देर के लिए बंद हुई थी। मैकेनिक को बुलाकर उसे ठीक करवा दिया गया था। हालांकि वहां पर तुरंत दूसरी मशीन भी चल दी गई थी। उससे मरीजों के एक्सरे किए जा रहे थे।

एक दर्जन के करीब ऑपरेशन टलेआईजीएमसी में सीटीवीएस विभाग रोजाना हार्ट के दो से तीन ऑपरेशन करता है। वहीं कई बार एमरजेंसी में यह ऑपरेशन अधिक भी करने पड़ते हैं। मगर अब तीन दिन से ऑपरेशन ठप है। करीब एक दर्जन मरीजों के ऑपरेशन टाल दिए हैं। कब तक यह ऑपरेशन टलते रहेंगे। यह भी चिकित्सक कुछ कह नहीं पा रहे। अब जब तक परफ्यूनिस्ट व एनेस्थीसिया के चिकित्सक की व्यवस्था नहीं हो जाती तब तक यहां पर ऑपरेशन नहीं हो पाएंगे।

आईजीएमसी में एक्सरे मशीन बंद होने के बाद कतारों में बैठे मरीज।

पुरानी मशीनों से लिया जा रहा काम आईजीएमसी में इमरजेंसी के लिए काफी पुरानी एक्सरे मशीन लगाई गई है। यह मशीन अक्सर हांफ जाती है। कुछ देर चलने के बाद यह ठप हो जाती है। फिर कई बार रेस्ट देने के बाद यह चलती है। आईजीएमसी में कई मशीन एक्सपायरी डेट में पहुंच चुकी है। मगर उनसे प्रशासन ने काम लेना बंद नहीं किया है।

एक ही एनेस्थीसिया चिकित्सकआईजीएमसी का सीटीवीएस विभाग एक ही एनेस्थीसिया चिकित्सक के सहारे चल रहा है। ऐसे में यदि वह छुट्टी चला जाए तो यहां पर मजबूरन ऑपरेशन बंद करने पड़ते हैं। मगर इस बार चिकित्सक 38 दिन के बाद लौटेंगे तो एेसे में यदि वैकल्पिक व्यवस्था न की गई तो यहां पर परेशानी होना तय है। इसके अलावा परफ्यूनिस्ट के न होने से भी हार्ट लंग्स मशीन नहीं चलती।

यह ऑपरेशन होंगे प्रभावितहार्ट से जुड़ी बाईपास सर्जरी, लंग्स सर्जरी व नाड़ियों में सर्जरी करवाने के लिए मरीजों को चंडीगढ़ पहुंचना पड़ेगा। दूसरे बैच में एनेस्थीसिया चिकित्सक छुट्टी पर हैं, वह 8 मार्च को वापिस आएंगे। यह में यदि कोई वैकल्पिक व्यवस्था न की गई तो मरीजों को ऑपरेशन करवाने के लिए पीजीआई जाना पड़ेगा। प्रदेश में किसी और कालेज या अस्पताल में यह सर्जरी होती है।

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